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प्रधान संपादक की कलम से

भारत में निष्पक्ष, पारदर्शी और अच्छी तरह विनियमित परीक्षा प्रणाली का होना बेहद जरूरी है जिसमें सभी हितधारकों का पूरा विश्वास हो, तभी हमारे यहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रणाली भी होगी

इंडिया टुडे कवर : परीक्षाओं में गड़बड़झाला (एनटीए)
इंडिया टुडे कवर : परीक्षाओं में गड़बड़झाला (एनटीए)
अपडेटेड 8 जुलाई , 2024

- अरुण पुरी

भारत की त्रासदी यह है कि इसकी प्रतिभाओं को अक्सर गुमराह करके अनैतिक जुगाड़ की तरफ धकेल दिया जाता है. हमारी उच्च शिक्षा और परीक्षा प्रणाली का इतिहास झांसों और घपलों की लंबी शृंखला मालूम देता है. मगर 2024 में तो वह भी फीका पड़ गया जब परीक्षा घोटाला तूफान की तरह आ टकराया.

यह राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (अंडरग्रेजुएट) या नीट-यूजी के साथ शुरू हुआ, जो भारत के सभी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का अकेला दरवाजा है. होनी से अनजान 23 लाख से ज्यादा छात्र 5 मई को भारत भर के 571 और विदेशों के 14 शहरों में 4,750 केंद्रों पर इस परीक्षा में बैठे.

नतीजे 4 जून को उसी दिन आए जब चुनाव के नतीजे भी आ रहे थे, इसलिए विसंगतियों की खबरों की तरफ लोगों का ध्यान जाने में वक्त लगा. मगर जल्द ही सौ फीसदी और लगभग सौ फीसदी अंक पाने वाले अभ्यर्थियों की असामान्य रूप से बड़ी संख्या और अन्य खामियों के बारे में गंभीर सवाल उठाए जाने लगे. जब तीन और परीक्षाएं इस भंवर के चक्र में आ पड़ीं तो यह मोदी 3.0 के लिए पहला धमाकेदार विवाद बन गया.

सबसे पहले पीएचडी, जूनियर रिसर्च फेलो और असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की तरफ से आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यूजीसी-नेट 18 जून को संपन्न होने के एक दिन के भीतर रद्द कर दी गई. फिर विज्ञान स्नातकों के लिए ऐसी ही एक और परीक्षा सीएसआईआर-यूजीसी-नेट शुरू होने के चार दिन पहले 21 जून को टाल दी गई. अंत में मेडिकल की पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई के लिए प्रवेशद्वार का काम करने वाली परीक्षा नीट-पीजी, जो 23 जून को होनी थी, ऐन पूर्वसंध्या पर स्थगित कर दी गई.

परीक्षाओं के इस गड़बड़झाले के केंद्र में भारत की साझा प्रवेश परीक्षाओं को सुगम और आधुनिक बनाने के लिए ही गठित संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) या राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी है. पहली नजर में इलाज खुद बीमारी की चपेट में आ गया लगता है. मई-जून 2024 के दौरान आयोजित इन तीन परीक्षाओं में ही कुल 36,83,279 छात्रों को धक्का लगा; उनके माता-पिता को भी जोड़ लें, तो हम 1 करोड़ से ज्यादा भारतीयों के बारे में बात कर रहे हैं.

सरकार चौतरफा आग बुझाते हुए मरम्मत के काम को अंजाम देने में जुटी है. इन दिनों ताकत से लैस विपक्ष भी इस विवाद के जरिए सरकार को पटखनी देने की कोशिश कर रहा है. 

पुराना सवाल है, ''पुलिस की पुलिसिंग कौन करेगा?'' इस अंक में हम आपके लिए विस्तृत रिपोर्ताज तो लेकर आए ही हैं, लेकिन उससे भी आगे जाकर समूची परीक्षा प्रणाली की जांच-पड़ताल कर रहे हैं. एनटीए का चौतरफा फोरेंसिक ऑडिट तो बेशक होना ही चाहिए.

करीब 15 प्रवेश और फेलोशिप परीक्षाओं के लिए जिम्मेदार इस एजेंसी ने 2023 में 1.23 करोड़ व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को संभाला. इसने उसे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षा आयोजक एजेंसी बना दिया. पहले नंबर पर चीन की गाओकाओ है, जिसने पिछले साल 1.29 करोड़ परीक्षार्थियों के लिए परीक्षाएं आयोजित कीं.

एग्जीक्यूटिव एडिटर कौशिक डेका हमारी आवरण कथा में बता रहे हैं कि नीट-यूजी के लिए एनटीए की प्रक्रिया की छानबीन से ऐसे 11 कमजोर बिंदु सामने आए है जिनमें मानवीय हाथ है. इसमें प्रश्नपत्र का पूरा जीवनकाल शामिल है—विषय का पर्चा सेट करने से लेकर छपाई के पहले, छपाई के दौरान और बाद में उसे रखने और लाने-ले जाने तक और परीक्षा के बाद ओएमआर या ऑप्टिकल आन्सर शीट के एकत्र किए जाने तक. कथित लीक उनमें से किसी भी बिंदु पर हुआ हो सकता है.

गड़बड़ी के और भी कई बिंदु हैं—महीने भर लंबी खिड़की बंद होने के बाद पंजीकरण की तारीख दो बार बढ़ाई गई. पता यह चला कि कुछ टॉपर ने इसी बढ़ाए गए वक्त के दौरान पंजीकरण करवाया. नतीजों की तारीख 14 जून से घटाकर 4 जून कर दी गई, यह दिन शायद अपेक्षित अनियमितताओं से ध्यान हटाने के लिए ही चुना गया.

छह 'टॉपर' बहादुरगढ़ हरियाणा के एक ही परीक्षा केंद्र के थे—उनके सीट नंबर भी एक ही क्रम में थे, और उन्होंने अपनी कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में कोई खास अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था. सवालों के घेरे में 1,567 छात्रों को 'मनमाने' ढंग से दिए गए ग्रेस मार्क भी थे, जिन्हें न्यायिक चुनौती के बाद रद्द कर दिया गया.

हफ्तों की हीला-हवाली के बाद केंद्र ने नीट का प्रश्नपत्र लीक होने की जांच सीबीआई कौ सौंप दी, जो मूलत: बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने शुरू की थी. दूसरे स्तर पर शिक्षा मंत्रालय की तरफ से गठित सात सदस्यों की समिति ने प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े तीन प्रमुख क्षेत्रों पर गौर करना शुरू कर दिया है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष डॉ के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में प्रख्यात शिक्षाविदों, शीर्ष अफसरशाहों और सरकारी नुमाइंदों की यह समिति परीक्षा को त्रुटि-शून्य प्रक्रिया बनाने के तरीके सुझाएगी, इसके इर्द-गिर्द डेटा सुरक्षा नियमों का घेरा मजबूत करेगी और सबसे अहम बात, एनटीए की जांच-पड़ताल करेगी.

एनटीए को संसद में कानून बनाकर विधिक निकाय के रूप में अस्तित्व में नहीं लाया गया, जैसे कि मूलत: परिकल्पना की गई थी. यह भारतीय सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत गठित स्वायत्तशासी निकाय है, जिसे सरकार से धन मिलता है और जो शिक्षा मंत्रालय की देखरेख में काम करता है. इसे अमेरिका की एजुकेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ईटीएस) के मॉडल के अनुरूप बनाया गया है, जो दुनिया भर में एसएटी, जीआरई और टीओईएफएल सरीखी विख्यात परीक्षाएं आयोजित करती है.

मगर ईटीएस में 200 से ज्यादा कर्मचारी हैं, जबकि एनटीए महज दो दर्जन से ज्यादा लोगों के साथ काम करती है. यह ज्यादातर प्रतिनियुक्ति पर आए सरकारी अधिकारियों और अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे है. एजेंसी को प्रश्नपत्र सेट करने, बांटने और डेटा सुरक्षा सरीखे अहम काम आउटसोर्स करने पड़ते हैं. सुधार का स्पष्ट रास्ता उस वक्त मिल सकेगा जब राधाकृष्णन समिति रिपोर्ट देगी.

इंडिया टुडे को दिए गए इंटरव्यू में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ''हमें चीजों को सौ फीसद फूलप्रूफ बनाने की जरूरत है, सरकार शून्य त्रुटि के लिए प्रतिबद्ध है.''

सुप्रीम कोर्ट भी नीट के मामले में दायर कई याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है. अगली सुनवाई 8 जुलाई को है. अपनी एक दशक लंबी जिंदगी में नीट परीक्षा के स्थापत्य को ही भारी आलोचनाएं सहनी पड़ीं. 2013 में इसके जन्म के ठीक बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे ''असंवैधानिक'' करार देकर रद्द कर दिया. 2016 में इसकी कानूनी बहाली से उन सारे सवालों पर विराम नहीं लग पाया जिनमें दक्षिणी राज्यों की तरफ से उठाए गए कई सवाल भी हैं.

उम्मीद करनी चाहिए कि कुछ बुनियादी मुद्दों की फिर पड़ताल की जाएगी. इस बीच हमारी आवरण कथा में दुनिया भर की सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं पर विचार करते हुए भारत की परीक्षाओं से जुड़ी गड़बड़ियों को हल करने के तरीके प्रस्तावित हैं. भारत में निष्पक्ष, पारदर्शी और अच्छी तरह विनियमित परीक्षा प्रणाली का होना बेहद जरूरी है जिसमें सभी हितधारकों का पूरा विश्वास हो, तभी हमारे यहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रणाली भी होगी.

- अरुण पुरी, प्रधान संपादक और चेयरमैन (इंडिया टुडे समूह)

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