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रोजगार के मुद्दे पर झटका खा चुकी सरकार का बेड़ा पार लगा पाएंगे मनसुख मांडविया?

भारत की गिग इकोनॉमी आधारित अर्थव्यवस्था बढ़ने के साथ जरूरी हो गया है कि मंत्रालय संशोधित श्रम संहिताओं को तत्काल लागू करने पर जोर दे

मनसुख मांडविया
मनसुख मांडविया
अपडेटेड 28 जून , 2024

श्रम ब्यूरो की तरफ से जारी हालिया तिमाही रोजगार सर्वे (क्यूईएस) के नतीजे बताते हैं कि अर्थव्यवस्था के नौ प्रमुख गैर-कृषि क्षेत्रों में संविदा कर्मचारियों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही में दोगुनी से अधिक बढ़कर करीब 18 फीसद हो गई, जो वित्त वर्ष 2022 की दूसरी छमाही में करीब 8.5 फीसद थी. सर्वे में विनिर्माण, निर्माण, व्यापार, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, होटल और रेस्तरां, सूचना प्रौद्योगिकी/बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग और वित्तीय सेवाएं शामिल की गईं थीं.

उधर, उद्योग अनुमानों के मुताबिक, भारत में 1.5 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी बतौर फ्रीलांसर प्रौद्योगिकी परियोजनाओं से जुड़े हैं, और देश की गिग इकोनॉमी 17 फीसद की सीएजीआर (वार्षिक चक्रवृद्धि दर) से बढ़ रही है. अर्थव्यवस्था में लगातार बदलावों के बीच नौकरियां चली जाना एक बड़ी चिंता का विषय है. इसे देखते हुए सरकार के लिए देश के जटिल श्रम कानूनों को अपडेट करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है.

वैसे मंत्रालय पहले से ही रोजगार के नए अवसर सृजित करने, सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने और महामारी जैसे कारणों से ठप पड़े रोजगार को बहाल करने की योजनाएं चला रहा है. उदाहरण के तौर पर, आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत पिछले वित्त वर्ष के अंत तक 60 लाख से अधिक लाभार्थियों को 10,188 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया. चुनाव नतीजे दिखाते हैं कि इसे और व्यापक स्तर पर पहुंचाना होगा.

क्या किया जाना चाहिए

श्रम संहिताओं पर अमल - राज्यों को औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा, मजदूरी, और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों पर आधारित चार संहिताओं के लिए दिशानिर्देश तैयार करने और उन्हें लागू करने के लिए प्रोत्साहित करें. ये संहिताएं 2019-20 में अधिनियमित की गई थीं, लेकिन अभी तक पूरी तरह लागू नहीं की गई थीं. ये श्रम कानूनों में सुधार लाने के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं.

अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम - उद्योग अनुमानों के मुताबिक, भारत को अगले कुछ वर्षों में 2 करोड़ से अधिक अप्रेंटिस की जरूरत होगी. ऐसे में जरूरी है कि इस व्यवस्था को सरल बनाया जाए. राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल को नया रूप देकर नौकरी चाहने वालों और देने वालों दोनों को और अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकेगा.

नौकरी के लिए सही कौशल - निजी क्षेत्र को श्रम की मांग बढ़ाने के लिए और प्रोत्साहित करना होगा. इसके साथ ही, मांडविया को कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि संभावित कामगारों के लिए सही शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके.

उद्यमशील - बतौर राज्यमंत्री कई विभागों को संभालने के बाद 2021 में कोविड-19 महामारी चरम पर होने के दौरान उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया. हर जिम्मेदारी गंभीरता से निभाने वाले मांडविया ने ऑक्सीजन की कमी दूर करने के लिए व्यावहारिक कदमों का सहारा लिया.

किसके सर है जिम्मेदारी?

मनसुख मांडविया, 52 वर्षः भाजपा
श्रम एवं रोजगार मंत्री

साधारण शुरुआत - भावनगर जिले में एक किसान परिवार में जन्मे, उन्होंने स्थानीय विश्वविद्यालय से स्नातक किया. 2021 में उन्होंने राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की.

लोकसभा में एंट्री - पूर्व एबीवीपी नेता मांडविया 2002 में पालीताना से जीतकर गुजरात के सबसे युवा विधायक बने. अब पोरबंदर से पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए. 2012 से वे राज्यसभा के सदस्य थे.

जुझारू - राज्यमंत्री के रूप में कई विभागों को संभालने के बाद उन्हें 2021 में कोविड-19 महामारी के चरम के दौरान स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का प्रभार दिया गया; ऑक्सीजन की कमी से निबटने के लिए व्यावहारिक उपाय किए.

राज्यमंत्री

शोभा करंदलाजे, 57 वर्ष 
साथ ही, राज्यमंत्री, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय.

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