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कितनी तेजी से भारतीय इनोवेशन को विस्तार दे पाएंगे विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह?

अगर भारत भविष्य का हिस्सा बनना चाहता है तो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेन्द्र सिंह को देश को तकनीकी प्रगति में तेजी से आगे बढ़ाना होगा

डॉ. जितेंद्र सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान
डॉ. जितेंद्र सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान
अपडेटेड 26 जून , 2024

दुनिया के पांचवीं औद्योगिक क्रांति या आईआर 5.0 की ओर बढ़ने और संभवत: अगले दशक में छठी या सातवीं आईआर की ओर जाने के साथ ही तेजी से उन्नत होती तकनीक विभिन्न देशों की महत्वाकांक्षाओं को उड़ान देने के लिए लॉन्चपैड बन गई है.

क्या भारत इसके लिए तैयार है? बिल्कुल नहीं. भविष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या एआई है, जो 6जी की असीम कनेक्टिविटी के साथ मिलकर डिजिटल, फिजिकल (भौतिक) और मानवीय दुनिया के सहज मेल को सक्षम बनाएगा.

वेब 3.0, ब्लॉकचेन तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और सिंथेटिक बायोलॉजी की तो बात ही छोड़ दीजिए. अंतरिक्ष में, एयरोस्पेस सिस्टम का एक पूरा परिदृश्य खुल रहा है—आर्थिक गतिविधि के रूप में सिस्लूनर स्पेस (पृथ्वी-चंद्रमा गलियारा); अंतरिक्ष रोबोटिक्स और मानव-आधारित अंतरिक्ष अन्वेषण का एक मिला-जुला रूप; नियर-अर्थ ऑर्बिट और ड्रोन से परे अंतरिक्ष पर्यटन; इससे अंतिम समय में डिलिवरी और युद्ध की तकनीक में जबरदस्त बदलाव आना है.

एक ओर भारत में जागरूकता और रुचि है, लेकिन उचित विज्ञान-तकनीक नीतियों और अनुसंधान प्राथमिकताओं के साथ-साथ वित्त पोषण तंत्र की अनुपस्थिति में वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने का काम जैसे-तैसे चल रहा है. जैसे-जैसे देश अंतरिक्ष यात्रा करने वाले देशों में अपना स्थान बना रहा है, इन खाइयों को तेजी से भरने की जरूरत है.

क्या किया जाना चाहिए 

- एक बड़ी छलांग की जरूरत

एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और बायोइकोनॉमी जैसी महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए राष्ट्रीय मिशन घोषित किए गए हैं. 2023 में, भारत के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, शोध संस्थानों और अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं में अनुसंधान और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना की गई थी.

सरकार ने इस साल के अंतरिम बजट में 1 लाख करोड़ रुपए के दीर्घकालिक वित्त पोषण का भी संकल्प लिया है. इन्हें तेजी से लागू करने और फंडिंग, बुनियादी ढांचे, कौशल अंतराल को भरने की जरूरत है

- गगनयान की सफलता के आगे

चंद्रमा पर एक अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक उतारने के बाद, भारत को सफलतापूर्वक एक मानवयुक्त मिशन भेजने की जरूरत है. भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए इसे विश्वसनीय भारी-भरकम लॉन्चर बनाने की भी जरूरत है
 
- परमाणु ऊर्जा क्षमताओं को बढ़ाएं

वर्तमान में, भारत 6.8 गीगावॉट की कुल क्षमता के साथ 22 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर संचालित करता है, जो देश के ऊर्जा मिश्रण में लगभग 3 फीसद का योगदान देता है. इस योगदान को बढ़ाने की जरूरत है, और इसका उपयोग कृषि, स्वास्थ्य सेवा और अंतरिक्ष अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में बढ़ाया जाना चाहिए

- अंतरिक्ष स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन

भारत हाल के दिनों में बड़े पैमाने पर सरकारी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को खोलने के प्रयास कर रहा है. अंतरिक्ष नीति, 2023, और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) की स्थापना के बाद 190 नए अंतरिक्ष तकनीक स्टार्ट-अप का जन्म हुआ. भारत को अब इसे अन्य विषयों तक फैलाने की जरूरत है

डॉ. जितेंद्र सिंह, 67 वर्ष, भाजपा

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान

> प्रारंभिक जीवन डॉ. सिंह जम्मू के एक हिंदू डोगरा परिवार के वंशज हैं. ग्वालियर के सिंधिया स्कूल के इस पूर्व छात्र ने मेडिसिन के क्षेत्र में पढ़ाई की और जम्मू विश्वविद्यालय में डायबिटीज और एंडोक्राइनोलॉजी के प्रोफेसर रहे

>राजनीतिक मोड़ उनका सियासी सफर अमरनाथ भूमि हस्तांतरण मामले में सक्रिय भागीदारी के साथ शुरू हुआ, तब उन्होंने अपनी टीचिंग की नौकरी छोड़ दी. वे 2012 में भाजपा में शामिल हुए और 2014 में गुलाम नबी आजाद और 2019 में महाराजा हरि सिंह के पोते विक्रमादित्य सिंह को हराया. उधमपुर से यह उनकी लगातार तीसरी जीत है

मौजूदा भूमिका डॉ. ‌सिंह 2014 से ही इसी भूमिका में हैं. इस दौरान भारत ने मंगल और चंद्रमा पर मिशन के साथ अपने अंतरिक्ष कौशल का प्रदर्शन किया है, इसके अलावा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सफलता और नवाचार के लिए एक सुपर-रिसर्च फंडिंग एजेंसी के रूप में राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन बनाने के लिए कानून बनाया है

विशेषज्ञ की राय

डॉ. के. राधाकृष्णन, पूर्व चेयरमैन, स्पेस कमिशन; इसरो

''भारत को रणनीतिक क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी सुरक्षा के दीर्घकालिक लक्ष्य के अलावा कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी पर्याप्तता पर शीघ्र ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है''

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