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मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाने के लिए एच डी कुमारस्वामी को करनी पड़ सकती है मशक्कत

भारतीय उद्योग जगत की उत्पादन क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर इनकी नीतियों का पड़ेगा सीधा असर

एच.डी. कुमारस्वामी
एच.डी. कुमारस्वामी
अपडेटेड 28 जून , 2024

भारी उद्योग मंत्रालय घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और औद्योगिक वृद्धि को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. मंत्रालय के सबसे बड़े हिस्सों में से एक है ऑटो क्षेत्र. कई विकसित बाजारों में मंदी के कारण वित्त वर्ष 24 में इस क्षेत्र का निर्यात 5.5 फीसद गिरा है. उद्योग मंत्रालय से पहले ही मोदी 3.0 के शुरू के 100 दिन के लिए व्यापक योजना तैयार करने को कहा जा चुका है.

मंत्रालय के दायरे में अन्य जो क्षेत्र हैं, उनमें भारी इंजीनियरिंग उपकरण मशीन टूल्स और भारी इलेक्ट्रिक उपकरण शामिल हैं जिनमें घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और ज्यादा प्रतिस्पर्धी तरीके से निर्यात करने की काफी गुंजाइश है.

इस्पात में सस्ते आयात की बढ़ती चुनौतियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. इस वर्ष के अंत तक सरकार की योजना है कि पीएलआई के जरिए घरेलू कच्चे माल के उत्पादन को प्रोत्साहन देकर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए. फिर भी अभी काफी कुछ करने की जरूरत है.

क्या किया जाना चाहिए

मेक इन इंडिया - आयात निर्भरता घटाने पर फोकस. यहां मंत्रालय को यह आकलन करना है कि पीएसयू कैसा करते हैं और क्या उनको निजी क्षेत्र के साथ काम करने की जरूरत है.

उत्पादन को बढ़ावा - इस्पात मंत्रालय को भारत बड़ा निर्यातक बनाने के तरीकों की तलाश करनी है. योजना यह है कि राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 के अनुरूप 2030-31 तक इस्पात की क्षमता 30 करोड़ टन की जाए.

हरित इस्पात - क्योंकि भारतीय इस्पात और लौह पर यूरोपीय संघ का 12 फीसद बॉर्डर टैक्स 2026 से अस्तित्व में आना है. ऐसे में घरेलू कंपनियों को टिकाऊ उत्पादन तकनीकों पर अमल करना है. लिहाजा, केंद्र को हरित इस्पात के इस्तेमाल के लिए अंतिम उपभोक्ता को प्रोत्साहित करना चाहिए.

किसके सर है जिम्मेदारी?

एच.डी. कुमारस्वामी, 64 वर्षः जद (एस)
भारी उद्योग और इस्पात मंत्री

फिर एनडीए में वापस - पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पुत्र कुमारस्वामी जनता दल (सेक्युलर) के अध्यक्ष हैं और उन्होंने दूसरी बार भाजपा से हाथ मिलाया है.

केंद्र में कदम - कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने मांड्या सीट से लोकसभा में प्रवेश किया है और पहली बार केंद्रीय मंत्री बने हैं.

राज्यमंत्री

बी.आर. श्रीनिवास वर्मा, 59 वर्षः भाजपा

कार्यकर्ता से नेता तक आंध्र प्रदेश भाजपा के जमीनी नेता वर्मा नरसपुरम लोकसभा सीट से निर्वाचित हुए हैं.

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