भारत का कपड़ा उद्योग देश की आर्थिक ताने-बाने में एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो जीडीपी में 2.3 फीसद, औद्योगिक उत्पादन में 13 फीसद और निर्यात में 12 फीसद का योगदान देता है. कपड़ा और परिधान क्षेत्र - दूसरे सबसे बड़े नियोक्ता के रूप में खड़ा है, जो सीधे 4.5 करोड़ श्रमिकों को रोजगार देता है और अप्रत्यक्ष रूप से संबद्ध उद्योगों में 10 करोड़ से अधिक का समर्थन करता है - खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत बेरोजगारी के संकट से जूझ रहा है.
वैश्विक व्यापार में 4 फीसद हिस्सेदारी के साथ, निर्यात 2019-20 से 10 फीसद सीएजीआर पर बढ़ने का अनुमान है, जो 2025-26 तक 190 अरब डॉलर (15.88 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच जाएगा. लेकिन निर्यात पर इस उद्योग की भारी निर्भरता से उसके सामने ढेरों चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं.
पश्चिमी बाजारों में मंदी और व्यापार मार्गों को बाधित करने वाले चल रहे संघर्षों ने भारत के निर्यात की मात्रा को कम कर दिया है. गारमेंट एक्सपोर्टर्स ऐंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव अनिमेष सक्सेना कहते हैं, "सरकार को न केवल अपने महत्वपूर्ण वार्षिक राजस्व योगदान के लिए बल्कि रोजगार सृजन में कपड़ा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए भी इसको प्राथमिकता देनी चाहिए."
क्या किया जाना चाहिए
केंद्रीय नीति - फिलहाल इस क्षेत्र के लिए अधिकांश योजनाएं राज्य की ओर से संचालित हैं, जिसकी वजह से लाभ में क्षेत्रीय असमानताएं हैं. अभी आवश्यकता है एक केंद्रीय कपड़ा नीति की, जो मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन, पूंजी निवेश के लिए सब्सिडी और क्षमता निर्माण पर केंद्रित हो.
फिर से कौशलीकरण - कपड़ा श्रमिकों के लिए सेक्टर स्किल काउंसिल मुख्य रूप से नए कामगारों को प्रशिक्षित करने पर ध्यान केंद्रित करती है. तेजी से तकनीकी प्रगति के साथ ही कार्यबल को फिर से कुशल बनाने के लिए कार्यक्रमों की जरूरत है.
आयात शुल्क - वैश्विक बाजार के 65 फीसद पर मानव निर्मित फाइबर का प्रभुत्व है, लेकिन कच्चे माल के आयात के लिए अप्रतिस्पर्धी शुल्क संरचनाओं की वजह से भारत इस आकर्षक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने के लिए संघर्ष करता है.
छोटे उद्योगों के लिए प्रोत्साहन - कपड़ा उद्योग के लिए पीएलआई योजना वर्तमान में 100 करोड़ रुपए से अधिक के टर्नओवर वाले निर्माताओं को लक्षित करती है. छोटे पैमाने के निर्माताओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन की जरूरत है.
किसके सर है जिम्मेदारी?
गिरिराज सिंह, 71 वर्षः भाजपा
कपड़ा मंत्री
भूमिहार चेहरा - बिहार में भाजपा के एक प्रमुख भूमिहार नेता, गिरिराज सिंह ने 1971 में मगध विश्वविद्यालय से स्नातक किया.
मुखर व्यक्तित्व - अपनी तीखी बयानबाजी और विवादास्पद टिप्पणियों के लिए जाने जाने वाले गिरिराज सिंह ने नवादा से लोकसभा के लिए चुने जाने से पहले एमएलसी (2002-2014) के रूप में अपना राजनैतिक जीवन शुरू किया.
लगातार तीन बार - स्थानांतरित होकर 2019 में बेगूसराय से जीते; सीट बरकरार. पिछले मोदी मंत्रिमंडल में ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पशुपालन सहित विभिन्न विभागों को संभाला.
राज्यमंत्री
पबित्र मार्गरीटा, 49 वर्षः भाजपा
असम से राज्यसभा सदस्य मार्गरीटा विदेश मंत्रालय में भी राज्यमंत्री हैं.

