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प्रधान संपादक की कलम से

भारत में युवा आबादी की संख्या रूस की कुल आबादी से भी ज्यादा है. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कुल 1.84 करोड़ युवा पहली बार वोट डालने जा रहे हैं और सभी पार्टियों की निगाह इनपर है

इंडिया टुडे कवर: क्यों निर्णायक हैं नई पीढ़ी के वोट
इंडिया टुडे कवर: क्यों निर्णायक हैं नई पीढ़ी के वोट
अपडेटेड 29 अप्रैल , 2024

- अरुण पुरी

हाल में जारी मुख्य राजनैतिक दलों के घोषणापत्र युवाओं के लिए वादों से भरे पड़े हैं. इसकी वजह भी है. जब भारत नई लोकसभा चुनने के लिए 19 अप्रैल से मतदान करने जा रहा है, इस जनसांख्यिकी की नुमाइंदगी 18 से 29 के बीच की उम्र के 21 करोड़ युवाओं का विशाल तबका करेगा, जो कुल मतदाताओं के 22 फीसद हैं.

आकार में यह आबादी के लिहाज से रूस को पीछे छोड़ देता है और इतना बड़ा है कि दुनिया का आठवां सबसे बड़ा देश बनाने के लिए काफी है. इनमें 1.84 करोड़ पहली बार के मतदाता होंगे. दशक भर पहले तक युवा मतदान का प्रतिशत ऐसे स्तरों पर था कि कुल मतदान के सात फीसद अंक नीचे तक चला गया था. वह फासला अब घटने लगा है. 

इस बात का निर्णायक सबूत 2019 में ही मिल गया था, जब 18-29 आयु वर्ग के मतदाताओं में मतदान का प्रतिशत 67 फीसद था, जो कुल मतदान से महज 1 फीसद कम था. इसका मतलब था 15.3 करोड़ वोट.

लोकनीति-सीएसडीएस के चुनाव-बाद सर्वे से पता चला कि युवा मतदाताओं ने चुनाव का पलड़ा भाजपा के पक्ष में झुका दिया था. सर्वे से यह भी पता चला कि 41 फीसद या करीब 6.3 करोड़ युवा मतदाताओं ने भाजपा का समर्थन किया था. कांग्रेस और भाजपा के बीच यह 1.10 करोड़ यानी 57 फीसद वोट अंतर था. यह 2014 में भाजपा को मिले युवा वोटों से 7 फीसद ज्यादा था. 

नतीजा यह कि 2024 के चुनाव में प्रमुख पार्टियों और उनके नेताओं के प्रचार अभियान ज्यादा से ज्यादा युवाओं की पसंद के हिसाब से ढाले जा रहे हैं और संचार के नए चर्चित चैनलों में दाखिल हो रहे हैं. पहले चरण के मतदान से ठीक आठ दिन पहले 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सात शीर्ष भारतीय गेमर के साथ जुड़ते देखा गया.

मार्च में वे बीयरबायसेप्स और कर्ली टेल्स सरीखे लोकप्रिय यूट्यूब चैनल चलाने वाले सोशल मीडिया के इन्फ्लुएंसर के साथ हंसी-दिल्लगी करते देखे गए. जहां तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी की बात है, जो 53 साल की उम्र में थोड़ा-सा खींचकर 'युवा नेता' की धारणा के दायरे में आ जाते हैं, यह जुड़ाव काफी जैविक है.

विश्वविद्यालयों में क्यूऐंडए सत्रों और टाउनहॉल से लेकर डिलिवरी बॉयज के साथ मसाला डोसा ब्रेक, बाइक मैकेनिकों के साथ मशक्कत और अपने चुनाव वाहनों के ऊपर बेरोजगार युवाओं को चढ़ा लेने तक राहुल सुनिश्चित करते हैं कि युवा जीवंतता उनमें झलके.

मोदी ने नेताओं के गैर-राजनैतिक, खुले दिल से बातचीत करने की इस अवधारणा का दोहन 2019 में बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार के साथ इंटरव्यू से किया था.

मगर इन नई गतिविधियों का सिलसिला ट्रैवल ब्लॉगर कामिया जानी के कर्ली टेल्स चैनल पर लोकप्रिय कार्यक्रम संडे ब्रंच से शुरू हुआ, जब पिछले साल जनवरी में उन्होंने राहुल को उनकी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिखाया. शो वायरल हो गया और अब तक 17 लाख व्यू बटोर चुका है.

हाल में दो केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी से सजे कर्ली टेल्स के एपिसोड नितिन गडकरी के साथ वड़ा-पाव और चीनी खानों का सत्र (30 लाख व्यू) और स्मृति ईरानी के साथ होम डिनर (17 लाख व्यू) ने उस मोर्चे को गुलजार रखा है.

लेकिन वह क्या है जो युवा मतदाता के दिल को छूता है? सभी की तरफ से संचार के ये तरीके संवाद और सौहार्द के स्वाभाविक जज्बे की तरफ इशारा करते हैं. अलबत्ता इन बातचीत की विषय सामग्री सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के नजरियों के बीच दिलचस्प फर्क पेश करती है.

भाजपा का नजरिया गौरव पर आधारित है, जो धर्म और राष्ट्रवाद सरीखी पहचान की थीमों के इर्द-गिर्द सकारात्मक भावनाएं पैदा करने और दोहन करने का जतन करता है. निश्चित रूप से इसकी अपनी गूंज है.

फरवरी के इंडिया टुडे देश का मिज़ाज सर्वे में 18-24 आयु समूह के 23 फीसद उत्तरदाताओं ने अयोध्या में राम मंदिर को मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर चुना, जो राष्ट्रीय औसत से 6 फीसद अंक ज्यादा थे.

भारत की वैश्विक छवि को लेकर चल रही चर्चा हिंदुत्व की उस अपील का स्वाभाविक 'राष्ट्रवादी' नतीजा है, और जी20 की अध्यक्षता, चंद्रयान-3 की कामयाबी, भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का वादा और 2036 में ओलंपिक खेलों को भारत लाने की पेशकश उसे खुराक दे रही हैं. यह सपना भारत को 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने की मोदी की अवधारणा में समाहित है. 

दूसरी तरफ कांग्रेस और बाकी विपक्ष बुनियादी, व्यावहारिक और अस्तित्ववादी नजरिया अपना रहा है. वे अर्थव्यवस्था की धूसर रंगतों और खासकर बेरोजगारी की तरफ उंगली उठा रहे हैं. 15-29 आयु समूह के शिक्षित बेरोजगार युवाओं की हिस्सेदारी एक दशक पहले के 54 फीसद से बढ़कर 2022 तक 66 फीसद हो गई थी.

बेरोजगारी के मोर्चे पर ऐतिहासिक ऊंचाइयां राहुल के समग्र विमर्श का मूलमंत्र हैं. युवाओं के लिए पार्टी की ठोस गारंटियां निराशा भरे इस इलाके के मर्म पर चोट करती हैं, जिनमें नए पढ़कर निकले युवाओं के लिए प्रति वर्ष 1 लाख रुपए के स्टाइपेंड के साथ सुनिश्चित एप्रेंटिसशिप की अभिनव योजना, 30 लाख खाली पड़े सरकारी पदों को भरना और शिक्षा ऋणों को एकबारगी एकमुश्त माफ करना शामिल है, जबकि जाति जनगणना   के मार्फत नौकरियों में आरक्षण भी इसी सम्मिश्रण का हिस्सा है. बिहार के 34 वर्षीय तेजस्वी यादव सरीखे युवा विपक्षी नेता भी एकाग्र ध्यान देते हुए इसी भूभाग को खंगाल रहे हैं. यह कैसे कारगर होगा, इस पर वाकई ध्यान नहीं दिया गया है.

कुल मिलाकर एक नई समझ और सजगता आई है कि नई सरकार चुनने के जरिए हम भारत के भविष्य का खाका चुन रहे हैं. यही वजह है कि इस आवरण कथा में हमने 18-29 आयु समूह के युवा मतदाताओं को 'जेन वी' या विकसित भारत पीढ़ी कहा है, क्योंकि अपनी आजादी के 100वें साल का जश्न मनाते वक्त अगर भारत विकसित देश बनकर उभरता है तो सबसे ज्यादा फायदा उन्हें ही मिलेगा.

इस हफ्ते एग्जीक्यूटिव एडिटर कौशिक डेका चुनावी भूदृश्य के इस बेहद अहम हिस्से की पड़ताल कर रहे हैं, जबकि हमारी संपादकीय टीम भारत के कोने-कोने तक फैलकर युवा मतदाताओं की दहलीज तक गई, जिन्हें हम युवाओं से बातचीत के विस्तृत हिस्से में अपने मन की बात कहते हुए पेश कर रहे हैं. उनके लिए यह बोलने, वोट देने और अपने भविष्य के बारे में अपनी बात कहने का अच्छा समय है. आबादी में अनुपात के लिहाज से भारत अपने मशहूर 'जनसांख्यिकीय लाभांश' के शिखर से नीचे उतरना शुरू हो गया है. पार्टियों के पास इस फसल को भुनाने का यह आखिरी मौका हो सकता है.

- अरुण पुरी, प्रधान संपादक और चेयरमैन (इंडिया टुडे समूह)

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