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आमने-सामने: मोदी, सांप्रदायिकता पर क्या बोलें थरूर और चंद्रशेखर?

तिरुवनंतपुरम से तीन बार के कांग्रेस सांसद शशि थरूर और भाजपा के राजीव चंद्रशेखर ने मुख्य चुनावी मुद्दों पर इंडिया टुडे के ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा से बात की. यहां पेश हैं उनके जवाबों के अंश

कांग्रेस सांसद शशि थरूर और भाजपा के राजीव चंद्रशेखर
कांग्रेस सांसद शशि थरूर और भाजपा के राजीव चंद्रशेखर
अपडेटेड 26 अप्रैल , 2024

परफॉर्मेंस की राजनीति

शशि थरूर: परफॉर्मेंस के दो अर्थ हैं. एक वह जो पिछले 15 साल में मैंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में किया है—मलयालम और अंग्रेजी में 60 पेज की रिपोर्ट में सारे ब्योरे दिए हैं कि मैंने क्या किया है. दूसरा अर्थ है अभिनय या मंच पर प्रदर्शन. भाजपा यही करती है—मीडिया के कैमरों के सामने प्रदर्शन, आम जनता के आगे प्रदर्शन. भाजपा शासित केंद्र ने केरल से तीन वादे किए थे. एक भी पूरा नहीं किया, जिनमें एम्स की स्थापना का वादा भी था.

राजीव चंद्रशेखर: इस निर्वाचन क्षेत्र में बहुत कम काम हुआ है. लोगों को संसद और राज्य विधानसभा के बारंबार जनादेश मिलने के बावजूद तिरुवनंतपुरम में दिखाने के लिए बहुत ही कम है. यह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि पिछले 15 साल में थरूर ने बहुत कम काम किया. उन्होंने वादे किए, जिनमें ऐसे वादे भी थे जो उन्हें कभी करने ही नहीं चाहिए थे—जैसे तिरुवनंतपुरम को बार्सिलोना में बदल देना.

अल्पसंख्यकों पर हमले

थरूर: पूरे केरल में केंद्र सरकार को उखाड़ फेंकने की इच्छा है. हमारे यहां ऐसी भाजपा सरकार है जो पूरे उत्तर भारत में मुसलमानों और उत्तर-पूर्व खासकर मणिपुर, जहां 230 चर्च नष्ट कर दिए गए, में ईसाइयों पर कहर बरपाने के बाद भी उनके वोट मांग रही है. प्रधानमंत्री मोदी ने वहां जाकर सांत्वना देने तक की जहमत नहीं उठाई.

चंद्रशेखर: मणिपुर में जो हुआ, उसके बारे में लोगों ने गलत सूचनाएं फैलाई हैं. मैंने चुनावी सभाओं में बताया कि इसकी वजह गहरी जड़ें जमाए बैठी जातीय हिंसा और शत्रुता है जो मोदी सरकार के पहले से चली आ रही है. हम विरासत में मिली समस्याएं सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें खुली सीमाओं और प्रवासन के मुद्दे शामिल हैं.

सांप्रदायिक सौहार्द

थरूर: सामाजिक सौहार्द नष्ट हो गया है. मोदी सरकार और भाजपा कार्यकर्ता मुसलमानों के साथ जैसा बर्ताव करते रहे हैं, वह भारतीय स्वतंत्रता के उस पवित्र समझौते के साथ विश्वासघात से कम नहीं है जिसके लिए महात्मा गांधी ने अपना जीवन बलिदान कर दिया. अपने होठों पर 'हे राम' के साथ उनके प्राण निकले और भाजपा रामराज्य की बात करती है. यह पूछना वाजिब है—वह गांधी जी के राम राज्य की बात कर रही है या गोडसे के राम राज्य की?

चंद्रशेखर: इंडिया गठबंधन के भागीदार अल्पसंख्यकों में भय पैदा करने और झूठ फैलाने की अपनी पुरानी रणनीति का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसमें सीएए और मणिपुर भी शामिल है. मैंने इस क्षेत्र के चप्पे-चप्पे का दौरा किया है और हर समुदाय, लिंग, जाति और धर्म के लोगों से मिला हूं. वे ऐसा सांसद चाहते हैं जो फर्क लाएगा. आपका धर्म मायने नहीं रखता.

मोदी का ट्रैक रिकॉर्ड

थरूर: मोदी सरकार की रहनुमाई में इस देश ने बेरोजगारी के अब तक के सबसे बदतरीन आंकड़े देखे, जिसके सबसे बड़े शिकार शिक्षित युवा हुए. केरल में 20-24 आयु समूह के 45 फीसद से ज्यादा युवा बेरोजगार हैं.

चंद्रशेखर: दस साल के शासन में मोदी ने देश को जिस तरह बदला है, उसकी तुलना आसानी से केरल में वाम हुकूमत के आठ साल और केंद्र में उससे पहले के कांग्रेस के दस साल के शासन से की जा सकती है. लोग भाजपा को ऐसी पार्टी के रूप में देख रहे हैं जो उनके और उनके बच्चों के लिए, विकास और समृद्धि के लिए बेहतर भविष्य बनाने में मदद करेगी.

राम मंदिर का असर

थरूर: मंदिर के उद्घा टन में शामिल न होने के पीछे कांग्रेस की वजह यह थी—ऐसे राजनैतिक आयोजन में क्यों शामिल होना जिसके मुख्य पुरोहित प्रधानमंत्री हों? मैंने लोगों से कहा, ''मैं अपने राम को भाजपा को समर्पित करने नहीं जा रहा हूं.’’ मुझे नहीं लगता कि राम पर भाजपा का कॉपीराइट है. उपासक के रूप में मैं किसी गैर-राजनैतिक मौके पर जाऊंगा.

चंद्रशेखर: यह मेरा फोकस नहीं. मेरा चुनाव अभियान लोगों की आकांक्षाओं पर आधारित है—निवेश, नौकरियां, हुनर सीखना, प्रगति जिसमें सभी समुदाय शामिल हों. यह मोदी सरकार की सबका साथ सबका विकास नीति के बारे में है.

संपत्ति को लेकर विवाद

थरूर: बजाय इसके कि उनके हलफनामे में संपत्ति के खुलासे को लेकर हुई गलतियों के कारण उन्हें अयोग्य घोषित किया जाए, मैं उन्हें निष्पक्ष रूप से हराना पसंद करूंगा. पर झूठे हलफनामे को चुनौती देना लोकतांत्रिक अधिकार है.

चंद्रशेखर: यह वही जानकारी है जो मैं 18 साल से दे रहा हूं. यह पूरी तरह सटीक है.
’’इंडिया गठबंधन के भागीदार अल्पसंख्यकों को भयभीत करने और झूठ फैलाने की अपनी पुरानी रणनीति को अपना रहे हैं जिसमें सीएए और मणिपुर भी शामिल हैं’’

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