अगर माइक्रो-मैनेजमेंट को एक पैमाना मानें तो नरेंद्र मोदी इस मामले में भी अन्य राष्ट्रीय पार्टियों से आगे नजर आते हैं. प्रधानमंत्री भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की हर बैठक में लंबा समय बिता रहे हैं. बताया जाता है कि पार्टी की पहली सूची जारी होने से पहले वे रात करीब आठ बजे से लेकर सुबह करीब तीन बजे तक चयन प्रक्रिया में डूबे रहे. एक केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यहां तक कि उन्होंने उस दौरान कोई बायो ब्रेक भी नहीं लिया और पूरे वक्त केवल तीन ग्लास नारियल पानी पीकर रहे.
इसके उलट, राहुल गांधी अपनी पार्टी की सीईसी की पिछली लगातार कम से कम तीन बैठकों में शामिल नहीं हुए हैं. वरिष्ठ नेताओं से लोकसभा चुनाव लड़ने का उनका आह्वान भी उन पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. इस मांग को लेकर फुसफुसाहट बढ़ रही है कि वह और उनकी बहन प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ें, मगर भाई-बहन ऐसा करने को तैयार नहीं हैं. मां सोनिया गांधी के राज्यसभा का रास्ता चुनने की वजह से, अब 1999 के बाद पहली बार इस राज्य से लोकसभा में गांधी परिवार का कोई प्रतिनिधि नहीं होगा.
झारखंड/ घर का झगड़ा
असल में कुर्सी रिश्तेदारी नहीं देखती. चुनाव के वक्त यह और साफ हो जाता है. भाजपा ने 24 मार्च को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की रंजिशजदा भाभी सीता सोरेन को दुमका लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए टिकट देकर साफ कर दिया कि वह इस पारिवारिक गढ़ से सोरेन परिवार की पकड़ को तोड़ना चाहती है.
सीता शिबू सोरेन के सबसे बड़े बेटे और 2009 में दिवंगत दुर्गा सोरेन की विधवा हैं. वे 19 मार्च को झारखंड मुक्ति मोर्चा और अपनी सीट छोड़कर भाजपा में आईं. जनवरी में प्रवर्तन निदेशालय के हाथों गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में बंद हेमंत की पत्नी कल्पना के साथ तीखे मतभेदों की वजह से सीता ने पार्टी छोड़ी. कहा जाता है कि सीता के विरोध के कारण ही हेमंत की गिरफ्तारी के बाद कल्पना को मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सका.
उत्तर प्रदेश/ नई परंपरा
बागपत लोकसभा सीट और चौधरी चरण सिंह का परिवार एक-दूजे के पर्याय रहे हैं. मगर 2024 में यहां नई पटकथा लिखी जा रही है. बीते 47 वर्ष में पहली बार इस लोकसभा सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ रहा है. 1977 के लोकसभा चुनाव में चौधरी चरण सिंह पहली बार बागपत से चुनाव लड़े थे.
फिर हर चुनाव में उनके परिवार के सदस्य ही वहां से लड़ते आए हैं. 2014 में अजित सिंह और 2019 में जयंत चौधरी ने वहां से चुनाव लड़ा, पर दोनों हार गए. 2024 के चुनाव में राष्ट्रीय लोक दल अध्यक्ष जयंत चौधरी ने नई परंपरा डाली. उन्होंने बागपत सीट पर राजकुमार सांगवान को उम्मीदवार बनाया है. अब सांगवान पर इस सीट पर चौधरी परिवार के पुराने गौरव को वापस लाने की चुनौती है.

