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भारत ने ईएफटीए के साथ किया बड़े व्यापार का करार, पैदा होंगे 10 लाख से ज्यादा रोजगार

ईएफटीए देशों के साथ इस समय भारत का कारोबार महज 1.6 प्रतिशत ही होता है. इस लिहाज से वे कभी भी भारत के बड़े व्यापार साझेदार नहीं रहे हैं

 नई दिल्ली में 10 मार्च को भारत-ईएफटीए करार पर दस्तखत के बाद अपने समकक्षों के साथ मीडिया से मुखातिब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
नई दिल्ली में 10 मार्च को भारत-ईएफटीए करार पर दस्तखत के बाद अपने समकक्षों के साथ मीडिया से मुखातिब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
अपडेटेड 27 मार्च , 2024

भारत ने 10 मार्च को चार देशों के यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ व्यापार संधि पर हस्ताक्षर किए. ईएफटीए इन चार देशों, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटंस्टाइन का अंतरशासकीय समूह है. समझौते के तहत इन देशों ने भारत में 100 अरब डॉलर (8 लाख करोड़ रुपए से अधिक) का निवेश करने का वचन दिया है जिससे अगले 15 साल में 10 लाख रोजगार पैदा हो सकेंगे.

1960 में स्थापित ईएफटीए एक अंतर शासकीय संगठन है जिसे चार सदस्य देशों के फायदे के लिए आर्थिक एकीकरण और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने के मसकद से बनाया गया था. ये चारों देश यूरोपीय संघ से बाहर हैं.

केंद्रीय वाणिज्य, उद्योग, खाद्य और उपभोक्ता मामले और वस्त्र मंत्री पीयूष गोयल ने इसे "आधुनिक और महत्वाकांक्षी व्यापार समझौता" बताया.

गोयल ने आगे कहा, ''भारत पहली बार चार विकसित देशों के यूरोप के इस महत्वपूर्ण आर्थिक ब्लॉक के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर रहा है. मुक्त व्यापार समझौतों के इतिहास में अगले 15 साल के दौरान पहली बार 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगारों के लिए अनिवार्य प्रतिबद्धता जताई गई है." उन्होंने कहा कि समझौते से भारत के 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय निर्यातकों को यूरोप के बड़े बाजारों तक पहुंच की सुविधा मिलेगी.

यह समझौता इस तरह से तैयार किया गया है कि 15 वर्ष बाद इसकी समीक्षा हो सकेगी. अगर इसकी कुछ बातों पर अमल नहीं हुआ तो ईएफटीए को अगले तीन साल में उसकी भरपाई करनी पड़ेगी. भारतीय निर्यात संगठन संघ (फियो) के महानिदेशक और सीईओ अजय सहाय कहते हैं कि 20 साल बाद अगर निवेश में कमी रहती है तो भारत शुल्क लाभों को वापस ले सकता है.

ईएफटीए देशों के साथ इस समय भारत का कारोबार महज 1.6 प्रतिशत ही होता है. इस लिहाज से वे कभी भी भारत के बड़े व्यापार साझेदार नहीं रहे हैं. वित्त वर्ष 23 में ईएफटीए देशों को भारत से 1.9 अरब डॉलर का निर्यात हुआ जबकि इन देशों से आयात 16.7 अरब डॉलर का हुआ.

इस तरह कुल व्यापार 18.6 अरब डॉलर हुआ जिससे ईएफटीए देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा 14.8 अरब डॉलर रहा. इन चारों देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार है जिसके साथ 17 अरब डॉलर का कुल कारोबार हुआ, जिसमें से 15.8 अरब डॉलर का आयात शामिल है.

वहां से आयातित सामान में सबसे अधिक सोना है और 2022-23 में इसका मूल्य करीब 14 अरब डॉलर था. समझौते से हाइ वैल्यू स्विस सामान जैसे कलाई घड़ियां, चॉकलेट और बिस्कुट वगैरह कम कीमत पर मंगवाना संभव हो सकेगा.

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