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चुनाव से पहले पीएम मोदी ने सभी मंत्रियों को सौंपी कौन सी अहम जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री ने हर कैबिनेट मंत्री से कहा है कि वे अपने मंत्रालय के हर विभाग के ऐसे कार्यों और निर्णयों की सूची बनाएं जिनका क्रियान्वयन अगले 100 दिनों में किया जाना है

पीएम मोदी ने मंत्रियों को अगले पांच साल का ब्लूप्रिंट बनाने को कहा
पीएम मोदी ने मंत्रियों को अगले पांच साल का ब्लूप्रिंट बनाने को कहा
अपडेटेड 10 मार्च , 2024

लोकसभा चुनावों की तारीख नजदीक आते देख कहां तो सभी केंद्रीय मंत्री अपने-अपने संसदीय क्षेत्र में अधिक से अधिक वक्त देने की योजना बना रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नए काम दे दिए हैं. वह भी उन्हें सिर्फ दो हफ्ते में पूरे करने हैं.

दरअसल, 21 फरवरी को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की जब बैठक हुई तो उन्होंने सभी कैबिनेट मंत्रियों को यह निर्देश दे दिया कि वे सभी अपने-अपने मंत्रालयों के लिए अगले पांच साल में किए जाने वाले कार्यों का ब्लूप्रिंट तैयार करके उन्हें दें.

उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों से अगले 100 दिनों की कार्ययोजना भी बनाकर देने को कहा है. प्रधानमंत्री के इन निर्देशों को कुछ ही हफ्ते में शुरू होने वाले लोकसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है.

कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री से यह निर्देश मिलने के बाद सभी मंत्रियों ने अपने-अपने मंत्रालय के अधिकारियों को इस काम में लगा दिया है. इस संदर्भ में मंत्रालयों में बैठकों का दौर भी शुरू हो गया जिसमें केंद्रीय मंत्री के अलावा संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो रहे हैं.

कैबिनेट बैठक में शामिल दो अलग-अलग मंत्रियों से बात करने पर पता चला कि प्रधानमंत्री ने 2024 से 2029 का ब्लूप्रिंट तैयार करने के संदर्भ में सभी मंत्रियों को कहा है कि इसे तैयार करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि चुनाव के बाद अगर कोई नया व्यक्ति भी मंत्री बनता है तो वह उन कार्यों को आगे बढ़ा सके.

चुनाव आयोग की ओर से लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा का समय बिल्कुल पास आ गया है तो फिर अगले पांच साल का ब्लूप्रिंट तैयार करने की आखिर राजनैतिक वजह क्या है? इस बारे में एक केंद्रीय मंत्री कहते हैं, "प्रधानमंत्री का उद्देश्य यह हो सकता है कि मंत्रालयों के हिसाब से जो ब्लूप्रिंट उन्हें मिलेगा, उसके आधार पर पॉलिसी के स्तर पर निरंतरता बनाए रखने का एक रोडमैप तैयार हो जाएगा और चुनावों के बाद अगर किसी मंत्रालय को नए मंत्री मिलेंगे तो भी तेजी से काम करने के लिए एक बना-बनाया रोडमैप उनके सामने होगा."

प्रधानमंत्री के इस निर्देश के पीछे कुछ और उद्देश्यों को लेकर भी सरकार और भाजपा में बातचीत चल रही है. भाजपा की तरफ से चुनावों की तैयारी में लगे एक पदाधिकारी ने आधिकारिक तौर पर बातचीत करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि हर मंत्रालय के हिसाब से जो ब्लूप्रिंट प्रधानमंत्री को मिलेगा, उसमें कुछ बिंदु ऐसे मिल सकते हैं, जिन्हें भाजपा अपने चुनाव घोषणापत्र में शामिल कर सके.

उन्होंने यह भी बताया कि इसके पीछे प्रधानमंत्री की एक सोच यह भी हो सकती है कि उन्हें मंत्रालयों के बारे में हर मंत्री के विजन का पता चलेगा और इसके आधार पर संबंधित मंत्री का मूल्यांकन करते हुए उन्हें उनके सियासी भविष्य पर कोई फैसला लेने में सुविधा होगी.

वहीं, प्रधानमंत्री ने हर कैबिनेट मंत्री से यह भी कहा है कि वे अपने मंत्रालय के हर विभाग के ऐसे कार्यों और निर्णयों की सूची बनाएं जिनका क्रियान्वयन अगले 100 दिनों में किया जाना है. अलग-अलग मंत्रालयों में इसे तैयार करने का काम भी शुरू हो गया है और इसे भी प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा जाना है. 

इसके पीछे यह सोच बताई जा रही है कि जब यह कार्ययोजना तैयार हो जाएगी और प्रधानमंत्री कार्यालय से इसे हरी झंडी मिल जाएगी तो लोकसभा चुनावों की आचार संहिता लगने से पहले सभी मंत्री अपने-अपने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को इनके क्रियान्वयन से संबंधित स्पष्ट निर्देश दे दें. ताकि आचार संहिता लगे तो कैबिनेट सचिव के स्तर पर इसकी निगरानी हो और सभी सचिवों के माध्यम से इनका क्रियान्वयन हो सके. और, चुनावों के दौरान ऐसा न लगे कि केंद्र सरकार का कामकाज एकदम बंद हो गया है.

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