फरवरी की 10 तारीख को केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के मुख्य रणनीतिकार कहे जाने वाले अमित शाह नई दिल्ली में एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में मौजूद थे. यहां उनसे पंजाब के शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया.
इस पर उनका कहना था, "भाजपा परिवार नियोजन में विश्वास करती है लेकिन राजनीति में इसे नहीं अपनाती. वार्ता जारी है लेकिन कुछ भी तय नहीं हुआ है." अमित शाह की इन बातों से इसकी पुष्टि तो हो गई कि 2024 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा पंजाब के अपने पुराने सहयोगी को एनडीए में लाने की कोशिश कर रही है.
कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' गठबंधन के तहत पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के साथ आने की संभावनाओं को देखते हुए भाजपा ने इस दिशा में अपनी कोशिशें तेज कर दी थीं. लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानूनी गारंटी समेत अन्य मांगों के साथ किसानों के ताजा विरोध प्रदर्शन से भाजपा को इस मोर्चे पर तगड़ा झटका लगा है.
दरअसल, 2020 के सितंबर महीने में जब मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन ने जोर पकड़ा तो उसे देखते हुए एसएडी ने एनडीए छोड़ने का फैसला किया था. तब पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल ने भी केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. उस समय सुखबीर सिंह बादल ने कहा था, "पंजाब में हर अकाली एक किसान है और हर किसान अकाली है." असल में अकाली दल की पूरी राजनीति पारंपरिक तौर पर सिख धर्म और किसानों के मुद्दों के आसपास केंद्रित रही है.
ऐसे में जब 2021 में केंद्र सरकार ने अचानक तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया तो उसके बाद से ही दोनों पार्टियों के कुछ नेता फिर से नजदीकी बढ़ाने की कोशिशों में लग गए थे. 2022 के विधानसभा चुनावों के पहले भी थोड़ी कोशिशें हुईं लेकिन बात नहीं बन पाई. जब बात नहीं बनी तो एसएडी ने मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया.
2022 के विधानसभा चुनावों में इन तीनों पार्टियों का प्रदर्शन बुरा रहा. 117 सीटों वाली विधानसभा की 80 फीसद से अधिक यानी 92 सीटें आम आदमी पार्टी को मिल गईं. कई बार पंजाब की सत्ता का नेतृत्व करने वाले एसएडी को सिर्फ तीन सीटें मिलीं और भाजपा को सिर्फ दो सीटों से संतोष करना पड़ा. वहीं बसपा को सिर्फ एक सीट मिल पाई.
इस झटके के बाद भाजपा और एसएडी के बीच नए सिरे से बातचीत शुरू हुई. लंबे समय तक एसएडी के सर्वेसर्वा और पंजाब के मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल के अप्रैल, 2023 में निधन के बाद जिस तरह से श्रद्धांजलि देने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे और उसके बाद बादल के गांव में हुए कार्यक्रम में अमित शाह पहुंचे, उससे दोनों पक्षों में थोड़ी नरमी आई. इंडिया गठबंधन के अस्तित्व में आने के बाद बातचीत और तेज हुई.
इन बातचीत में शामिल रहे भाजपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, "हमारी बातचीत एडवांस स्टेज में थी. सीटों को लेकर भी सहमति बन गई थी. बिहार में नीतीश कुमार और उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय लोक दल के साथ आने के बाद किसी भी दिन इसकी औपचारिक घोषणा हो सकती थी. लेकिन किसानों के विरोध प्रदर्शन ने हमारी इन कोशिशों को रोक दिया है."
यह पूछे जाने पर कि अब गठबंधन की कितनी संभावना है, वे कहते हैं, "केंद्र सरकार अपने तीन मंत्रियों को चंडीगढ़ भेजकर और बातचीत में पंजाब के मुख्यमंत्री को शामिल करके जल्द से जल्द समाधान की कोशिश कर रही है. जितनी जल्दी किसान आंदोलन का समाधान होगा, गठबंधन को लेकर हमारी बातचीत को उतनी जल्दी अंतिम रूप दिया जा सकेगा."
इस बीच भाजपा के साथ जब एसएडी की करीबी बढ़ने लगी तो बसपा ने पंजाब की अपनी सहयोगी के साथ गठबंधन तोड़ लिया. पार्टी की तरफ से कहा गया कि भाजपा गरीब और दलित विरोधी पार्टी है और एसएडी उसके साथ बातचीत कर रही है तो ऐसे में वह अकाली दल का साथ नहीं दे सकती.
भाजपा के साथ संभावित गठबंधन के भविष्य के बारे में अकाली दल के महासचिव प्रेम सिंह चंदूमाजरा कहते हैं, "हमारे लिए किसान सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं. एमएसपी की पूरी व्यवस्था लागू कराने में अकाली दल की प्रमुख भूमिका थी. बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर अब जो भी बातचीत होगी, उसमें किसानों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों के समाधान पर पहले चर्चा होगी." इन हालात में केंद्र सरकार के लिए किसान आंदोलन की एक सर्वस्वीकार्य और जल्द-से जल्द समाप्ति अब और जरूरी लगने लगी है.

