भारत में डिजिटल पेमेंट क्रांति का प्रमुख चेहरा बनकर उभरी वित्तीय सेवा कंपनी पेटीएम को इस समय एक बेहद मुश्किल वक्त से गुजरना पड़ रहा है. 31 जनवरी को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) को निर्देश दिया कि वह नए क्रेडिट और डिपॉजिट ऑपरेशन, टॉप-अप, फंड ट्रांसफर और अन्य सभी बैंकिंग कार्य 29 फरवरी तक पूरी तरह बंद कर दे. ग्राहकों को अब केवल पीपीबीएल के अपने खातों से शेष राशि निकालने की ही अनुमति होगी.
वित्तीय सलाहकार फर्म मैक्वेरी के मुताबिक, पेटीएम पेमेंट बैंक में 33 करोड़ से अधिक वॉलेट एकाउंट हैं. आरबीआई के आदेश का सीधा मतलब है कि मौजूदा पेटीएम उपभोक्ता भी क्रेडिट, फंड ट्रांसफर, यूपीआइ लेनदेन, बिल और फास्टैग भुगतान जैसी बुनियादी बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकते, जिसमें पेटीएम के पास करीब 17 फीसद बाजार हिस्सेदारी है और लगभग 6.0 करोड़ यूजर हैं. वित्त वर्ष 2023 में पेटीएम ने 7,990 करोड़ रुपए का राजस्व कमाया था.
आरबीआई का निर्देश पीपीबीएल पर नए ग्राहकों को 'जोड़ने' पर पाबंदी लगाए जाने के 10 माह बाद आया है. तब केंद्रीय बैंक इस फर्म में 'निगरानी संबंधी ठोस खामियां' मिलने से चिंतित था. आरबीआई ने उस समय बैंक को अपने सिस्टम के लिए एक आईटी ऑडिट फर्म नियुक्त करने का निर्देश दिया था, और इसके बाद केंद्रीय बैंक ने कहा कि बाहरी लेखा परीक्षकों ने "बैंक में नियम-कायदों का निरंतर पालन न होने और पुख्ता निगरानी संबंधी चिंताओं का खुलासा किया. इसी वजह से आगे कार्रवाई की जरूरत पड़ी."
वैसे, यह पहला मौका नहीं जब किसी नियामकीय व्यवस्था को लेकर पेटीएम सवालों के घेरे में है. आरबीआई लाइसेंसिंग शर्तों के उल्लंघन, गलत जानकारी पेश करने, प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा में खामियां होने जैसे आरोपों को लेकर कम से कम चार मौकों पर बैंक की खिंचाई कर चुका है. अक्टूबर 2023 में केंद्रीय बैंक ने केवाइसी मानदंडों के 'निरंतर गैर-अनुपालन' को लेकर इस पर 5.39 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया था.
2010 में विजय शेखर शर्मा की बनाई इस कंपनी ने नरेंद्र मोदी सरकार के नोटबंदी करने के कुछ महीने बाद मई 2017 में पेमेंट बैंक के तौर पर काम करना शुरू किया. नोटबंदी के कथित उद्देश्यों में एक यह भी था कि बैंकिंग सुविधा से वंचित आबादी के एक बड़े हिस्से को भुगतान बैंकों जैसे तरीकों से बैंकिंग प्रणाली में जोड़कर अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाया जाए. ये बैंक वाणिज्यिक बैंकों की तुलना में छोटे पैमाने पर काम करते हैं और कर्ज या क्रेडिट कार्ड जारी करने को छोड़कर अधिकांश बैंकिंग कार्य कर सकते हैं.
मैक्वेरी के विश्लेषक गणपत और पुनीत बहलानी ने 31 जनवरी को एक रिसर्च नोट में कहा, "पीपीबीएल पर कड़े प्रतिबंधों के मद्देनजर हमारा मानना है कि मौजूदा ग्राहकों को बनाए रखने की पेटीएम की क्षमता काफी हद तक प्रभावित हुई है, और यह इसे पेमेंट प्रोडक्ट और लोन प्रोडक्ट बेचने से भी प्रतिबंधित करते हैं. हमारी राय है कि मध्यम से दीर्घ अवधि में राजस्व और मुनाफे पर असर हो सकता है और इस पर नजर रखना बेहद आवश्यक होगा." ऐसा लगता है कि आरबीआई ने व्यापक आईटी ऑडिट के बाद यह कदम उठाया है और खामियां काफी गंभीर पाई हैं. एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध पेटीएम की मूल फर्म वन97 कम्युनिकेशंस के शेयर 5 फरवरी को बीएसई पर 10 फीसद गिरकर 438.35 रुपए पर बंद हुए, जो एक साल में सबसे कम कीमत रही (20 अक्टूबर 2023 को 998.30 रुपये इसका शीर्ष स्तर रहा था). मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि केवल तीन दिनों में स्टॉक 42 फीसद से अधिक नीचे आ गया और कंपनी के बाजार पूंजीकरण में 20,471.25 करोड़ रुपए की गिरावट आई है.
फिलहाल तो ऐसी कोई गुंजाइश नहीं लगती कि ब्रांड इस क्षति से उबर पाएगा. मैक्वेरी विश्लेषकों की राय में आरबीआई का कदम एक तरह से "परोक्ष रूप से पेटीएम के पीपीआई (प्री-पेड इंस्ट्रूमेंट) लाइसेंस को रद्द करने" जैसा ही है. कंपनी अधिकारियों के मुताबिक, पीपीबीएल मुख्य तौर पर दो तरह से कारोबार करता है. यह सामान्य ग्राहकों को जहां लाभदायक वॉलेट सेवा देता है. वहीं, व्यापारियों से शुल्क लेकर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से भुगतान की सेवाएं भी मुहैया करता है.
पेटीएम का कहना है कि आरबीआई ने आईटी ऑडिट में क्या खामियां पाईं, इस पर उसे कोई जानकारी नहीं है. 2 फरवरी को बाजार विश्लेषकों के साथ एक कांफ्रेंस कॉल में शर्मा ने कहा, "स्पष्ट तौर पर यह आरबीआई की राय है, और हम पूरी तरह (विश्वास करते हैं)...कुछ ऐसा होगा जो आरबीआई ने देखा होगा. लेकिन क्या उन्होंने हमें विवरण भेजा है? तो इसका जवाब है-नहीं." इस बीच, वन97 कम्युनिकेशन ने कहा है कि वह पीपीबीएल से अलग होकर अपनी यूपीआई सेवा के लिए अन्य बैंकों के साथ साझेदारी करेगा. फिलहाल तो यही लग रहा है कि कभी हर किसी की जुबान पर चढ़े 'पेटीएम करो' का वक्त पूरा हो चुका है.

