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अंतरिम बजट में बहुत कुछ खास न होना ही इसे कैसे खास बनाता है?

सीतारमण ने परिपाटी बनाए रखी और आने वाले चुनावों के बावजूद किसी भी बड़ी जन कल्याणकारी रियायत या टैक्स कटौती की घोषणा से परहेज बरता

 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी टीम के साथ
1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी टीम के साथ
अपडेटेड 14 फ़रवरी , 2024

यह उम्मीद तो खैर किसी को नहीं थी कि 1 फरवरी को पेश 2024-25 के अंतरिम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कोई बड़ी घोषणा करेंगी, क्योंकि देश के आम चुनाव में अब कुछ ही महीने शेष हैं. सीतारमण ने उस राजकोषीय अनुशासन का पालन करते हुए जो पिछले कुछ सालों में उनके सारे बजटों की खासियत रहा है, नरेंद्र मोदी सरकार के नीतिगत उपायों की निरंतरता का इशारा किया.

वित्त मंत्री को उम्मीद है कि 2024-25 में राजकोषीय घाटा (सरकार का खर्च उसके राजस्व से ज्यादा होना) जीडीपी का 5.1 फीसद रहेगा, जो 2025-26 तक इसे 4.5 फीसद से नीचे लाने के केंद्र के लक्ष्य के अनुरूप है. संशोधित अनुमान के मुताबिक 2023-24 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 5.8 फीसद था. उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत' का विस्तृत रोडमैप जुलाई में पेश किया जाएगा और वे आत्मविश्वास से सराबोर दिखाई दीं कि मौजूदा सरकार सत्ता में फिर लौट आएगी.

सीतारमण ने परिपाटी बनाए रखी और आने वाले चुनावों के बावजूद किसी भी बड़ी जन कल्याणकारी रियायत या टैक्स कटौती की घोषणा से परहेज बरता. उन्होंने कहा, "विकास कार्यक्रमों ने बीते 10 साल में रिकॉर्ड समय में 'सबके लिए घर', 'हर घर जल', सबके लिए बिजली, सबके लिए रसोई गैस, सबके लिए बैंक खाते और वित्तीय सेवाओं के जरिए एक-एक परिवार और व्यक्ति को लक्ष्य किया है."

उन्होंने पूंजीगत खर्चों में 11 फीसद बढ़ोतरी का ऐलान किया, जिसका मतलब होगा पूंजीगत खर्चों में 11 लाख करोड़ रुपए (जीडीपी का 3.4 फीसद) की बढ़ोतरी. यह कदम देश के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए बीते चार साल में पूंजीगत खर्चों में तीन गुना बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है. एडलवाईस एमएफ के प्रेसिडेंट और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर-इक्विटीज त्रिदीप भट्टाचार्य कहते हैं, "चुनावी साल में यह बजट निपुण ढंग से संतुलन साधता है और लोकलुभावनवाद पर समझदारी को प्राथमिकता देता है."

उनके कुछ पार्टीजन थोड़े नाखुश थे कि पीएम-किसान योजना में दी जाने वाली मौजूदा सालाना 6,000 रुपए की धनराशि में बढ़ोतरी नहीं की गई और प्रत्यक्ष कर सुधार या मध्यम वर्ग पर आयकर का बोझ कम करने की प्रतिबद्धता से भी परहेज बरता गया. अलबत्ता पार्टी की चुनाव मशीनरी को भाजपा के नवनिर्मित मतदाता मंडल—लाभार्थियों—से बात करने के लिए काफी बातें मिल गईं. पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के तहत अगले पांच सालों में 2 करोड़ घर बनाए जाएंगे जो इस वक्त बनाए जा रहे 3 करोड़ घरों के अलावा होंगे. केंद्र 'किराये के घरों, या झुग्गी बस्तियों या चॉल और अनधिकृत कॉलोनियों' में रह रहे मध्यम वर्ग के हकदार तबकों को अपना घर खरीदने या बनाने में मदद देने के लिए एक योजना लाएगा.

जगहों को यातायात के बहुत-से साधनों से जोड़ने के लिए पीएम गतिशक्ति के तहत तीन बड़े आर्थिक रेल गलियारों का कार्यक्रम शुरू किया जाएगा जिनमें ऊर्जा, खनिज और सीमेंट गलियारा; बंदरगाह संयोजकता गलियारा; और उच्च यातायात घनत्व गलियारे शामिल हैं. इनसे लॉजिस्टिक्स की दक्षता में सुधार आएगा और लागत घटेगी. यात्री सुरक्षा, सुविधा और आराम के लिए रेल के 40,000 सामान्य डिब्बों को वंदे भारत के स्तर के डिब्बों में बदला जाएगा.

बजट पेश होने के बाद राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बजट चार तबकों—युवा, महिलाओं, गरीबों और किसानों—का खास ख्याल रखता है. इन चार तबकों को उन्होंने विकसित भारत के स्तंभ बताया. भाजपा 2024 के अपने चुनावी अभियान का तानाबाना इन्हीं चारों मतदाता मंडलों के इर्द-गिर्द बुन रही है. उन्होंने यह भी कहा, "अंतरिम बजट समावेशी और नवाचारी है. इसमें निरंतरता का आत्मविश्वास है."

वित्त मंत्री ने उन लोगों को भी मायूस नहीं किया जो हरित ऊर्जा के मोर्चे पर किसी न किसी पहल का इंतजार कर रहे थे. छत सौर ऊर्जा (रूफटॉप सोलराइजेशन) कार्यक्रम के तहत एक करोड़ घरों को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी. इससे ये घर मुफ्त सौर ऊर्जा से और अतिरिक्त बिजली वितरण कंपनियों को बेचकर साल में 15,000-18,000 रुपए की बचत करेंगे.

केपीएमजी के सह-प्रमुख और सीओओ, इंडिया ग्लोबल, नीरज बंसल कहते हैं, "यह बजट 2024 ने पूंजीगत खर्चों में बढ़ोतरी, हरित वृद्धि, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और नवाचार के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था को तेज गति देने की दिशा में ज्यादा प्रखर दृष्टिकोण अपनाने के साथ इस सरकार की आर्थिक नीतियों में निरंतरता को एक बार फिर रेखांकित किया है."

शुरू में एक गीगावॉट की अपतटीय पवन ऊर्जा क्षमता तैयार करने के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण दिया जाएगा. 2030 तक 10 करोड़ टन की कोयला गैसीकरण और द्रवीकरण क्षमता स्थापित की जाएगी. इससे प्राकृतिक गैस, मीथेनॉल और अमोनिया का आयात घटाने में मदद मिलेगी. घरेलू उद्देश्यों की खातिर परिवहन और पाइप्ड नेचुरल गैस के लिए कॉम्प्रेस्ड नेचुरल गैस में कॉम्प्रेस्ड बायोगैस की चरणबद्ध ब्लेंडिंग अनिवार्य की जाएगी.

सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के लिए ई-बसें अपनाने को बढ़ावा दिया जाएगा. स्वास्थ्य के मोर्चे पर और ज्यादा मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे, नौ से 14 वर्ष के आयु समूह की लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर विरोधी टीके लगाए जाएंगे. इस बीच आयुष्मान भारत योजना के तहत हेल्थकेयर कवर सभी आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को मुहैया किया जाएगा.

अनुसंधान और नवाचार के लिए 50 साल के ब्याज मुक्त कर्ज के साथ 1 लाख करोड़ रुपए का कोष स्थापित किया जाएगा. शिव नाडर यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र विभाग की डीन प्रोफेसर पार्था चटर्जी का कहना है कि अपने सेमीकंडक्टर उद्योग और हाइ-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की भारत की कोशिशों की तरह ही यह अच्छी-खासी वित्तीय सहायता निजी कंपनियों को अनुसंधान और विकास बड़े पैमाने पर बढ़ाने की ताकत देगी.

कृषि में इस क्षेत्र की ज्यादा तेज वृद्धि पक्की करने के लिए केंद्र एग्रीगेशन, आधुनिक भंडारण, दक्ष आपूर्ति शृंखलाओं, प्राथमिक और द्वितीयक प्रसंस्करण और मार्केटिंग तथा ब्रांडिंग सहित फसल कटाई के बाद की गतिविधियों के लिए निजी और सावर्जनिक निवेश को बढ़ावा देगा. कुल मिलाकर अंतरिम बजट में मोदी सरकार के भरोसे की निरंतरता का प्रतिबिंब दिखता है. 

—साथ में, अनिलेश एस. महाजन, सोनल खेत्रपाल और मनीष दीक्षित

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