दरअसल, 28 सितंबर को पौ फटते ही पंजाब पुलिस की एक टुकड़ी कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के चंडीगढ़ स्थित आवास पर आ धमकी. पुलिस 2015 के ड्रग्स के एक मामले में उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची थी. उस मामले में खैरा के कथित सहयोगी गुरदेव सिंह और नौ अन्य को दोषी ठहराया गया था. पुलिस का कहना है कि खैरा का नाम बाद में, 2017 में जांच में सामने आया. इसलिए खैरा इसे एक 'सियासी प्रतिशोध' बताते रहे हैं. इस साल फरवरी में, इसी मामले में उनके खिलाफ जारी एक समन को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था, लेकिन 2021 में प्रवर्तन निदेशालय ने उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया. जमानत मिलने से पहले उन्होंने 80 दिन जेल में बिताए थे. इस बार, दो दिन की पुलिस कस्टडी के बाद खैरा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
छह साल में खैरा के लिए बहुत कुछ बदल गया है. उस समय, वे आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक के रूप में विधानसभा में विपक्ष के नेता थे. तब वे तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर 'प्रतिशोध की भावना' के साथ काम करने के आरोप लगा रहे थे, लेकिन चूंकि अब वे कांग्रेस में लौट चुके हैं, इसलिए अब उनकी सारी नाराजगी सत्तारूढ़ आप के अपने पूर्व सहयोगियों से है. पुलिस की कार्रवाई से दोनों पार्टियों के बीच संबंधों में खटास पैदा हो गई है, जबकि कांग्रेस और आप, दोनों विपक्षी दलों के राष्ट्रीय गठबंधन इंडिया का हिस्सा हैं.
बताया जाता है कि 2024 के आम चुनाव के लिए आप, कांग्रेस के साथ गठबंधन की इच्छुक है. लेकिन कांग्रेस की दिल्ली और पंजाब की स्थानीय इकाइयां इसके खिलाफ हैं. पंजाब में, उनकी सबसे बड़ी शिकायत यह है कि भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार सतर्कता ब्यूरो का खुलकर ''दुरुपयोग'' कर रही है. खुद मान, कांग्रेस नेताओं को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ते, उन पर भ्रष्टाचार और ड्रग माफिया के साथ सांठगांठ जैसे गंभीर आरोप लगाते रहते हैं.
इसके पीछे प्रतिशोध की राजनीति हो या न हो, पर आप सरकार पिछली कांग्रेस सरकार की कुछ बड़ी मछलियों के पीछे पड़ी है. जिस समय इंडिया गठबंधन पर वार्ता चल रही थी उसी दौरान पूर्व उप-मुख्यमंत्री ओ.पी. सोनी और पूर्व विधायक कुशलदीप सिंह ढिल्लों को आय से अधिक संपत्ति के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से दो बार पूछताछ हो चुकी है, और पूर्व मंत्री बी.बी. आशु, साधु एस. धर्मसोत और सुंदर एस. अरोड़ा के साथ ही कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वारिंग पर भी भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.
वहीं, विपक्षी भाजपा और सत्तारूढ़ आप खुलकर कांग्रेस नेताओं को अपनी तरफ लाने में जुटी हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस का भाजपा में विलय कर दिया, और कांग्रेस की राज्य इकाई के पूर्व प्रमुख सुनील जाखड़ अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं. आप भी हरकत में आ गई है. हाल में जालंधर लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए, आप ने कांग्रेस के सुशील रिंकू को अपने पाले में कर लिया और उनकी जीत सुनिश्चित की. पंजाब विधानसभा में आप के 92 से करीब 40 विधायकों की पृष्ठभूमि कांग्रेस की है.
जहां तक आप के साथ कांग्रेस के गठबंधन की बात है, नवजोत सिद्धू जैसे नेता इसके लिए माहौल बना रहे हैं, जबकि वारिंग, विपक्ष के नेता प्रताप एस. बाजवा और खैरा इस गठबंधन के खिलाफ हैं.
पंजाब में लोकसभा की 13 सीटें, चंडीगढ़ में एक और दिल्ली में सात सीटें हैं जहां अगर कांग्रेस-आप में गठबंधन हो जाता है तो भाजपा के लिए इन सीटों पर राह कठिन हो सकती है. फिलहाल पंजाब में कांग्रेस के सात और आप का एक लोकसभा सांसद है. दिल्ली की सातों सीटें भाजपा के पास हैं.
दिल्ली की राजनीति सरल है. कांग्रेस-आप में गठबंधन का अर्थ होगा कि मुस्लिम वोट भाजपा के खिलाफ एकजुट हो जाएगा. कांग्रेस नेतृत्व दिल्ली में सीटें छोड़ने को तो तैयार है, लेकिन पंजाब में कोई भी पक्ष जरा सा भी समझौते को तैयार नहीं. कांग्रेस वहां प्रमुख विपक्षी पार्टी है. 2022 के विधानसभा चुनाव में आप को 42 फीसद, जबकि कांग्रेस को 23 फीसद वोट मिले. इसलिए, कागज पर तो इंडिया गुट दुर्जेय दिखता है.
लेकिन कांग्रेस की राज्य इकाई का मानना है कि मान सरकार अलोकप्रिय हो रही है. 25 सितंबर को बाजवा ने सनसनीखेज दावा किया था कि वे आप के 32 विधायकों के संपर्क में हैं और सरकार गिराने के करीब हैं. बाजवा कहते हैं, ''हम अपने दम पर पंजाब की सभी 13 लोकसभा सीटें जीत सकते हैं. मैंने पार्टी नेतृत्व से कहा है कि हमें इसके लिए आप से गठबंधन की जरूरत नहीं है.''
इन विरोधाभासों के बावजूद, इसके संकेत मिलने शुरू हो गए हैं कि दोनों दलों के नेता एक समझौते की ओर बढ़ रहे हैं. अगर आप सरकार कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाती है, तो कई कांग्रेसी राहत की सांस लेंगे. लेकिन सवाल यही है कि क्या इतनी कच्ची डोर से बंधा इंडिया खेमा असल में कुछ कर पाएगा?

