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भारत@100 : हुनर बढ़ाने की कवायद

बदलते औद्योगिक क्षेत्रों की मांग को पूरा करने के लिए बिल्कुल नए प्रकार के कौशल हासिल करने की जरूरत है. भारत अपनी वर्क फोर्स के कौशल विकास के मामले में पीछे है. अगर देश को अपनी आबादी का लाभ हासिल करना है तो युवाओं को तेजी से कुशल बनाना होगा

नित नया ज्ञान आइआइटी दिल्ली के छात्र नैनो स्केल रिसर्च फैसिलिटी में
नित नया ज्ञान आइआइटी दिल्ली के छात्र नैनो स्केल रिसर्च फैसिलिटी में
अपडेटेड 11 सितंबर , 2023

पढ़ाई-लिखाई में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भारत में नया नहीं है. नए जमाने की टेक्नोलॉजी ने भारत के लिए ऐसा बुनियादी ढांचा और वातावरण बनाने की ज्यादा गुंजाइश और जरूरत पैदा कर दी है जिससे ज्यादा से ज्यादा छात्र स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमैटिक्स) धारा से जुड़ने को प्रोत्साहित हों. देश इस मामले में वैश्विक अगुआ है, पर यहां जरूरत भौगोलिक, लैंगिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के लिहाज से ज्यादा समतामूलक वितरण पर ध्यान देने की है. इस दिशा में मिश्रित शिक्षा का मॉडल और एआइ व मशीन लर्निग सरीखी टेक्नोलॉजी शिक्षा क्षेत्र को क्रांतिकारी ढंग से बदलने के लिए तैयार हैं

उद्योगों को मिलें हुनरमंद कामगार

भारत अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए अपना पूरा जोर लगा रहा है. ऐसे में देश की जनशक्ति का कुशल या हुनरमंद होना कई गुना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है. विभिन्न अनुमानों से पता चलता है कि 2030 तक कौशल सुधार में निवेश से वैश्विक अर्थव्यवस्था को 65 खरब डॉलर और भारत की अर्थव्यवस्था को 570 अरब डॉलर (46,76,850 करोड़ रुपए) तक बढ़ाया जा सकता है. यही वजह है कि गरीबी मिटाने में कौशल विकास एक महत्वपूर्ण घटक है. धरती को बचाने और सभी के लिए शांति एवं समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए 2016 में शुरू की गई संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक पहल जिसे सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के नाम से जाना जाता है.

यह गेमचेंजर क्यों है?

भारत के पास एक बड़ी आबादी का लाभ है—54 प्रतिशत से अधिक आबादी 25 वर्ष से कम आयु की है; 62 फीसद कामकाजी उम्र के हैं. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या सांख्यिकी के अनुसार, 2050 तक भारत कामकाजी आयु वर्ग में 18.3 करोड़ अन्य लोगों को जोड़ देगा. इससे कामकाजी आयु वर्ग की आबादी का कौशल प्रशिक्षण और उनके कौशल को बार-बार निखारते रहना जरूरी हो गया है. एक्सेंचर की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत का कौशल निर्माण आधुनिक तकनीक की जरूरतों के मुताबिक नहीं हुआ तो देश 2028 तक अपनी वार्षिक वृद्धि का 2.3 प्रतिशत गंवा सकता है.

राष्ट्रीय मैन्युफैक्चरिंग नीति के मुताबिक अगर भारत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी को 25 प्रतिशत तक बढ़ाकर 10 करोड़ नौकरियां पैदा करना चाहता है तो उसे कुशल कार्यबल (वर्क फोर्स) की एक मजबूत फौज तैयार करनी होगी. दुर्भाग्य से, ग्लोबल स्किल गैप रिपोर्ट के अनुसार, कार्यबल में कौशल के अंतर या कमी के लिहाज से ब्राजील के बाद भारत दूसरे स्थान पर है. राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि भारतीय कामगारों के केवल 2.3 फीसद के पास औपचारिक व्यावसायिक कौशल है. यूनिसेफ के एक अध्ययन में कहा गया है कि 2030 तक भारत के 50 प्रतिशत से अधिक युवाओं में रोजगार के लिए आवश्यक कौशल की कमी होगी.

महारत हासिल करने के लिए भारत क्या करे

भारत को न केवल अपने कार्यबल को कौशल प्रदान करने की जरूरत है, बल्कि डिजिटल कौशल जैसे नए युग के कौशल हासिल करने पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ), मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्ज, बिग डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन और डेवऑप्स आज के दौर के कामों में नाटकीय रूप से बदलाव लाते हैं.

बढ़ती अर्थव्यवस्था की मांग के अनुरूप कौशल को विकसित करने के लिए भारत को शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करने की आवश्यकता है. फिलहाल भारत में नौकरी चाहने वालों के पास जो कौशल मौजूद है और नियोक्ताओं को जिस कौशल की जरूरत है, उसके बीच एक बड़ा अंतर नजर आता है. इसीलिए सरकार को उभरती  टेक्नोलॉजी में कौशल बढ़ाने के लिए उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच अधिक साझेदारी और सहयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए.

कौशल को बढ़ावा देने के लिए स्किल इंडिया, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, संकल्प, स्ट्राइव, कौशल विकास और उद्यमिता पर राष्ट्रीय नीति, भारतीय कौशल विकास सेवा, प्रौद्योगिकी संवर्धित शिक्षण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम और राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन जैसी कई आवश्यक पहल भारत सरकार ने की हैं. कंपनी अधिनियम 2013, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों के तहत कौशल विकास को अनिवार्य बनाता है और निजी संगठन इस पर काम कर रहे हैं. दरअसल, टियर-2 और टियर-3 शहरों में कौशल-वृद्धि पाठ्यक्रमों की मांग पिछले साल लगभग 50 प्रतिशत बढ़ गई.

भारत को ''दुनिया की स्किल कैपिटल’’ बनाने के लिए केंद्रीय बजट 2023 में, युवाओं के कौशल विकास, अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है. ये स्वागत योग्य कदम हैं, लेकिन इनका जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन महत्वपूर्ण है. भविष्य के लिए कार्यबल को तैयार करने की खातिर रचनात्मक कौशल को तकनीकी कौशल के साथ एकीकृत करने की जरूरत है. इसके लिए कौशल सीखने और प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता है.

बदलाव के अगुआ

1. वर्ल्ड स्किल सेंटर, भुवनेश्वर

 • यहां मैकेनिकल सर्विसेज, वर्टिकल ट्रांसपोर्टेशन और प्रीसिजन इंजीनियरिंग जैसे आठ क्षेत्रों में छात्रों को उन्नत कौशल प्रदान किया जाता है

2. श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी, हरियाणा 
• भारत की सबसे पुरानी स्किल यूनिवर्सिटी में से एक. यहां हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट से लेकर ग्राफिक्स डिजाइन तक विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रम की सुविधा है

3. टीमलीज स्किल्स यूनिवर्सिटी, वड़ोदरा
• संस्थान के प्रस्तावित पाठ्यक्रमों में वाणिज्य और प्रबंधन, मेक्ट्रोनिक्स, लाइफ स्किल्स और उद्योग तथा नॉलेज पार्टनरशिप जैसे क्षेत्र शामिल हैं.
 

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