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भारत@100 : लेन-देन के लिए टैप करें

कॉन्टैक्टलेस या संपर्कहीन नया मुहावरा है, खासकर खुदरा व्यापारी दुनिया भर में लेन-देन का यह ज्यादा तेज और सुरक्षित तरीका अपना रहे हैं और इंडिया इंक रास्ता दिखा रहा है

खासकर खुदरा व्यापारी दुनिया भर में लेन-देन का यह ज्यादा तेज और सुरक्षित तरीका अपना रहे हैं
खासकर खुदरा व्यापारी दुनिया भर में लेन-देन का यह ज्यादा तेज और सुरक्षित तरीका अपना रहे हैं
अपडेटेड 5 सितंबर , 2023

करीब दो साल से मुंबई में एक एमएनसी में काम करने वाले 45 वर्षीय किशोर राजन ने किसी पॉइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) मशीन या किसी शॉपिंग आउटलेट या पेट्रोल पंप पर अपने डेबिट कार्ड का पिन नहीं डाला. डालते भी क्यों, उन्होंने टैप-ऐंड-गो सुविधा जो एनेबल कर रखी है. इसकी बदौलत कार्ड से कम दूरी की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें निकलती हैं जिनमें उनके कार्ड की जानकारी होती है. पीओएस मशीन इन तरंगों को पकड़ लेती है और किसी तरह हाथ लगाए बिना भुगतान हो जाता है.

राजन कहते हैं, ''कोविड-19 महामारी के दौरान मेरे लिए यह सबसे काम की चीज थी, क्योंकि मुझे डर लगा रहता था कि मशीन को छूने से मुझे वायरस का संक्रमण न हो जाए.’’ वही सुविधा—जिसे कॉन्टैक्टलेस, संपर्कहीन, टच-फ्री, स्पर्शमुक्त या प्रॉक्सिमिटी पेमेंट सरीखे अलग-अलग नामों से जाना जाता है—लेन-देन को अब ज्यादा तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बना रही है.

यह गेमचेंजर क्यों है

संपर्कहीन भुगतान—जो चिप से समर्थ बैंक कार्ड या स्मार्टफोन पर डिजिटल वॉलेट ऐप के जरिए किया जाता है—बेतार लेन-देन है और ज्यादा सुरक्षित है क्योंकि खरीदार के वित्तीय ब्योरे सुरक्षित रहते हैं और साझा नहीं किए जाते. 

भारत में डिजिटल लेन-देन की कुल संख्या 2017-18 और 2021-22 के बीच चार गुना हो गई. इनमें यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (भीम या बीएचआइएम-यूपीआइ), इमीडिएट पेमेंट सर्विस (आइएमपीएस) और नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कनेक्शन (एनईटीसी) से किए गए भुगतान शामिल हैं, इसमें हैरानी की बात नहीं क्योंकि हमारा देश दुनिया में युवाओं (और टेक्नोलॉजी स्मार्ट) की सबसे ज्यादा आबादी और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बढ़ते आधार वाले देशों में है. इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोगों की तादाद 2020 में 66.2 करोड़ से बढ़कर 2025 तक 90 करोड़ का रिकॉर्ड छू सकती है. इसलिए यह स्वाभाविक है कि खासकर महामारी के बाद संपर्कहीन भुगतान का चलन तेजी से बढ़ रहा है.
 
महारत हासिल करने के लिए भारत क्या करे

दुनिया भर में इस क्षेत्र में नए रुझान उभर रहे हैं. मसलन, बायोमेट्रिक भुगतान को लीजिए, जो ग्राहकों को अबाध और सुरक्षित भुगतान का भरोसा देता है. कई सारे उद्योगों को डिजिटल भुगतान के समाधान प्रदान करने वाली डिजिपे.गुरु के मुताबिक, ये भुगतान लेन-देन को प्रमाणित करने के लिए व्यक्ति की उंगलियों की छाप, आंख की पुतली, चेहरा, आवाज और दस्तखत सरीखी अनूठी शारीरिक और व्यवहारगत विशेषताओं का इस्तेमाल करते हैं. इससे पिन और पासवर्ड सरीखे प्रमाणित करने के पारंपरिक तरीकों की जरूरत खत्म हो जाती है.

भारतीय फिनटेक के लिए नए उभरते टूल हैं, एम्बेडेड लेंडिंग, यानी भुगतान और कर्ज सेवाओं को जोडऩा, और 'अभी खरीदो, बाद में चुकाओ’, जो ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड के बगैर भुगतान बाद में करने की सुविधा है. 

बदलाव के अगुआ

1. ईजीरिवार्ड्ज

• विभिन्न उद्योगों के कारोबारों को सीआरएम (कस्टमर रिलेशनशिप मैनजमेंट) टूल मुहैया करने की गरज से 2011 में वजूद में आया
• ग्राहक जीवनचक्र प्रबंधन समाधान प्रदान करता है, जो ग्राहकों को जोड़ते और बार-बार बिक्री में सुधार लाते हैं
• गुरुग्राम में मुख्यालय और मुंबई, बेंगलूरू, कोलकाता तथा दुबई में मौजूदगी के साथ यह ब्रांड की वकालत और ग्राहक को रोके रखने का काम भी करता है

2. फिनली

• बेंगलूरू में मुख्यालय के साथ 2015 में स्थापित, यह कारोबारों को स्वचालित ढंग से काम करने, दिखाई देने और खातों की देयता को नियंत्रित करने के लिए फाइनेंस मैनेजमेंट और गवर्नेंस‘ गनवर्नेंस सूइट देता है
• इस प्लेटफॉर्म में स्मार्ट व्यय प्रबंधन, ई-खरीद, विक्रेता भुगतान और बजट प्रबंधन प्रणाली समाहित हैं
• फर्म दावा करती है कि यह ताकतवर पॉलिसी इंजन सभी व्यावसायिक लेन-देन और एकीकृत भुगतान टेक्नोलॉजी प्रणाली का संचालन करता है, जो स्वचालित ढंग से समन्वय कर पाते हैं

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