आपका अपना चैटबॉट, जो बिलों का भुगतान कर सके? आपकी तरफ से शिकायत दर्ज करा दे? या फिर आपका टैक्स भर सकता हो? और वह भी व्हाट्सऐप पर? ऐसे भविष्य की रूपरेखा तो खिंच चुकी है. जरूरत बस इस बात की है कि ऐसी सुविधाओं तक हर किसी की पहुंच हो और यह पूरी प्रक्रिया मजबूत तथा एकदम पारदर्शी हो.
सरकार ने डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डीपीआइ) स्थापित करने की प्रक्रिया बहुत पहले शुरू कर दी थी. इसने आर्थिक विकास और सामाजिक समावेशिता को बढ़ावा देने में एक अहम भूमिका भी निभाई. हालांकि, देश में डिजिटल पहुंच के मामले में एक बड़ी खाई को पाटने की जरूरत है. डिजिटल क्रांति में हर किसी की भागीदारी के लिए बुनियादी सार्वभौमिक ई-साक्षरता एक बहुत जरूरी शर्त है. लेकिन इस सबसे पहले एक ठोस रणनीति के साथ प्रशिक्षित मैनपावर, टिकाऊ नेटवर्क और सतत निवेश भी जरूरी है.
यह गेम चेंजर क्यों है?
भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर ने डिजिटल सेवाओं के विस्तार को गति दी है, नवाचार बढ़ाया है और सार्वजनिक क्षेत्र में उत्पादकता और दक्षता को भी नए आयाम दिए हैं. डिजिटल पहचान के लिए आधार, सरकारी सेवाओं के लिए उमंग (यूनिफाइड मोबाइल ऐप्लिकेशन फॉर न्यू-एज गवर्नेंस), ऑनलाइन भुगतान के लिए यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआइ) और सार्वजनिक खरीद के लिए सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम). इन सबके अलावा एम-सेवा और डिजिलॉकर जैसी पहलकदमियों ने सरकार की तरफ से नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं का पूरा खाका बदलकर रख दिया है.
हालांकि, अभी तक इन सेवाओं का समान वितरण न हो पाना चिंता का विषय है. यही नहीं, सभी राज्यों और एजेंसियों के पास समान दक्षता वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए संसाधन या बुनियादी ढांचा नहीं है. इसलिए, सबसे पहले जरूरी यह है कि उम्दा प्रणालियां हर जगह साझा की जाएं. मसलन, राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन (एनयूडीएम) के अर्बन प्लेटफॉर्म फॉर डिलिवरी ऑफ ऑनलाइन गवर्नेंस यानी यूपीवाइओजी (उपयोग) को ले लीजिए, जो देश के शहरों-कस्बों में लोगों को नगरपालिका से जुड़ी सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलिवरी की सुविधा मुहैया करता है.
एनयूडीएम का कार्य मुख्य तौर पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नगरपालिका सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलिवरी के लिए साझा डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, बुनियादी डिजिटल बिल्डिंग ब्लॉक, रेडी टू यूज प्लेटफॉर्म, और मानक रूपरेखा उपलब्ध कराना है. उपयोग प्लेटफॉर्म को डीआइजीआइटी का इस्तेमाल करके बनाया गया है, ताकि देशभर की नागरिक एजेंसियां इस प्लेटफॉर्म को अपनी जरूरतों के अनुरूप ढाल सकें. मकसद यह है कि हर शहर और कस्बे को अपने स्तर पर प्लेटफॉर्म विकसित करने की जरूरत न पड़े और वह एक-सी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकें.
कुछ सेवाओं की उपयोगिता उनके इस्तेमाल के तरीके पर भी निर्भर करती है. कार एग्रीगेटर सेवाओं या फूड ऐप्स के विपरीत सरकारी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल आमतौर पर कम ही किया जाता है. अधिकांश लोग अपने मोबाइल फोन पर इन सेवाओं से संबंधित ऐप डाउनलोड नहीं करते. कई राज्य सरकारों ने अब ऐसी सेवाओं को यूजर फ्रेंड्ली बनाने की नई पहल की है. मसलन, पंजाब में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के दिशा निर्देशन में सी-डैक की तरफ से एमसेवा ऐप स्टोर विकसित किया गया.
इस स्टोर के तहत उपलब्ध नागरिक सेवा केंद्रित मोबाइल ऐप अब व्हाट्सऐप पर मुहैया कराए जा रहे हैं. व्हाट्सऐप चैट बॉट लोगों को बिजली बिल के भुगतान या नागरिक सेवाओं से जुड़ी शिकायतें दर्ज करने जैसी रोजमर्रा की जरूरतों में मदद कर रहा है. इसी तरह, आंध्र प्रदेश में कुरनूल नगर निगम भी नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने में व्हाट्सऐप चैटबॉट का उपयोग करता है.
महारत हासिल करने के लिए भारत क्या करे
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) का एक हालिया वर्किंग पेपर बताता है कि भारत के लिए असली चुनौती अपने डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की पहुंच को बढ़ाना है क्योंकि देश की एक बड़ी आबादी इंटरनेट एक्सेस या डिजिटल सेवाओं से दूर है.
इसलिए, सरकार को उन क्षेत्रों में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर व्यय बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, जो इंटरनेट और नई प्रौद्योगिकी की रोशनी से वंचित रह गए हैं. इसके अलावा, उसे ई-गवर्नेंस में मदद करने वाले सस्ते और स्थानीय किस्म के डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने के लिए सार्वजनिक और निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करना चाहिए. बेहतर होगा कि डिजिटल इंडिया के लिए 2023-24 का केंद्रीय बजट आवंटन 4,795 करोड़ रुपए से बढ़ाया जाए, जो पिछले साल के 7,603 करोड़ रुपए के वास्तविक परिव्यय से 37 फीसद कम है.
बदलाव के अगुआ
1. राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन
• शहरी इकोसिस्टम का पैमाना तय करने के साथ ही उसकी स्पीड और क्षमता बढ़ाने के लिए यह डिजिटल बुनियादी ढांचे का निर्माण करता है
2. डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन
• डिजिटल इंडिया मिशन को अंजाम देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से स्थापित एक गैर-लाभकारी संस्था

