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यानी अब राज्यसभा के दिग्गज जिताएंगे लोकसभा!

राज्यसभा से आने वाले मंत्रियों को लोकसभा चुनाव में उतारकर भाजपा विपक्ष की गोलबंदी को भी भेदने की रणनीति पर काम कर रही है

सीतारमण, मदुरै, तमिलनाडु
सीतारमण, मदुरै, तमिलनाडु
अपडेटेड 3 जुलाई , 2023

केंद्रीय शिक्षा मंत्री और राज्यसभा सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने इस साल 25 जनवरी को एक मीडिया संस्थान के कार्यक्रम में बोलते हुए इच्छा जताई थी कि वे चुनाव लड़ना चाहते हैं. अगले साल लोकसभा चुनाव के साथ ही ओडिशा में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. इसी राज्य से आने वाले प्रधान ने हालांकि यह साफ नहीं किया था कि वे लोकसभा चुनाव लड़ेंगे या विधानसभा, लेकिन 21 जून को मीडिया के एक सवाल के जवाब में उन्होंने साफ किया कि वे लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. इस तरह खुलकर चुनाव लड़ने की मंशा भले ही सिर्फ प्रधान ने जताई हो पर तथ्य यह है कि खुद पार्टी अपने दूसरे राज्यसभा सांसदों को अगला लोकसभा चुनाव लड़ाने की रणनीति पर काम कर रही है.

इस कवायद के दौरान भी उन मंत्रियों को चुनावी मैदान में उतारने पर अधिक जोर रहेगा जो लगातार दो कार्यकाल से राज्यसभा में हैं. पार्टी को लगता है कि मंत्रियों को चुनावी मैदान में उतारने से उसकी 'पक्की जीत' वाली सीटों की संख्या बढ़ेगी. दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा ने सीमित स्तर पर यह प्रयोग किया था. पिछले लोकसभा चुनाव में राज्यसभा सांसद के तौर पर केंद्र में मंत्री रहीं स्मृति ईरानी को उत्तर प्रदेश के अमेठी से, रविशंकर प्रसाद को बिहार के पटना साहिब से, हरदीप पुरी को पंजाब के अमृतसर से और के.जे. अल्फॉन्स को केरल के एर्नाकुलम से पार्टी ने लोकसभा चुनाव में उतारा था.

इस बार भाजपा अपनी इस रणनीति को और विस्तार देने की योजना पर काम कर रही है. इस बारे में पार्टी के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी कहते हैं, ''पार्टी का शीर्ष नेतृत्व 2019 के 303 सीटों पर जीत के प्रदर्शन को और बेहतर बनाने की योजना पर काम कर रहा है. इसके लिए यह जरूरी है कि केंद्र में मंत्री रहकर अपनी पहचान बनाने वाले नेताओं को भी चुनावी मैदान में उतारकर अधिक से अधिक सीटों को जीतने की कोशिश की जाए.'' इसी बात को आगे बढ़ाते हुए वे यह दावा भी करते हैं कि ये मंत्री जिन सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, पार्टी को उसके आसपास की सीटों पर भी इससे फायदा मिलेगा.

इस पूरे मामले में, भाजपा के एक अन्य राष्ट्रीय पदाधिकारी दूसरा रोचक आयाम जोड़ते हैं. उनका इशारा दरअसल विपक्ष की शुरू हुई गोलबंदी की ओर है. उन्हीं के शब्दों में, ''इस तरह की गोलबंदी में हर राज्य में कुछ ऐसी सीटें होंगी, जहां से अलग-अलग विपक्षी पार्टियों के प्रमुख नेता चुनाव लड़ेंगे. ऐसे में अगर भाजपा केंद्र में मंत्री रहे राज्यसभा के कुछ सांसदों को चुनावी मैदान में उतारती है तो इन विपक्षी नेताओं को उनकी सीटों पर चुनौती देने के मामले में ये बेहतर स्थिति में रहेंगे.''

राज्यसभा वाले जिन मंत्रियों को चुनाव लड़ाने की तैयारी भाजपा कर रही है, उनमें से कुछ नेता तो ऐसे हैं जिन्होंने पहले कभी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा. इनमें सबसे अव्वल नाम केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का है. उन्हें तमिलनाडु की मदुरै सीट से लोकसभा उम्मीदवार बनाया जा सकता है. इस सीट पर भाजपा अब तक कभी नहीं जीती है.

दूसरा प्रमुख नाम विदेश मंत्री एस. जयशंकर का है. जयशंकर के माता-पिता तमिलनाडु से रहे हैं लेकिन खुद उनका जन्म दिल्ली में ही हुआ. उनकी ज्यादातर पढ़ाई-लिखाई भी दिल्ली में ही हुई. इसी साल मई-जून में मोदी सरकार के नौ साल पूरे होने पर पार्टी ने जो महासंपर्क अभियान चलाया, उसमें जयशंकर को दिल्ली की ही चार लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी दी गई. इससे साफ हो गया कि पार्टी जयशंकर को दिल्ली से ही लोकसभा चुनाव लड़ाने की योजना पर काम कर रही है. उनके लिए नई दिल्ली सीट को उपयुक्त माना जा रहा है. इस सीट पर अभी केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी सांसद हैं.

इस कड़ी में तीसरा नाम पीयूष गोयल का है. 2010 से वे लगातार महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद हैं और 2014 से लगातार मोदी सरकार में मंत्री हैं. उन्हें 2024 में पुणे लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है. पिछले पांच लोकसभा चुनावों में तीन बार इस सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की है. लेकिन पुणे सीट का पेच यह है कि 2019 में वहां से चुने गए भाजपा के गिरीश बापट का निधन इसी साल मार्च में हुआ. इस वजह से वहां उपचुनाव होने हैं. ऐसे में अगर उपचुनाव में भाजपा का कोई और नेता चुनाव जीतता है तो इसके छह-आठ महीने बाद होने वाले चुनाव में उसे बदलना मुश्किल होगा.

जहां तक धर्मेंद्र प्रधान की बात है तो 2004 में वे ओडिशा की देवगढ़ सीट से लोकसभा सांसद रहे हैं. इसे परिसीमन में दो सीटों ढेंकानाल और संबलपुर में बांट दिया गया. इन दोनों सीटों में से किसी एक पर प्रधान लोकसभा उम्मीदवार बन सकते हैं.

इस कड़ी में गुजरात के दो मंत्रियों का नाम भी चर्चा में है. केंद्रीय स्वास्थ्य और रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया को सौराष्ट्र की किसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाने की तैयारी है. उनके लिए दो सीटों पर विचार किया जा रहा है. पहली सीट तो राजकोट की है. राजकोट को सौराष्ट्र का केंद्र माना जाता है. दूसरी सीट उनके गृह जिले भावनगर की है. यहां के पालीताना से वे विधायक रह चुके हैं. वहीं केंद्रीय पशुपालन मंत्री परषोत्तम रूपाला को गुजरात के अमरेली से चुनाव लड़ाया जा सकता है.

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ओडिशा काडर के आइएएस अधिकारी रहे हैं और इसी राज्य से राज्यसभा सांसद हैं. हालांकि, उनका गृह राज्य राजस्थान है. उनके लिए जयपुर सीट पर विचार किया जा रहा है. वैसे, संभावना इस बात की भी है कि उन्हें ओडिशा की ही किसी सीट से उम्मीदवार बनाया जाए.

राजस्थान से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय श्रम एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को भी लोकसभा चुनावों में उतारा जा सकता है. वे मूलत: हरियाणा के हैं लेकिन उनका जन्म राजस्थान में हुआ. अब तक की उनकी सियासी सक्रियता राजस्थान में अधिक रही है. उन्हें राजस्थान या हरियाणा की किसी सीट से चुनाव लड़ाने पर विचार किया जा रहा है. हरियाणा की गुरुग्राम सीट को उनके लिए सुरक्षित माना जा रहा है. हालांकि, उनके बारे में एक चर्चा यह भी है कि वे सरकार से वापस संगठन में जा रहे हैं. अगर वे फिर से राष्ट्रीय महासचिव बनकर संगठन में आते हैं तो उनके चुनाव लड़ने की संभावना कम रहेगी.

पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव हारे और बाद में भाजपा में शामिल होकर केंद्रीय मंत्री बने ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी पार्टी उनकी ही गुना सीट से चुनाव लड़ाने वाली है. सिंधिया अभी मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं. इसी तरह से 2019 में अमृतसर से हारने के बावजूद हरदीप सिंह पुरी को फिर से इसी सीट से उतारने की योजना पर काम किया जा रहा है. पुरी अभी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं. दूरसंचार राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर अभी कर्नाटक से राज्यसभा सांसद हैं. उन्हें केरल के त्रिशूर से लोकसभा चुनाव में उतारा जा सकता है. इस बारे में भाजपा में औपचारिक तौर पर कोई कुछ नहीं बोल रहा पर अनौपचारिक बातचीत में नेताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में इस सूची में कुछ और नाम जुड़ सकते हैं.

केंद्रीय मंत्री और संभावित लोकसभा सीट निर्मला

एस. जयशंकर
नई दिल्ली

पीयूष गोयल
पुणे, महाराष्ट्र

धर्मेंद्र प्रधान
ढेंकानाल या संबलपुर, ओडिशा

मनसुख मांडविया
राजकोट या भावनगर, गुजरात

अश्विनी वैष्णव
जयपुर, राजस्थान

भूपेंद्र यादव
गुरु ग्राम, हरियाणा

परषोत्तम रूपाला
अमरेली, गुजरात

हरदीप पुरी
अमृतसर, पंजाब

ज्योतिरादित्य सिंधिया
गुना, मध्य प्रदेश

राजीव चंद्रशेखर
त्रिशूर, केरल

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