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प्रधान संपादक की कलम से

देश के कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के व्यापक पाठ्यक्रम और हर किस्म की सुविधाएं उपलब्ध हैं. अच्छी खबर यही है कि शिक्षा की गुणवत्ता की मांग जैसे-जैसे ऊंची हुई है, सुधार की कोशिशें भी लगातार उसी अनुपात में आगे बढ़ी हैं

6 जुलाई, 2022का आवरण
6 जुलाई, 2022का आवरण
अपडेटेड 27 जून , 2023

अरुण पुरी

लगभग चौथाई दशक से इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे ने देश में उच्च शिक्षा संस्थानों की सबसे विश्वसनीय, भरोसेमंद और व्यापक रैंकिंग में अपनी प्रतिष्ठा लगातार बनाए रखी है. हम शिक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव के इस दौर में अपना 2023 का और कुल मिलाकर 27वां सर्वेक्षण लेकर आए हैं. आज शिक्षा संस्थानों को मानव ज्ञान की तेजी से बदलती दुनिया से वाबस्ता होने की सख्त जरूरत है. मिसाल के तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित कर रहा है. संस्थानों को अब इस पहलू पर गौर करना होगा कि रोजगार और नौकरियों के बाजार की आखिर नई मांगें किस तरह की हैं.

देश के कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के व्यापक पाठ्यक्रम और हर किस्म की सुविधाएं उपलब्ध हैं. अच्छी खबर यही है कि शिक्षा की गुणवत्ता की मांग जैसे-जैसे ऊंची हुई है, सुधार की कोशिशें भी लगातार उसी अनुपात में आगे बढ़ी हैं. और जिस बड़े पैमाने पर विश्वस्तरीय बुद्धिजीवियों की सूची में भारतीयों ने जगह बनाई है, वह बात इस तथ्य की पुष्टि ही करती है. अगर उस क्षेत्र का हमारा सर्वेक्षण छात्रों और शिक्षकों/शिक्षा जगत के लोगों के लिए समान रूप से एक जरूरी गाइडबुक बन गया है तो इसकी वजह यह है कि हम हर साल बदलाव की धाराओं की नब्ज टटोलने के लिए अपने बैरोमीटर की संवेदनशीलता और फैसले की कसौटियां सुधारते रहते हैं.

प्रतिष्ठित मार्केट रिसर्च एजेंसी मार्केटिंग ऐंड डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएट्स (एमडीआरए) के जरिए किया गया यह सर्वेक्षण एकदम अव्वल दर्जे का है. इसकी पुष्टि सर्वे में हिस्सेदारी करने वाले कॉलेजों की संख्या में भारी बढ़ोतरी से भी हो जाती है. पिछले पांच साल में यह संख्या दोगुनी हो गई है. 2018 में 988 कॉलेजों से बढ़कर इस साल 1,715 पर पहुंची संख्या छोटे शहरों में भी सर्वे की पहुंच जाहिर करती है. और इस तरह से भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान (आइआइटी), गांधीनगर इस साल देश के दस टॉप सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में शुमार हो गया है. दस टॉप मास कम्युनिकेशन संस्थानों में हैदराबाद यूनिवर्सिटी का कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट पांचवें पायदान पर है. फिर, टॉप मेडिकल संस्थानों में जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च चौथे से दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. अब तक अछूते रहे इलाकों से भी कॉलेजों की शिरकत यह संकेत देती है कि पहुंच के मामले में अब बराबरी का माहौल बन रहा है. दुनिया में अपना रसूख बढ़ाने के अपने साझा राष्ट्रीय लक्ष्य को देखते हुए इसे अच्छी शुरुआत कहा जा सकता है.

बदलाव के दूसरे अहम पहलू का वास्ता देश में शिक्षा के भीतरी सांचे-ढांचे से है. हम उच्च शिक्षा की नींव से लेकर ढांचे तक उसकी बुनियादी अवधारणा पर ही नए सिरे से विचार करने के दौर में हैं. पिछले साल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) शुरू की. यह कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया में किया गया आमूल बदलाव है, जिससे तमाम केंद्रीय विश्वविद्यालय और कई दूसरे होड़ लेने वाले संस्थान एक साझा मंच पर आ गए. पहले कॉलेज में दाखिला पूरी तरह 12वीं की बोर्ड परीक्षा के नतीजों पर निर्भर था. इससे असामान्य तौर पर ऊंचे कट-ऑफ अंकों की वजह से वंचितों की एक बड़ी जमात खड़ी हो गई.

रट्टा मार पढ़ाई करने वालों के हक में खड़ी वह व्यवस्था अब अतीत की बात हो गई है. सीयूईटी परीक्षा का तरीका ऐसा तैयार किया गया है कि उससे छात्र की विलक्षणता और तर्क बुद्धि की क्षमता का अंदाजा लगता है. इसमें यह भी आजादी है कि उन्हें उनके प्रिय विषय में आजमाया जाए. देश भर के छात्र अपनी पसंद के विषय और अपने सपनों के कॉलेज में दाखिला पा सकते हैं, चाहे 10+2 बोर्ड परीक्षा के उनके विषय कुछ भी हों. सीयूईटी के आवेदन में उन अहम बॉक्सों पर सही का निशान लगाने में उनकी मदद करने की खातिर हम इस साल एक इनोवेशन लेकर आए हैं. एक नई कैटेगरी 'खास सब्जेक्ट के बेस्ट कॉलेज' लाई गई है. पहले साल इसमें आर्ट्स और साइंस के 12 विषय हैं.

एक से दूसरे शहर में आवाजाही और संचार सुविधाओं की सहूलत के इस दौर में छात्रों को देश भर के कॉलजों के बारे में कहीं अधिक जानकारी मुहैया कराना ही तार्किक तरीका है, ताकि वे अपने सपनों के कॉलेज में दाखिला ले सकें, न कि स्थानीय दायरे में उपलब्ध साधनों में बंधे रहें. यह क्षेत्रीय खाई को पाटने की दिशा में एक कदम है. रैंकिंग से हमें इन सब पहलुओं का पता चलता है. गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के प्रसार के मामले में क्षेत्रीय खाई काफी चौड़ी है. टॉप 10 में दिल्ली-एनसीआर के 45 कॉलेज हैं. बात यहीं तक सीमित नहीं. यही रुझान तमाम विषयों में देखने को मिलता है. मसलन, तकनीकी शिक्षा, प्योर साइंस, आर्ट्स, कॉमर्स, लॉ वगैरह. इसके बरअक्स, दूसरे नंबर पर बेंगलूरू के 14 कॉलेज टॉप 10 में हैं. दक्षिण भारत के सभी पांच शीर्ष शहरों को मिलाकर भी संख्या सिर्फ 36 तक पहुंचती है. मुंबई और पुणे सिर्फ 17 पर गर्व कर सकते हैं. कोलकाता में तो महज तीन हैं. एग्जीक्यूटिव एडिटर कौशिक डेका के संपादन में हमारा श्रेष्ठ कॉलेज विशेषांक व्यापक तस्वीर पर विहंगम दृष्टि के साथ बारीक रुझानों को भी उजागर करता है.

इस साल हम छात्रों और उनके अभिभावकों दोनों के लिए एक बोनस लेकर आए हैं. हमने 14 मुख्य विषयों और 2,000 से अधिक टॉप रैंकिंग वाले कॉलेजों की रैंक की आसान उपलब्धता, विश्लेषण और दिशा-निर्देश के लिए एकदम नए इंटरैक्टिव ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत की है. उसमें आप अपने राज्य और शहर के श्रेष्ठ कॉलेज के अलावा पिछले छह साल की कॉलेजों की रैंकिंग भी देख सकते हैं, ताकि उनके पिछले प्रदर्शनों का भी पता लगा सकें. इसके अलावा गुणवत्ता के पांच पैमानों पर उनकी तुलना कर सकते हैं. ये पैमाने हैं कॉलेज प्रशासन की गुणवत्ता, अकादमिक विलक्षणता, इन्फ्रास्ट्रक्चर और रहने का अनुभव, व्यक्तित्व तथा नेतृत्व क्षमता विकास, प्लेसमेंट तथा करियर.

अगर आपको किसी खास कॉलेज के अतिरिक्त ब्यौरे चाहिए तो आप उसके खास पन्ने को देख सकते हैं. उसमें आपको उपलब्ध कोर्स, प्रवेश शुल्क, कट-ऑफ, प्लेसमेंट, फैकल्टी और उद्योग से उसका जुड़ाव दिख जाएगा. कॉलेज में दाखिले और अच्छे के चयन को बेताब युवाओं के लिए यह वाकई सूचनाओं और विश्लेषण के बड़े खजाने जैसा है. कृपया आसान और उपयोगी सर्फिंग के लिए इस लिंक https://bestcolleges.indiatoday.in/  को खोलें. सभी छात्रों को हमारी शुभकामनाएं.

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