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निकलेगी भाजपा की 'पर्ची'?

पटना में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के हालिया आयोजन और उसमें भाजपा नेताओं के जमावड़े को पार्टी की चुनावी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है

भविष्य की तैयारी : बिहार में भाजपा के वरिष्ठ नेता पंडित धीरेंद्र शास्त्री की आरती उतारते हुए
भविष्य की तैयारी : बिहार में भाजपा के वरिष्ठ नेता पंडित धीरेंद्र शास्त्री की आरती उतारते हुए
अपडेटेड 7 जून , 2023

पुष्यमित्र

पटना के नौबतपुर में बागेश्वरधाम सरकार के नाम से पहचाने जाने वाले पंडित धीरेंद्र शास्त्री की पांच दिवसीय हनुमत कथा 17 मई को खत्म हुई थी. कार्यक्रम की जमीनी जिम्मेदारियों से फुर्सत मिलने के दो दिन बाद 20 मई को इसकी आयोजन समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार सारस्वत पटना में अपने घर में बैठे कार्यक्रम का हिसाब-किताब निबटाने में व्यस्त थे. कार्यक्रम को लेकर वे बड़े उत्साह से इंडिया टुडे के साथ बातचीत कर रहे थे कि इसी बीच उनके पास भाजपा के विधान परिषद सदस्य हरि सहनी का फोन आया. फोन कॉल निबटा कर सारस्वत बोले कि हरि सहनी अपने गृह जिले दरभंगा में भी पंडित धीरेंद्र शास्त्री का आयोजन कराना चाहते हैं और इस आयोजन में होने वाले खर्च के बारे में दरयाफ्त कर रहे थे. इस बात की पुष्टि बाद में खुद हरि सहनी ने भी की. उन्होंने बताया कि वे धीरेंद्र शास्त्री की हनुमत कथा का आयोजन को दरभंगा में कराने का मन बना चुके हैं. सारस्वत के मुताबिक, आयोजन के बाद से कई लोगों ने उनसे और आयोजन समिति के सचिव राजशेखर से ऐसी पूछताछ की है.

राजशेखर जानकारी देते हैं कि बिहार के मुजफ्फरपुर, मधुबनी, भागलपुर, पूर्णिया, सासाराम और बक्सर में लोग पंडित धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम आयोजित कराने को लेकर काफी गंभीर हैं. राजशेखर ने यह तो साफ-साफ नहीं बताया कि इन आयोजकों में भाजपा के नेता कितने हैं, मगर इशारे में यह साफ किया कि ज्यादातर भाजपा से हैं और हिंदुत्ववादी राजनीति के ही समर्थक हैं. कृष्ण कुमार सारस्वत ने थोड़ा खुलकर बताया, ''यहां आधे लोग बाबा धीरेंद्र शास्त्री की कथा सुनने या उनके चमत्कार से अपने दुख-दर्द दूर करवाने आए थे और बाकी आधे उनके हिंदुत्व के जयघोष से प्रभावित होकर पहुंचे थे. बाबा जी ने भी क्या कसर छोड़ी, कह ही तो दिया कि बिहार से ही हिंदू राष्ट्र की ज्वाला धधकेगी. ये बातें भाजपा के नेता सीधे-सीधे कहने से बचते हैं लेकिन इनसे फायदा भाजपा को ही है. ऐसे जितने आयोजन होंगे, सबका फायदा आखिरकार भाजपा को ही होगा.''

पंडित धीरेंद्र शास्त्री के इस हालिया कार्यक्रम को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि उनका यहां के लोगों पर खूब असर है. हनुमत कथा के आखिरी दिन यह खबर थी कि धीरेंद्र शास्त्री कथा के साथ-साथ कुछ चुनिंदा लोगों को दीक्षा भी देंगे. वे अभी पटना के अपने होटल से निकले भी नहीं थे, मगर 22 किमी दूर आयोजन स्थल के रास्ते में जगह-जगह चिलचिलाती धूप में हजारों लोग खड़े नजर आ रहे थे. पटना एम्स के पास अपनी पत्नी और बेटी के साथ खड़े विपिन कुमार ने बताया कि वे लोग यहां पिछले डेढ़ घंटे से खड़े हैं. विपिन ने कहा, ''उम्मीद है कि बाबा इधर से गुजरेंगे तो उनके दर्शन हो जाएंगे. कथा स्थल में तो उनको देख पाना नामुमकिन है.'' 

नौबतपुर के तरेत गांव में जहां यह आयोजन हो रहा था, वहां से दो किमी पहले से लोगों का रेला दिखने लगा था. पटना के जिस होटल में वे ठहरे थे, वहां भी चौबीसों घंटे हजारों लोगों की भीड़ जमा रहती थी. इस दौरान उनसे मिलने कई नेता भी पहुंचे. खबर है कि जनअधिकार पार्टी के प्रमुख पप्पू यादव और बाहुबली नेता अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी भी यहां पहुंची थीं. 

हालांकि पप्पू यादव इससे इनकार करते हैं. उनका कहना है, ''यह सरासर झूठ बात है. सात सौ जन्म में भी मैं ऐसे ढोंगी बाबा से मिलने नहीं जा सकता. मैं आनंदमार्गी परंपरा को मानने वाला आदमी हूं और वैज्ञानिक चेतना रखता हूं. मैं पड़ोस (धीरेंद्र शास्त्री जिस होटल में ठहरे थे) के बरिस्ता में कॉफी पीने जाया करता हूं, रात में वहां गया था. धीरेंद्र शास्त्री की विचारधारा से मेरा तीखा विरोध है. अगर वे चमत्कारी हैं तो देश की गरीबी खत्म करके दिखाएं? वे भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं तो अपने चमत्कार से क्यों नहीं बना देते?'' वहीं नीलम देवी ने स्वीकार किया कि वे पंडित धीरेंद्र शास्त्री से मिलने गई थीं, हालांकि इससे आगे कुछ भी कहने से उन्होंने इनकार कर दिया. 20 हजार रुपए रोजाना वाले होटल के उस प्रेसिडेंशियल सूइट, जिसमें धीरेंद्र शास्त्री ठहरे थे, उसे देखने और उसके वीडियो बनाने के लिए मीडिया और यूट्यूबरों की भीड़ अब भी होटल पहुंच रही है. 

इस तरह देखें तो धीरेंद्र शास्त्री की यह पटना यात्रा और उसमें जुटी भीड़ ऐसी मिसाल बन गई, जो हाल के वर्षों में पटना के लोगों ने नहीं देखी थी. हालांकि आयोजन समिति के कई लोगों को लगता है कि इस कार्यक्रम को सियासी लोगों ने अपने हिसाब से चलाया. नौबतपुर में कथा आयोजन स्थल के बाहर आयोजन से जुड़े एक कार्यकर्ता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ''बाबा को कहां जाना है, किससे मिलना है यह सब भाजपा के बड़े नेता तय कर रहे हैं.'' 

यह बात सही मालूम देती है क्योंकि भाजपा नेता और भोजपुरी गायक मनोज तिवारी धीरेंद्र शास्त्री के साथ दिल्ली से पटना आए थे और वे खुद कार ड्राइव करते हुए बाबा को होटल तक लेकर गए. हालांकि आयोजकों के इस आरोप को मनोज तिवारी खारिज करते हैं कि आयोजन को भाजपा ने हथिया लिया. वे कहते हैं, ''धीरेंद्र शास्त्री से मेरा बहुत पुराना संबंध है. आज का नहीं, 11 वर्षों का संबंध है. हम लोग एक ही गुरु के शिष्य हैं, रामभद्राचार्य के. उन्होंने उनसे संस्कृत सीखी, मैंने संगीत. यह कोई राजनीतिक संबंध नहीं है. जहां तक उनकी कार ड्राइव करने की बात है तो उन्होंने ही मुझसे स्टीयरिंग संभालने को कहा था और एक बात यह भी है कि उस कार में आयोजन समिति के सदस्य भी मौजूद थे.''  साथ ही वे विरोधियों पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, ''देश के कुछ राजनैतिक दलों को ऐसा क्यों लगता है कि अगर सनातन का कोई आयोजन हो रहा है तो इसके पीछे भाजपा है. उनको अपनी यह सोच बदलनी चाहिए.'' 

धीरेंद्र शास्त्री के होटल पहुंचने के बाद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह, रामकृपाल यादव, अश्विनी चौबे, रविशंकर प्रसाद और सम्राट चौधरी जैसे कद्दावर भाजपा नेताओं ने उन्हें इस तरह घेरा कि खुद आयोजक ही बाबा के लिए अपरिचित हो गए. कृष्ण कुमार सारस्वत की पत्नी पार्किसन से पीड़ित हैं, वे अपनी पत्नी को अकेले में धीरेंद्र शास्त्री से मिलवाना चाहते थे. मगर उन्हें इसका मौका नहीं मिला. सचिव राजशेखर भी दबे स्वर में इस बात को स्वीकार करते हैं, मगर कहते हैं, ''अब जो हुआ सो हुआ. सबसे बड़ी बात है कि इतना बड़ा आयोजन शांति-पूर्वक संपन्न हो गया, यह सबसे अधिक खुशी की बात है.'' 

दरअसल, आयोजन से पहले से ही बिहार भाजपा के मुख्यालय के बाहर पार्टी नेताओं ने धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में बड़े-बड़े पोस्टर लगाने शुरू कर दिए थे. उनमें से एक में लिखा था, ''बाबा और हिंदू धर्म का विरोध करने वाले को बिहार की जनता 2024-2025 (के चुनाव) में क्लीन बोल्ड करेगी.'' इस पोस्टर में बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी की फोटो भी लगी थी. 

हालांकि भाजपा नेता इस कार्यक्रम को हथियाने या अपने फायदे के लिए इस्तेमाल की बात से इनकार करते हैं. नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा कहते हैं, ''भाजपा किसी राजनैतिक फायदे के लिए बाबा धीरेंद्र शास्त्री के पास नहीं गई थी. चूंकि राजद के नेता बाबा धीरेंद्र शास्त्री जैसे संत का अपमान करने लगे थे, तो उनके सम्मान की रक्षा के लिए हम लोग वहां खड़े हुए.'' हिंदू राष्ट्र का मुद्दा उछालकर क्या धीरेंद्र शास्त्री भाजपा के लिए चुनावी अभियान शुरू करके गए हैं? इस सवाल के जवाब में विजय सिन्हा कहते हैं, ''हम बाबाजी के हिंदुत्व वाले बयान से सहमत हैं और यह बिल्कुल सही बात है. हां, हिंदू राष्ट्र का मतलब यह नहीं होगा कि हम दूसरे धर्मों का अपमान करेंगे. वसुधैव कुटुंबकम् हमारी नीति है और अपने संतों का सम्मान करना ही हमारा मूल स्वभाव है.'' भाजपा ऑफिस के बाहर धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में लगे भड़काऊ पोस्टरों के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसे पोस्टर उनकी नजर में नहीं आए हैं, लेकिन ऐसा हुआ तो यह तुष्टीकरण की राजनीति की प्रतिक्रिया है. उनका इशारा राजद नेता तेज प्रताप यादव के उस कैंपेन की तरफ था, जो उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के विरोध में चलाया था.

धीरेंद्र शास्त्री की बिहार यात्रा का सबसे तीखा विरोध राजद के नेता और बिहार के पर्यावरण मंत्री तेज प्रताप यादव ने किया. उन्होंने आयोजन से पहले ही कह दिया था, ''धर्म को टुकड़ों में बांटने वालों को करारा जवाब मिलेगा. हमारी तैयारी पूरी है.'' इतना ही नहीं, उन्होंने इस आयोजन के लिए राष्ट्रीय स्यवंसेवक संघ (आरएसएस) की तर्ज पर बने अपने छह साल पुराने संगठन धर्मनिरपेक्ष सेवक संघ (डीएसएस) को जिंदा कर लिया और सफेद शर्ट, हरी पैंट पहने अपने स्वयं-सेवकों का मार्च गांधी मैदान में कराना शुरू कर दिया. इंडिया टुडे से बातचीत में तेज प्रताप यादव कहते हैं, ''यहां कथा वाचक कथा कम कह रहे थे, भाजपा का प्रोपेगेंडा अधिक फैला रहे थे.

बताइए, कोई संत फाइव स्टार होटल में ठहरता है? संत तो देवराहा बाबा थे, जो गंगा किनारे कुटी बनाकर रहते थे. वे तो एक भाजपा नेता के साथ कार के काफिले में पटना आए और एक अपराधी के साथ चार्टर्ड प्लेन में उड़कर गए, ऐसे लोग संत थोड़े ही होते हैं.'' धीरेंद्र शास्त्री लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता हुलास पांडेय के साथ चार्टर्ड प्लेन में पटना से खजुराहो लौटे थे. बाहुबली नेता पांडेय के ऊपर पैसों की हेरफेर, जबरन वसूली और अवैध हथियार रखने जैसे कई आरोप हैं. 

धीरेंद्र शास्त्री के हिंदू राष्ट्र के आह्वान का विरोध बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी किया. उन्होंने कहा, ''आपको धर्म के नाम पर जो भी करना हो कीजिए मगर नामकरण (हिंदू राष्ट्र) करने की क्या जरूरत है?'' वहीं राज्य के राजनैतिक विश्लेषक मानते हैं कि भले ही आज धीरेंद्र शास्त्री का असर बिहार में नजर आया हो, मगर भाजपा इस असर को वोट बैंक में कितना बदल पाएगी, यह कहना मुश्किल है. लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार विकास कुमार झा कहते हैं, '' बिहार में भाजपा का प्रभाव ढलान पर है. जैसे यूपी में योगी हैं, बिहार में भाजपा के पास वैसा कोई मजबूत नेता नहीं है. दूसरी बात यह है कि धर्म को लेकर जो लोग बहुत उत्साहित रहते हैं, वे धार्मिक आस्था के साथ पोलिंग बूथ तक भी पहुंच जाएंगे, यह कहना मुश्किल है.''

बिहार-झारखंड के एक बड़े अखबार के प्रबंध संपादक रह चुके राजेंद्र तिवारी कहते हैं, ''दरअसल, बिहार में जाति जनगणना को लेकर माहौल बन रहा है, ऐसे में भाजपा को लग रहा है कि कहीं उनके हिंदू वोटर बंट न जाएं. ऐसे में उन्हें ऐसे किसी किरदार की सख्त जरूरत है, जो हिंदुओं को एकजुट कर दे. मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में भाजपा के लोग बिहार में धीरेंद्र शास्त्री का भरपूर इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे.''

लेखक और राजनैतिक टिप्पणीकार प्रेम कुमार मणि के मुताबिक, भाजपा लोगों की धर्मांधता का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है. वे कहते हैं, ''जनसंघ वाले भी पहले यज्ञ कराते रहते थे. आज चमत्कारी बाबा बुलाया जा रहा है. यह कोई नई बात नहीं है. हमारी तरफ एक कहावत है, मूर्खों के गांव में ठग कभी भूखे नहीं सोते. तो जब तक लोगों में धर्मांधता रहेगी, ऐसे बाबाओं की चलती रहेगी. भाजपा तो हमेशा से ऐसे लोगों को अपना हथियार बनाती है.''

धीरेंद्र शास्त्री हजारों-लाखों लोगों की पर्चियों में से किसी एक की पर्ची निकालकर उसकी मुश्किलों का हल बताने के लिए प्रसिद्ध हैं. लगता है कि भाजपा भी शायद इसी उम्मीद में है कि आने वाले दिनों में ऐसे आयोजनों के जरिए उसकी भी एक 'पर्ची' निकल जाए.

''धीरेंद्र शास्त्री भाजपा का प्रोपेगेंडा फैला रहे थे. वे भाजपा नेताओं के साथ आए, एक अपराधी के साथ प्लेन में वापस गए. संत ऐसे होते हैं क्या?''
तेज प्रताप यादव, राजद नेता और पर्यावरण मंत्री, बिहार

'' मेरा और धीरेंद्र शास्त्री का संबंध 11 साल पुराना है. हम एक ही गुरु के शिष्य हैं. हमारे बीच कोई राजनैतिक संबंध नहीं हैं''
मनोज तिवारी, सांसद, भाजपा
 

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