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अब बड़े निवाले पर नजर

भारत ऐपल के स्मार्टफोन का बड़ा बाजार ही नहीं है, उसका प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग आधार भी बन सकता है, जिससे चीन पर उसकी निर्भरता कम होगी.

नया केंद्र : मुंबई में बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में ऐपल का पहला खुदरा स्टोर
नया केंद्र : मुंबई में बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में ऐपल का पहला खुदरा स्टोर
अपडेटेड 5 मई , 2023

बिजनेस : ऐपल

ऐपल इनकॉर्पोरेशन के चीफ एग्जीक्यूटिव टिम कुक 17 अप्रैल को भारत आए और यहां अगला पूरा हफ्ता उनके लिए उन्हीं के शब्दों में ''अविश्वसनीय सप्ताह’’ रहा. इस यात्रा में कुक ने कैलिफोर्निया स्थित कंपनी के ''स्वामित्व वाले’’ यहां के दो पहले स्टोर का उद्घाटन किया, एक मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में और दूसरा नई दिल्ली के साकेत में. उन्होंने कई ग्राहकों और ऐपल की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी पहल के लाभार्थियों से बातचीत की और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनके दो मंत्रियों अश्विनी वैष्णव और राजीव चंद्रशेखर से मिले. कुक 2016 में अपनी पहली यात्रा के सात साल बाद भारत आए और अब उनके पास आने की अच्छी वजहें भी थीं.

प्रीमियम स्मार्टफोन सेग्मेंट में 2022 में 42 फीसद हिस्सेदारी के साथ भारत ऐपल के उत्पादों के लिए न सिर्फ उसके मुख्य बाजारों में से एक है, बल्कि वैश्विक बाजार के लिए आइफोन बनाने का प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग आधार भी है. उसके तीन कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर ने 2022-23 में यहां 57,390 करोड़ रुपए के आइफोन एसेंबल किए जो 2021-22 से तीन गुना ज्यादा थे. इसे बढ़ना ही है. ऐपल ने 2022 के कैलेंडर वर्ष में दुनियाभर में 22.47 करोड़ आइफोन भेजे जिनमें करीब 3 फीसद या 60 लाख भारत में बने थे. भेजने का मतलब खुदरा विक्रेताओं को भेजे गए हैंडसेट से है और जरूरी नहीं कि सभी बिक गए हों.

ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी और राजस्व के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी आइफोन के अपने वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग आधार को चीन से हटाकर भारत लाने का मंसूबा बना रही है, ताकि अपनी वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग सप्लाइ चेन को जोखिम से मुक्त कर सके. फिलहाल वह अभी दुनियाभर में बेचे जाने वाले 85 फीसद आइफोन का उत्पादन चीन में करती है.

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ लगाई व्यापार पाबंदियों के बाद कई अमेरिकी कंपनियों ने चीन पर अपनी मैन्युफैक्चरिंग निर्भरता कम करने का मंसूबा बनाया है. चीन ने 2020 की शुरुआत में और हाल में बीते साल के आखिर तक भी कोविड से लडऩे के लिए अपने प्रमुख शहरों में सख्त लॉकडाउन लगाए, जिससे उसकी मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन में गंभीर व्यवधान पैदा हो गए. इससे उस पर निर्भर कंपनियों में अफरा-तफरी मच गई और उनका उत्पादन प्रभावित हुआ.

मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि ऐपल इस दशक के आखिर तक आइफोन का अपना आधा वैश्विक उत्पादन भारत ला सकती है, वैसे कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने ऐसी योजनाओं के बारे में कुछ कहने से मना कर दिया. यही नहीं, भारत में ऐसी सप्लाई चेन नए सिरे से स्थापित करना लंबी और धीमी कवायद होगी. मगर ऐसा करने का इरादा मजबूत दिखाई देता है. कुक ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात के बाद 19 अप्रैल को ट्वीट किया, ''भारत के भविष्य पर टेक्नोलॉजी के सकारात्मक असर के बारे में आपके (मोदी के) नजरिए में हम सहभागी हैं—शिक्षा और डेवलपर्स से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और पर्यावरण तक हम देशभर में बढ़ने और निवेश करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं.’’

फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप, पेगाट्रॉन और विस्ट्रॉन जैसे पार्टनरों के जरिए ऐपल भारत में आइफोन बनाता है. ये सभी तमिलनाडु स्थित अपने कारखानों में आइफोन एसेंबल और उत्पादित करते हैं. इन आइफोन को एसेंबल करने में लगने वाले 90 फीसद कलपुर्जे अब भी देश में बाहर से आयात किए जाते हैं. जाहिर है, ऐपल सरीखी चोटी की टेक्नोलॉजी कंपनियों को सही किस्म का पारितंत्र मुहैया करने में देश को अभी बहुत लंबी दूरी तय करनी है.

रिसर्च फर्म आइडीसी इंडिया के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट नवकेंदर सिंह कहते हैं, ''ऐपल को अपनी 'चाइना प्लस वन’  रणनीति के लिए भारत की जरूरत है. लेकिन वियतनाम के मामले में भी यह सच है.’’ दरअसल अपनी मैन्युफैक्चरिंग की एक और मंजिल की खातिर वियतनाम भी ऐपल के राडार पर है. मगर भारत में दूसरे फायदे भी हैं.

पिछले नवंबर में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि भारत में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले लोग 1.2 अरब से ज्यादा हैं और इनमें से 60 करोड़ स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. नवकेंदर सिंह कहते हैं, ''भारत का घरेलू बाजार अगले 10-15 वर्षों तक बढ़ता रहेगा, हालांकि (ऐपल के उत्पादों की) कीमतों की रेंज अलग-अलग हैं. दूसरा कोई बाजार नहीं जहां अब भी आधे अरब उपभोक्ता हों जिन्हें अभी स्मार्टफोन की तरफ जाना है. हमारा लागत ढांचा काफी कम है. यह चीन से सस्ता है और शायद वियतनाम से भी सस्ता हो.’’

विशाल खुदरा बाजार

टेक्नोलॉजी बाजार की रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 के कैलेंडर वर्ष में भारत में बने आइफोन का शिपमेंट वॉल्यूम सालाना आधार पर 65 फीसद बढ़ा, और उनके मूल्य में 162 फीसद की बढ़ोतरी हुई. इसकी वजह थी बढ़ता प्रीमियमाइजेशन, और खासकर ऐपल के प्रीमियम स्मार्टफोन का बढ़ता निर्यात. इससे भारत में हैंडसेट के बाजार में ऐपल की मूल्य हिस्सेदारी 2021 की 12 फीसद से दोगुनी बढ़कर 2022 में 25 फीसद पर पहुंच गई.

स्मार्टफोन बाजार में पहली बार 2022 में प्रीमियम मार्केट हैंडसेट (30,000 रुपए से ज्यादा कीमत के) की हिस्सेदारी 11 फीसद के दहाई अंक तक पहुंच गई. काउंटरपॉइंट के सीनियर रिसर्च एनैलिस्ट प्राचीर सिंह कहते हैं, ''प्रीमियमाइजेशन का रुझान बढ़ रहा है और इसकी एक वजह ऐपल है. प्रीमियम सेग्मेंट में फाइनेंसिंग के कई विकल्प हैं. इसलिए वे आम आदमी की पहुंच के भीतर हैं. 15,000 रुपए के फोन का इस्तेमाल करने वाले लोग 2,000 रुपए या 4,000 रुपए की ईएमआइ पर आइफोन ले सकते हैं.’’

पहले जब ऐपल अपने मॉडल आयात करता था, उसे भारी कस्टम ड्यूटी चुकानी पड़ती थी, जो कभी-कभी 20 फीसद तक होती थी. इससे उत्पाद महंगे हो जाते थे. ऐपल ज्यादा डिस्काउंट देने में भी यकीन नहीं करता था. 2020 के बाद यह बदल गया. फर्म ने बड़े रिटेलरों से होने वाली दीवाली बिक्री पर ध्यान दिया. जैसे, आइफोन एसई 2020 फ्लिपकार्ट पर 30,000 रुपए के ऑफर पर उपलब्ध करवाया. इससे बिक्री बढ़ाने में मदद मिली. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जहां दूसरे सभी सेग्मेंट में कम वृद्धि दर्ज हुई, प्रीमियम सेग्मेंट की वृद्धि से उपभोक्ताओं में लक्जरी उत्पादों के प्रति रुझान दिखा.

इंडिया सेल्यूलर इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के आंकड़े बताते हैं कि 2022-23 में भारत से स्मार्टफोन का निर्यात पिछले साल के 5.48 अरब डॉलर (44,928 करोड़ रुपए) से दोगुना बढ़कर 11.1 अरब डॉलर (91,000 करोड़ रुपए) पर पहुंच गया. भारत से स्मार्टफोन के निर्यात में ऐपल की हिस्सेदारी 45 फीसद थी. उधर 2022-23 के वित्तीय साल में शाओमी (रेडमी हैंडसेट ब्रान्ड की निर्माता) सरीखी चीनी स्मार्टफोन फर्म के निर्यात में सालाना आधार पर 26 फीसद की गिरावट आई.

निर्यात में उसकी हिस्सेदारी महज 1.35 फीसद थी. ऐपल ने साल 2022 में दुनियाभर में 394.22 अरब डॉलर के उत्पाद बेचे, जो 2021 के मुकाबले 8 फीसद ज्यादा थे. 2022 में खत्म हुए साल में उनकी शुद्ध आय पिछले साल के 94.68 अरब डॉलर के मुकाबले बढ़कर 99.8 अरब डॉलर हो गई. सबसे ज्यादा बिक्री आइफोन की हुई. कंपनी ने 205.49 अरब डॉलर के आइफोन बेचे, जो 2021 के मुकाबले 7 फीसद ज्यादा था. ऐपल के अन्य उत्पादों में मैक लैपटॉप, आइपैड, एयरपैड, ऐपल टीवी और ऐपल वॉच शामिल हैं. 

साल 2022 में स्मार्टफोन में शाओमी 20 फीसद हिस्सेदारी के साथ बाजार की अगुआ थी, जबकि ऐपल की हिस्सेदारी महज 4 फीसद थी. मगर 2022 में प्रीमियम बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी 42 फीसद थी.

भारत में निर्माण

दिसंबर, 2022 तक दुनियाभर में ऐपल के 180 से ज्यादा सप्लायर थे, जिनमें से 150 चीन में थे. कंपनी अपने मैन्युफैक्चरिंग आधार के तौर पर चीन से हटकर देखने की कोशिश ऐसे वक्त में कर रही है जब भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग ईकोसिस्टम की क्षमताओं को उन्नत बनाने में जुटा है. 2020 में देश के कोविड-19 की चपेट में आने और दुनिया में सख्त लॉकडाउन के दौरों से गुजरने के बाद केंद्र ने देश को ज्यादा आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से 'आत्मनिर्भर भारत अभियान’ का ऐलान किया.

इसके तहत स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव (पीएलआइ) स्कीम लाई गई, जिसमें केंद्र स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 14 विनिर्माण क्षेत्रों में लक्ष्य-आधारित प्रोत्साहन लाभ देता है. पहले दौर में इस योजना के तहत भारत में बनी वस्तुओं की क्रमिक बढ़ती बिक्री पर (2019-20 को आधार वर्ष मानते हुए) पांच साल के लिए 4 से 6 फीसद के प्रोत्साहन लाभ दिए गए. दूसरे दौर में पात्र कंपनियों को भारत में बनाई गई वस्तुओं की क्रमिक बढ़ती बिक्री पर चार साल के लिए 3 से 5 फीसद के प्रोत्साहन लाभ दिए गए. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में ऐपल के तीनों कॉन्ट्रैक्टर—फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन और विस्ट्रॉन—को इसके तहत लाभ दिए गए.

मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि चीन में ऐपल के 14 सप्लायरों को भारत में निवेश के लिए केंद्र की शुरुआती मंजूरी मिल गई है. उन्हें देश में दाखिल होने के लिए स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने होंगे. ऐपल अभी तक अपने हरेक मॉडल का महज एक वैरिएंट भारत में बना रहा है. उसके कॉन्ट्रैक्टरों ने पिछले साल आइफोन 14 देश में एसेंबल करने शुरू किए.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फॉक्सकॉन और विस्ट्रॉन कॉर्प में से हरेक ने वित्तवर्ष के पहले नौ महीनों में 1 अरब डॉलर से ज्यादा के आइफोन विदेश भेजे. वहीं, पेगाट्रॉन करीब 50 करोड़ डॉलर के गैजेट निर्यात करने की तैयारी में है. फॉक्सकॉन बेंगलुरू में नया संयंत्र लगाने में भी जुटा है. इन इकाइयों से काफी नौकरियां मिलने के दावे किए जा रहे हैं. आंका जाता है कि अगस्त 2021 में पीएलआइ के अमल में आने के बाद तीनों कॉन्ट्रैक्ट फर्मों और अन्य कलपुर्जे सप्लायरों (जिनमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भी है) ने मिलकर 50,000 प्रत्यक्ष और 1,00,000 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए.

आगे की चुनौतियां

विशेषज्ञों की राय है कि भारत में ज्यादा उत्पादन से कम लागत की अर्थव्यवस्था हासिल करना छोटे वक्त में चुनौती भरा होगा, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों के चीन के ऐसे सप्लायर अब भी कम हैं जो ऐपल के बड़े कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर की मदद के लिए भारत में मौजूद हैं. ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस का आकलन है कि चीन से अपनी उत्पादन क्षमता का महज 10 फीसद हिस्सा बाहर ले जाने में ऐपल को करीब आठ साल लगेंगे. नवकेंदर सिंह कहते हैं, ''चीन से नाता तोड़ना मुश्किल होगा, खासकर ऐपल के लिए, जो उसपर इस कदर निर्भर है. चीन में करीब 3.5 लाख आइएसओ 9001 संगठन हैं. भारत में 30,000 से ज्यादा नहीं हैं. ऐपल के लिए जरूरी गुणवत्ता, सटीकता और मानकों वाले सप्लायरों के ईकोसिस्टम को बाहर ले जाना बेहद मुश्किल होगा.’’

उनकी राय है कि जैसे ऐपल को भारत की जरूरत है, उसी तरह भारत को उसकी. वे कहते हैं, ''ऐपल विशाल ब्रान्ड और निवेशक है. अगर वह यहां निवेश करता है तो दुनिया इसको देखेगी. इससे दूसरे संगठनों के लिए दरवाजे खुल जाएंगे.’’ इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए चीन के जैसे पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में लंबा वक्त लगेगा. देश में प्रतिबद्धता जताने से पहले ऐपल का कोई भी सप्लायर देखना चाहेगा कि भारत में निर्माण कितना टिकाऊ होगा. 

कुक की यात्रा ने ऐपल की योजनाओं में भारत की अहमियत को रेखांकित किया है. अपनी वैश्विक सप्लाइ चेन के बड़े हिस्से को भारत लाने में ऐपल को कई साल लग सकते हैं, पर भारत इससे खुश हो सकता है कि उस लक्ष्य की दिशा में सफर शुरू हो चुका है. 

''भारत के भविष्य पर टेक्नोलॉजी के सकारात्मक असर के बारे में आपके (मोदी के) नजरिए में हम सहभागी हैं...’’
टिम कुक, सीईओ, ऐपल, मेड इन इंडिया

तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदुर में फॉक्सकॉन के मोबाइल फोन प्लांट में काम करते कर्मचारी

57,390 करोड़ रुपए के आइफोन ऐपल ने भारत में 2022-23 में एसेंबल किए, यह 2021-22 के मुकाबले तीन गुना ज्यादा थे

5% आइफोन 
ऐपल ने फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन और विस्ट्रॉन सरीखी फर्मों के साथ साझेदारी में भारत में बनाए.

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