scorecardresearch

दलबदल का दौर

बहरहाल, भाजपा के लिए टिकट वितरण का काम उतनी सहजता से पूरा नहीं हो पाया जिसके लिए उसने तैयारियां की थीं और पूरा जोर लगाया था. इस चूक की उसे क्या कीमत चुकानी पड़ेगी, यह तो 13 मई को पता चलेगा जब विधानसभा चुनावों के परिणाम आएंगे

नई पारी बेंगलूरू में 17 अप्रैल को भाजपा के जगदीश शेट्टार (बीच में) कांग्रेस में शामिल हुए
नई पारी बेंगलूरू में 17 अप्रैल को भाजपा के जगदीश शेट्टार (बीच में) कांग्रेस में शामिल हुए
अपडेटेड 25 अप्रैल , 2023

अजय सुकुमारन

कर्नाटक में 224 सीटों वाली विधानसभा के चुनाव से तीन सप्ताह पहले उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही नेताओं के दलबदल का मौसम भी शबाब पर है. खासकर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने कुछ वरिष्ठ नेताओं को इन चुनावों में नहीं उतारने का फैसला लिया, तब भी उसे पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार सरीखे अपने कुछ पुराने योद्धाओं से यह अपेक्षा बिल्कुल नहीं थी कि वे पाला बदल लेंगे. 10 मई को राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में राजनीतिक रूप से व्यस्त सप्ताहांत में, जातिगत कारकों को ध्यान में रखते हुए राज्य के राजनीतिक समीकरणों को साधने की बेताबी सभी दलों में दिख रही है. 

भाजपा पिछले कुछ समय से बड़े फेरबदल के संकेत दे रही थी. ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि गुजरात की तरह कर्नाटक में भी, सत्ता विरोधी रुझानों के असर को कम करने के लिए कुछ सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया जाएगा जबकि कुछ वरिष्ठ नेताओं को अब सेवानिवृत्त किया जाएगा. इसलिए जब उसने अपने 18 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे तो उसे कुछ प्रतिक्रिया की उम्मीद तो पहले से ही थी. 74 वर्षीय वयोवृद्ध के.एस. ईश्वरप्पा सरीखे कुछ वरिष्ठ नेता रेस से पीछे हट गए, जब यह साफ हो गया था कि उन्हें शिवमोग्गा सीट से टिकट नहीं मिलेगा जहां से वे साल 1989 से चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा का गढ़ माने जाने वाले दक्षिण कन्नड़, उत्तर कन्नड़ और उडुपी जैसे तीन तटीय जिलों की 19 विधानसभा सीटों में से छह सीटों पर पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को बदल दिया और उसे इसमें किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा. लेकिन, शेट्टार और विधान परिषद के सदस्य तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी ने अपना टिकट कटने के बाद कांग्रेस का हाथ थाम लिया. 

कांग्रेस ने पिछले हफ्ते ही ऐसे पांच विधायकों को टिकट देने की घोषणा की थी जो हाल ही में भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) से आए थे. इसके साथ ही उसे भी अपने लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, उसने कई सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा नहीं करते हुए दूसरी पार्टियों के दिग्गजों के लिए दरवाजे खुले रखे थे, विशेष रूप से हुबली-धारवाड़ मध्य और अथानी सीटों पर, जहां से अब शेट्टार और सावदी को उम्मीदवार बनाया गया है. राजनैतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस पुनर्गठन का संभावित प्रभाव, 'कित्तूर कर्नाटक' के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में दिखेगा, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई होगी. इस क्षेत्र को पहल बॉम्बे-कर्नाटक के नाम से जाना जाता था और यह महाराष्ट्र की सीमा पर बेलगावी जिले से लेकर हावेरी तक फैला हुआ है. इस इलाके में वीरशैव-लिंगायतों का दबदबा है और कई वर्षों से यह भी भाजपा का गढ़ रहा है. साल 2018 के चुनाव में उसे यहां की 50 में से 30 सीटों पर जीत मिली थी.

अप्रैल की 17 तारीख को बेंगलूरू में शेट्टार के पार्टी में शामिल होने के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ''शेट्टार के आने से उत्तर कर्नाटक में हमें मजबूती मिलेगी.'' 67 वर्षीय शेट्टार ने साल 1994 से लगातार हुबली-धारवाड़ सेंट्रल से चुनाव जीता है, और वे एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिसका दो पीढ़ियों से जनसंघ से जुड़ाव रहा है. यह इशारा करते हुए कि वे बी.एस. येदियुरप्पा के बाद भाजपा में सबसे वरिष्ठ लिंगायत नेता थे, उन्होंने पूछा, ''ऐसी पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को उन्होंने क्यों किनारे कर दिया?'' शेट्टार ने कहा कि शान से कदम पीछे खींचने का अवसर देने के बजाय, पार्टी की ओर से उन्हें टिकट नहीं देने के फैसले की सूचना अंतिम समय में फोन पर देने से वे आहत थे. 

जहां शेट्टार को भाजपा से अचानक निकलना पड़ा, वहीं सावदी के पार्टी के साथ संबंधों में साल 2019 से ही खटास आने लगी, जब भाजपा 17 दलबदलुओं की मदद से कर्नाटक में सत्ता में आई थी. इनमें पूर्व कांग्रेसी महेश कुमथल्ली भी शामिल थे, जिन्होंने साल 2018 में अथनी सीट से सावदी को 2,331 मतों से हराया था. उसके बाद हुए उपचुनावों में, कुमथल्ली ने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में अपनी वह सीट वापस जीत ली थी. फिर, सावदी को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया और फरवरी 2020 में, वे एमएलएसी चुने गए थे. वहीं, इस बार दोनों ही नेता अथनी सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक थे, लेकिन बेलगावी के राजनीतिक दिग्गज रमेश जारकीहोली कुमथल्ली के लिए यहां से टिकट सुरक्षित करने में कामयाब रहे. दरअसल, वह जारकीहोली ही थे जिन्होंने साल 2019 में भाजपा में आए दलबदलुओं के जत्थे का नेतृत्व किया था. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि टिकटों के लिए यह ताजा संघर्ष दरअसल जिले में उनके बढ़ते दबदबे को दर्शाता है.

ये सारी बातें बेलगावी, जो 18 विधानसभा क्षेत्रों के साथ बेंगलूरू के बाद दूसरा सबसे बड़ा जिला है, को एक प्रमुख चुनावी रणभूमि बना देती हैं. इस इलाके के एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं, ''यहां के लिंगायत मतदाताओं पर लगभग एकाधिकार कर चुकी भाजपा को अब इस पर कुछ काम करने की जरूरत महसूस होगी.'' शेट्टार की तरह, सावदी भी एक लिंगायत नेता हैं और सहकारी क्षेत्र के माध्यम से अपने आप में बहुत प्रभावशाली हैं और वे वहां काफी सक्रिय रहे हैं. एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि कांग्रेस को ऐसी उम्मीद है कि उसे लिंगायत समुदाय के इन दो वरिष्ठ नेताओं को भाजपा से 'अपमानित' करके पार्टी छोड़ने को मजबूर करने की आम धारणा से फायदा होगा.

भाजपा को भी इसका एहसास है और इसलिए उसने तत्काल येदियुरप्पा को डैमेज कंट्रोल के लिए लगा दिया है. उन्होंने कहा, ''भाजपा को इससे कोई परेशानी नहीं होने वाली''. उन्होंने तर्क दिया कि दोनों नेताओं के पास शिकायत की कोई वजह नहीं थी. वे ध्यान दिलाते हैं कि सावदी को पिछले साल एमएलसी चुना गया और अभी उनके कार्यकाल के पांच साल बाकी थे. उन्होंने कहा, ''जब हम सत्ता में लौटते, तो उन्हें मंत्री बनाया जाता.'' शेट्टार को मनाने के लिए चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई सहित शीर्ष नेता सप्ताहांत में उनके पास गए थे. यहां तक कि शेट्टार के परिवार के किसी भी सदस्य को विधानसभा के टिकट देने के अलावा उनके लिए राज्यसभा का टिकट और केंद्र सरकार में मंत्री के पद का आश्वासन भी दिया गया था. येदियुरप्पा ने 16 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''पार्टी ने शेट्टार को इतने सारे पद दिए हैं और यहां तक कि उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री भी बनाया है. लोग उन्हें माफ नहीं करेंगे. मैं राज्य भर में घूमकर जनता को यह बताऊंगा कि वास्तव में क्या हुआ था.''

बहरहाल, भाजपा के लिए टिकट वितरण का काम उतनी सहजता से पूरा नहीं हो पाया जिसके लिए उसने तैयारियां की थीं और पूरा जोर लगाया था. इस चूक की उसे क्या कीमत चुकानी पड़ेगी, यह तो 13 मई को पता चलेगा जब विधानसभा चुनावों के परिणाम आएंगे.

Advertisement
Advertisement