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एक उम्मीद गुजरती है इधर से

मुंबई की एक छोटी-सी गली दशकों से ऐसे हजारों छात्रों के करिअर को आकार दे रही है, जो पढ़ने के लिए एक शांत और सुकून भरी जगह की तलाश में हर रात यहां आते हैं.

पाठशाला: मुंबई के व्यस्त वर्ली नाका सड़क के किनारे शाम को पढ़ाई करते बच्चे
पाठशाला: मुंबई के व्यस्त वर्ली नाका सड़क के किनारे शाम को पढ़ाई करते बच्चे
अपडेटेड 15 फ़रवरी , 2023

धवल कुलकर्णी

मुंबई की एक बीडीडी चॉल के निवासी सुधीर सुहास अदेलकर अपनी किताबें लेकर हर शाम, वर्ली के आर.ए. पोद्दार आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज भवन के पीछे की एक संकरी गली में आते हैं. जब तक वे सुदाम कालू अहिरे रोड पर पहुंचते हैं, तब तक कई अन्य युवा पहुंच चुके होते हैं. ये सभी पेड़ों से घिरे फुटपाथ के छोटे हिस्से पर बैठ जाते हैं. शहर के विभिन्न हिस्सों से आने वाले ये बच्चे चॉलों, मलिन बस्तियों और शहर में रहने वाले हजारों निम्न-आय वाले परिवारों से ताल्लुक रखते हैं.

ये सभी एक नेक काम के लिए यहां इकट्ठा होते हैं: पढ़ाई. जहां जल्दी तिल रखने की भी जगह न मिलती हो, ऐसे मुंबई जैसे महानगर में 'अभ्यास गली’ उनकी पढ़ाई के लिए एकमात्र समर्पित जगह है—उनके लिए यह लग्जरी ही है जो उन्हें माचिस की डिबिया जैसे अपने घरों में नहीं मिल सकती जिनमें वे परिवार के कई सदस्यों के साथ रहते है, और न ही यह शोरगुल वाले उनके पड़ोस में मिल सकती है.

वे यहां देर रात तक रुकते हैं, अपने साथियों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हैं, आपस में नोट्स शेयर करते हैं, या स्वाध्याय करते हैं. दशकों से इसी गली में पढ़कर कई लोग वकील, डॉक्टर या पुलिस अधिकारी बने हैं. 180 वर्ग फुट के एक छोटे-से घर से आने वाले अदेलकर आठवीं कक्षा से यहीं पढ़ाई कर रहे हैं. अदेलकर कहते हैं, ''अब, मैं महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं. मेरे घर में जगह नहीं है. यह पढ़ने के लिए एक शांत जगह है.’’

 स्थानीय लोगों का कहना है कि अभ्यास गली का इतिहास कम से कम तीन से चार पीढ़ियों का है. कीर्ति एम. डूंगरसी कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस ऐंड कॉमर्स के प्रिंसिपल डी.वी. पवार याद करते हैं कि वे बचपन में पुणे जिले के भोर से मुंबई आने के बाद यहीं पढ़ाई किया करते थे. पवार बताते हैं, ''मैं बीडीडी चॉल की पुलिस लाइन में रहता था क्योंकि मेरे बड़े भाई पुलिस बल में थे.

हमारा संयुक्त परिवार था और घर महज 10&10 फुट का था, जिससे मेरे लिए पढ़ाई करना मुश्किल हो गया था. इसलिए मैं अभ्यास गली में पढ़ता था.’’ पवार ने 1981 में कॉलेज से स्नातक किया और बाद में उसी कॉलेज में अर्थशास्त्र और ग्रामीण विकास पढ़ाने लगे. वर्ली निवासी और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) की युवा शाखा युवा सेना के नेता अभिजीत पाटील का भी इस गली से जुड़ाव रहा है. वे कहते हैं कि उनके दादा भी बचपन में अभ्यास गली में जाते थे.

हालांकि छात्रों को चौबीसों घंटे यहां पढ़ाई करते हुए पाया जा सकता है, लेकिन शाम के बाद संख्या बढ़ जाती है. सड़क पर आधी रात के बाद आने-जाने वालों की संख्या और ट्रैफिक में धीरे-धीरे गिरावट आने लगती है जिससे युवा सुबह तक आराम से पढ़ाई कर सकते हैं जब मुंबई जाग जाती है और रोजमर्रा की भागदौड़ शुरू हो जाती है. अभ्यास गली आने वालों में से कई पास की चॉलों से आते हैं तो कुछ दूर चेंबूर से भी. वर्ली कोलीवाडा में रहने वाले निखिल नीलेश ठाकुर कहते हैं कि वे इस गली में आते हैं क्योंकि यहां ग्रुप स्टडी का अवसर मिल जाता है और अपनी शंकाओं को दूर करने के लिए अपने साथियों की मदद ले सकते हैं.

विभिन्न सरकारों ने इस जगह को छात्रों के लिए आरामदायक बनाने के उपाय किए हैं. राज्य विधानसभा में वर्ली का प्रतिनिधित्व करने वाले शिवसेना नेता और राज्य के पूर्व पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने अपनी विधायक निधि से लेन के सौंदर्यीकरण की शुरुआत की. इस गली में एक वाटर कूलर और छात्रों के लिए दो मंजिला शौचालय है. सड़क पक्की कर दी गई है, और जिस फुटपाथ पर युवा बैठते हैं, उसका नवीनीकरण किया गया है.

सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क भी लगा हुआ है. हैलोजन लैंप की वजह से यहां पर्याप्त रोशनी है और छात्रों के बैठने के लिए प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं. सड़क की ओर दीवारों पर अब ग्रैफिटी या भित्ति चित्र हैं जो बारहवीं कक्षा के बाद करिअर के विकल्पों को दर्शाते हैं और छात्रों को जानकारी मुहैया करने के लिए क्यूआर कोड लगाए गए हैं जो उन्हें कानून, चार्टर्ड एकाउंटेंसी (सीए), सशस्त्र बलों या चिकित्सा जैसे विषयों में से चयन में मदद कर सकते हैं. पाटील कहते हैं कि परीक्षा के समय वे रात में मुफ्त में चाय बांटते थे.

वैसे, कुछ छोटी-मोटी समस्याएं बनी हुई हैं. मिसाल के तौर पर सड़क का एक किनारा अवैध रूप से खड़ी माल ढुलाई की गाड़ियों और दूसरे भारी वाहनों से अटा पड़ा है. पाटील की शिकायत है कि इससे कचरे का ढेर लग जाता है. एकांत की तलाश कर रहे प्रेमी जोड़ों से लेकर शराबी और नशेड़ी इन वाहनों के पीछे की खाली जगह का इस्तेमाल करते देखे जा सकते हैं. अपनी हायर सेकंडरी परीक्षा के लिए यहां पढ़ने आने वाली महालक्ष्मी निवासी रूपाली साल्वे कहती हैं, ''दास पन चावतात, आनी मनसा पन [हमें परेशान करने वालों में मच्छरों के साथ-साथ कई इनसान भी होते हैं].’’

वे आमतौर पर मच्छर भगाने वाली कॉइल जलाकर मच्छरों को भगा देती हैं लेकिन बेकाबू प्रेमी जोड़ों, शराबियों, नशाखोरों और इंस्टाग्राम वीडियो शूट करने वालों से बहुत दुखी हैं. ऐसे लोग अक्सर छात्रों के लिए बनाए गए प्लेटफॉर्मों का दुरुपयोग करते हैं. वे इसकी शिकायत करते हुए कहती हैं, ''अक्सर हमारा काफी सारा समय तो इन लोगों को संयत व्यवहार करने के लिए कहने में बर्बाद होता है.’’

साल्वे कहती हैं कि अगर नियमित पुलिस पेट्रोलिंग हो तो ऐसी घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है. कॉमर्स के तीसरे वर्ष के छात्र अक्षय पवार का एक और सुझाव है: शाम को इस लेन को यातायात के लिए बंद कर देना चाहिए ताकि छात्र शांति से पढ़ सकें.

प्रशासन ऐसी शिकायतों पर संज्ञान ले तो बेहतर होगा. वर्षों से अभ्यास गली को मुंबई के इतिहास में अंकित किया गया है और इसने हजारों छात्रों के करिअर को आकार दिया है. यह सपनों के शहर में धैर्य और दृढ़ता की एक और प्रतीक बनी हुई है.ठ्ठ

खुशी का सूत्र
''हमारा संयुक्त परिवार हुआ करता था और घर महज 10 बाइ 10 फुट का था, जिसकी वजह से मेरे लिए अध्ययन करना मुश्किल था. लिहाजा, मैं अभ्यास गली में पढ़ाई करता था’’
—डी.वी. पवार, प्रिंसिपल, कीर्ति एम. डूंगरसी, कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस ऐंड कॉमर्स, अभ्यास गली मुंबई

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