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ज्यादा से ज्यादा देखभाल

ज्यादातर भारतीयों में अब कुदरती संक्रमण और टीकाकरण के कारण दोहरी रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा हो चुकी है, जिसके कारण भारत में बड़ी लहर का खतरा अपेक्षाकृत रूप से कम है

सजग और तत्पर एलएनजेपी अस्पताल में कोविड वार्ड में तैनात स्वास्थ्यकर्मी
सजग और तत्पर एलएनजेपी अस्पताल में कोविड वार्ड में तैनात स्वास्थ्यकर्मी
अपडेटेड 3 जनवरी , 2023

सोनाली आचार्जी

दिल्ली के सबसे बड़े कोविड अस्पताल लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल (एलएनजेपी) ने 27 दिसंबर को एक मॉक ड्रिल शुरू की. मकसद था देश में संक्रमणों में संभावित उछाल की तैयारी. हालांकि, अस्पताल का 450 बिस्तरों का कोविड वार्ड तब खाली था और राजधानी के 8,000 से ज्यादा कोविड बिस्तरों में से महज 14 भरे थे.

यह सच है कि फिलहाल भारत आरामदायक स्थिति में है, जबकि अमेरिका, ब्राजील, कोरिया और खासकर चीन सरीखे देश ओमिक्रॉन के बीएफ.7 सब-वैरिएंट के कारण संक्रमणों में ताजा बढ़ोतरी से जूझ रहे हैं. 25 दिसंबर को भारत में कोविड के महज 187 नए मामले आए. बीते दो महीनों में इस आंकड़े में कोई बड़ा उछाल नहीं आया. ज्यादा अहम यह कि मौतें भी कम हैं. 25 दिसंबर को दो मौतें दर्ज की गईं और उससे पहले के हफ्ते औसतन महज तीन मौतें हुई थीं. इसके उलट चीन में हाल में कोविड की तमाम पाबंदियों को खत्म कर देने के बाद संक्रमण जंगल की आग की तरह फैल रहा है. देश ने दैनिक मामलों की गिनती बताना बंद कर दिया, तो हाल में लीक हुए सरकारी दस्तावेज से पता चला कि नए साल के पहले 20 दिनों में 25 करोड़ मामले सामने आ सकते हैं. 

भारत को लेकर विशेषज्ञ अलबत्ता आशावादी हैं. हालांकि, चीन की स्थिति के लिए जिम्मेदार वैरिएंट बीएफ.7 भारत आ धमका है. जानी-मानी वायरोलॉजिस्ट गगनदीप कंग कहती हैं, ''चीन में जो हो रहा है, उसकी वजह आबादी की अलहदा जनसांख्यिकी है. भारत में कुदरती और वैक्सीन से मिली रोग प्रतिरोधक क्षमता है और युवाओं की आबादी ज्यादा है. चीन में कुदरती रोग प्रतिरोधक क्षमता कम और बुजुर्ग ज्यादा हैं. दुनिया ने जो इन सालों में झेला, वह चीन हफ्तों में झेलेगा.''

भारत ओमिक्रॉन के कई सब-वैरिएंट से आई बड़ी लहरों से बच निकला है. विशेषज्ञों को लगता है कि डेल्टा की चौतरफा लहर और उसके साथ टीके की तीन खुराकों ने हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को वायरस का जवाब देने के लिए तैयार कर दिया, जिससे यह ज्यादातर लोगों के लिए आम सर्दी-जुकाम से ज्यादा खतरनाक नहीं रह गया. जबकि चीन ऐसे सब-वैरिएंट की मार झेल रहा है जो टीके लगी आबादी के बीच विकसित हुआ है और इसलिए उन सब-वैरिएंट से ज्यादा संक्रामक है जिन्होंने बीते कुछ सालों में दूसरे देशों में बड़ी लहरें पैदा कीं. बीएफ.7 की प्रजनन संख्या (एक संक्रमित व्यक्ति से संक्रमित हो सकने वाले लोगों की संख्या) 10 से 18.6 के बीच मानी जाती है, जबकि भारत में जनवरी 2022 में आखिरी बड़ी लहर पैदा करने वाले मूल ओमिक्रॉन की औसत प्रजनन संख्या 5.08 थी. 

स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के डेटा के मुताबिक, चीन में मौजूदा उछाल से पहले बीएफ.7 से मिलती-जुलती जेनेटिक बुनावट वाले वैरिएंट फरवरी 2021 से करीब 90 देशों में देखे गए. यह वैरिएंट दुनिया भर में 0.5 फीसद से कम नमूनों में पाया गया है. डॉ. कंग कहती हैं, ''बीएफ.7 भारत के लिए नया नहीं है और पिछले महीनों में हमने ओमिक्रॉन के किसी सब-वैरिएंट की वजह से कोई बड़ी लहर नहीं देखी. बीएफ.7 के भी अलग ढंग से व्यवहार करने की कोई संभावना नहीं है.'' भारत में फिलहाल कोविड के 10 वैरिएंट मौजूद हैं, मगर संक्रमण के मामले नहीं बढे हैं.

कोविड के लक्षणों में भी बदलाव के आसार नहीं हैं. ज्यादातर लोगों को हल्के, फ्लू-सरीखे लक्षण महसूस होंगे, बुखार भी हो सकता है. चीन में भी वायरस अलग ढंग से बर्ताव नहीं कर रहा है—यह ऊपरी श्वसन तंत्र में कुछ लक्षण पैदा कर रहा है, जबकि डेल्टा वैरिएंट निचले श्वसन तंत्र को संक्रमित करता था. अलबत्ता संक्रमणों की यह लहर सर्दियों के दिनों में आई है, इसलिए अन्य वायरस भी फैल रहे हैं और कोविड संक्रमणों को और बिगाड़ रहे हैं. चीन में संक्रमण की तादाद बताती है कि कुछ लोगों (खासकर बुजुर्ग और जिन्हें टीका नहीं लगा) को भी गंभीर कोविड का खतरा होने पर स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड़ सकती है.

विशेषज्ञों ने खतरे की कोई बड़ी घंटी नहीं बजाई, पर सरकार जोखिम लेने को तैयार नहीं है. देश भर के सरकारी अस्पतालों में मॉक ड्रिल और पॉजिटिव नमूनों की जीनोमिक सीक्वेंसिंग बढ़ाने पर जोर है. चीन की हालत परेशानी का सबब है, क्योंकि कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली आबादियों के बीच वायरस के बेलगाम फैलने से नए म्यूटेशन और वैरिएंट की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. चीन से आ सकने वाले संभावित नए वैरिएंट पर कड़ी नजर रखना बेहद अहम होगा, जैसा कि अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता नेड राइस ने हाल ही में कहा. इधर हमारे यहां कोविड के नमूनों की जीनोमिक सीक्वेंसिंग को समर्पित प्रयोगशालाओं के राष्ट्रीय कंसोर्शियम आइएनएसएसीओजी या इंसाकोग के सह-अध्यक्ष एन.के. अरोड़ा इसका अनुमोदन करते हैं, ''जीनोमिक सीक्वेंसिंग कोविड के वैरिएंट के फैलाव को समझने में मदद करेगी, और अगर कोई एक वैरिएंट ज्यादा तेजी से फैल रहा है, तो हम सावधानी बढ़ा सकेंगे.''

बूस्टर डोज भी बुजुर्गों के काम आएंगे. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि एमआरएनए बूस्टर ज्यादा असरदार हो सकते हैं. ऐसे एक टीके (पुणे की जेनोवा बायोफार्मास्यूटिकल्स का स्वदेश में विकसित) को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही इसे बूस्टर कार्यक्रम में शामिल किए जाने की संभावना है. 

भारत अपनी पांच परतों की कोविड रणनीति फिर शुरू कर रहा है—जांच करवाओ, नजर रखो, इलाज करवाओ, टीका लगवाओ, और कोविड के उपयुक्त व्यवहार का पालन करो. फिलहाल भारत में बीएफ.7 के चार नए मामलों में केवल हल्के लक्षण दिखाई दिए हैं. डॉ. अरोड़ा कहते हैं, ''नए वैरिएंट और बड़े प्रकोप के संकेतों पर हमारी नजर है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है. हालांकि, आत्मसंतुष्ट या लापरवाह होना ठीक नहीं—बूस्टर डोज लगवाएं और नियमों का पालन करें.'' इस सवाल का कोई साफ जवाब नहीं कि कोविड महामारी अपना चक्र पूरा कर चुकी है या नहीं. जवाब मिलने तक वही करना बेहतर है जो हम निश्चित तौर पर जानते हैं—सावधानी ही बेहतरीन रणनीति है. 

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