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प्रधान संपादक की कलम से

इंडिया टुडे ने गौतम अदाणी को अपना सुर्खियों का सरताज 2022 बनाया. ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा और एग्जीक्यूटिव एडिटर एम.जी. अरुण जब अहमदाबाद स्थित अदाणी समूह के मुख्यालय में उनसे मिले, तो पता चला कि गौतम अदाणी अपनी अमीरी को सहजता और विनम्रता से लेते हैं.

12 जनवरी, 2022
12 जनवरी, 2022
अपडेटेड 3 जनवरी , 2023

अरुण पुरी

परिभाषित करने के लिहाज से 2022 मुश्किल साल रहा. दुनिया ने मान लिया था कि कोविड-19 का बुरा सपना टूट चुका है और जिंदगी नए वसंत में लौटने लगी थी. मगर फरवरी में ही यूक्रेन की जंग छिड़ गई और हालात के सामने नई अनिश्चितता खड़ी हो गई. अब साल खत्म हो रहा है, जंग पूरे जोर-शोर से जारी है और महामारी फिर हमारा पीछा कर रही है. लेकिन जो बात इस साल को खास बनाती है, वह है इनसानी जज्बा, जो तमाम क्षेत्रों—कारोबार, खेल, राजनीति, सिनेमा—में अपना रास्ता बना ही लेता है.

इस अंक में हम साल के सबसे रोचक और दिलकश हिस्से लेकर आए हैं. अहमदाबाद स्थित अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी भारत और एशिया के सबसे अमीर और दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख्स बन गए. अपने दम पर बने इस उद्यमी ने 2022 में अपनी आगे बढ़ने की धमाकेदार रणनीति के बूते ऐसा किया, जिसने उनके समूह को भारतीय कारोबार के शिखर पर स्थापित कर दिया.

उनके समूह का बाजार पूंजीकरण महज तीन साल में नौ गुना बढ़कर 17.9 लाख करोड़ रुपए के पार चला गया, जिसने उसे टाटा के बाद और रिलायंस से पहले भारत का दूसरा सबसे मूल्यवान कारोबारी घराना बना दिया. उनका सबसे ताजातरीन—और शायद सबसे साहसी—कदम 10.5 अरब डॉलर (करीब 87,000 करोड़ रुपए) में एसीसी और अंबुजा सीमेंट में स्विस फर्म होल्सिम की हिस्सेदारी खरीदना है, जो बुनियादी ढांचा क्षेत्र में भारत का एकल सबसे बड़ा सौदा है.

इसके साथ ही अदाणी ग्रुप देश का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक भी बन गया. अदाणी पहले ही भारत का निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा बिजली उत्पादक, बंदरगाह संचालक, हवाई अड्डा संचालक, उपभोक्ता गैस और इलेक्ट्रिक ट्रांसमिशन कंपनी है, और इसके अलावा सबसे बड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर और अक्षय ऊर्जा उत्पादक भी है.

इस साल उसके लगातार बढ़ते साम्राज्य में देश की सबसे बड़ी समुद्री सेवा कंपनी, एक मीडिया नेटवर्क, टेलीकॉम और खाद्यान्न शामिल हुए. यह सब करते हुए उनके समूह ने इस जून में उनके 60वें जन्मदिन पर 60,000 करोड़ रुपए की चैरिटी का वादा किया—यह धन स्वास्थ्य और शिक्षा के कामों में जाएगा, यानी उन दो चीजों में, जो सबके लिए भावी विकास की नींव तैयार करेंगी.

घोर प्रतिकूल परिस्थितियों के होते हुए भी कारोबार और निजी संपदा में यह धमाकेदार बढ़ोतरी ही थी जिसकी वजह से इंडिया टुडे ने गौतम अदाणी को अपना सुर्खियों का सरताज 2022 बनाया. ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा और एग्जीक्यूटिव एडिटर एम.जी. अरुण जब अहमदाबाद स्थित अदाणी समूह के मुख्यालय में उनसे मिले, तो पता चला कि गौतम अदाणी अपनी अमीरी को सहजता और विनम्रता से लेते हैं.

बातचीत आधे घंटे होनी थी, पर करीब 90 मिनट चली, और इस दौरान मुश्किल से हाथ आने वाले अरबपति खुलते चले गए कि कैसे उन्होंने अपना कारोबार बढ़ाया, उनकी मैनेजमेंट स्टाइल और उनका जिंदगी का फलसफा क्या है. अदाणी फिर चेंगप्पा के साथ आधिकारिक प्रिंट और वीडियो इंटरव्यू रिकॉर्ड करवाने के लिए राजी हो गए और अपने उन आलोचकों को भी जवाब देने से कतराए नहीं जो उनके असाधारण उभार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्थान से जोड़कर देखते हैं.

और आरोप लगाते हैं कि उनकी कंपनियों ने बहुत ज्यादा कर्ज ले रखा है. उन्होंने इंडिया टुडे से कहा, ''रैंकिंोग और आंकड़े मेरे लिए मायने नहीं रखते. मुझे अपना रोमांच चुनौतियों से जूझने से मिलता है.’’ छोटे या बड़े ढंग से यह ऐसी महत्वाकांक्षा है जिसकी आने वाले साल में हम सब आकांक्षा कर सकते हैं.

अन्य लोग भी थे जिन्होंने 2022 को गढ़ने वाली घटनाओं पर जोरदार असर डाला. प्रधानमंत्री मोदी ने मार्च में उत्तर प्रदेश में और साल बीतते-बीतते गुजरात में अपने करियर की शायद सबसे हैरतंगेज चुनावी जीतों से राजनैतिक जनमानस पर अपनी टिकाऊ पकड़ प्रदर्शित की. विश्व अर्थव्यवस्था भले मंदी में रही हो, भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहा. निर्यातों को बढ़ावा देने और देश के जीडीपी में मैन्युफैक्चर‌िंग की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए पीएम मोदी ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआइ) योजनाओं पर आक्रामक ढंग से जोर दिया.

राष्ट्र के बुनियादी ढांचे में जबरदस्त निवेश की उनकी प्रतिबद्धता अडिग रही और महज 2025 तक करीब 100 लाख करोड़ रुपए देने का वादा किया. सशस्त्र बलों के लिए अग्निवीर योजना शुरू करके साहसी पहल की अपनी लगन भी उन्होंने बनाए रखी. इस साल भारत ने ऑस्ट्रेलिया और यूएई के साथ व्यापार समझौते करने का अच्छा काम किया. देश ने 5जी टेलीकॉम टेक्नोलॉजी में भी छलांग लगाई और आधुनिक सेमी-हाइ-स्पीड ट्रेन लेकर आया. जरूरतमंदों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने 80 करोड़ लोगों के लिए प्रति व्यक्तिक 5 किलो मुफ्त अनाज की योजना एक और साल जारी रखने का ऐलान भी किया.

वे भारत के राजनैतिक भूदृश्य की निर्णायक ताकत बने रहे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी आवाज को संजीदगी से लिया जाता है. दिसंबर से जी20 भारतीय नेतृत्व में आ गया, जिससे प्रधानमंत्री मोदी वैश्वीकरण का अपना विचार सामने रख पाएंगे, खासकर ऐसे समय जब विश्व व्यवस्था बदलाव से गुजर रही है. उन्होंने एक और निर्णायक कदम उठाया, ऐसा जिसमें राजनीति को बदल देने की क्षमता है. आदिवासी अब तक मुख्यधारा से सबसे ज्यादा दूर रहे. पर 2022 ने हमें द्रौपदी मुर्मू दीं.

राहुल गांधी को अक्सर गैरहाजिर नेता कहा जाता है, जिनमें अपने  प्रतिष्ठित पुरखों की तरह बन पाने की क्षमता नहीं है. मगर मिट्टी के साथ सबसे श्रमसाध्य जुड़ाव के लिए उन्होंने अपना तन-मन झोंक दिया. हालांकि वे जिस राजनीति में हैं, वह सबसे मजबूत हालत में नहीं है. महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के एमवीए के गठबंधन से कूच करने का महानाटक इसका सबूत है.

मगर सबसे अविश्वसनीय साझेदारों से मिलकर बने गठबंधन बस यही दर्शाते हैं कि भारतीय राजनीति दशकों पहले तय नियम-कायदों से आगे किस तरह विकसित हो रही है. बिहार में दो नेताओं—नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव का साथ आना इसी की बानगी है. तो आम आदमी पार्टी का परिपक्व होना भी, जिसने राष्ट्रीय पार्टी का प्रमाणपत्र हासिल किया.

कॉमेडियन से शुरुआत करने वाले भगवंत मान एक किस्म का इतिहास रचते हुए पंजाब में आप के मुख्यमंत्री बने. तो ब्रिटेन के एशियाई मूल के पहले प्रधानमंत्री बनकर ऋषि सुनक ने भी एक किस्म का इतिहास रचा, वह भी ऐसे घटनाक्रम में जिसकी दो दशक पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी.

यह साल किस्म-किस्म के किरदारों से मिलकर भी बना था. सुकेश चंद्रशेखर ने अपनी सयानी झांसापट्टियों से हमें हतप्रभ कर दिया, तो क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव क्रिकेट के दीवाने हमारे देश के नए हीरो थे. दक्षिण भारतीय सिनेमा को प्रांतीय माना जाता था, कुछ ऐसा जो केवल उन लोगों का है जो ऐसी भाषा बोलते हैं जो दूसरे नहीं समझते.

इसने ताकतवर बॉलीवुड को बॉक्स ऑफिस पर चारों खाने चित कर दिया और वैश्विक हो गया, जहां वह तमाम पंडितों की वाहवाही बटोर रहा है. आरआरआर सरीखी फिल्मों की कामयाबी ने हम सबको गर्व से भर दिया. इस अंक में आपको और भी कई न्यूजमेकर मिलेंगे जिन्होंने एक या दूसरे किस्म का फर्क पैदा किया. यह सब बताता है कि भारत ठहरी हुई परंपरा नहीं बल्कि विकसित होती सच्चाई है.

तो इन्हीं लोगों और घटनाओं ने 2022 को भले ही उथल-पुथल भरा पर रोमांचक साल बनाने में योगदान दिया. फिर चीता था जो 70 साल बाद भारत लौटा—सीधे अफ्रीका से. उनके लिए संभावनाओं से भरी नई शुरुआत, और आप सबको 2023 में नई और अच्छी शुरुआत की हार्दिक शुभकामनाएं.       

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