मिशन के ब्यौरे
पूरा नाम: एलवीएम3-एम2/वनवेब इंडिया-1 मिशन
रॉकेट: लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (या एलवीएम-3)
लॉन्च सेंटर: सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश
समय: रात 12.07 बजे, 23 दिसंबर
स्थिति: सफल
36 उपग्रह कक्षा में छोड़े गए
19 मिनट लगे रॉकेट को निर्धारित कक्षा में पहुंचने में
5,796 किलोग्राम उपग्रहों का कुल वजन
75 मिनट लगे सभी उपग्रहों के प्रक्षेपण और कक्षा में स्थापित करने में*
1,000 करोड़ रुपए वनवेब ने 72 उपग्रह छोड़ने के लिए इसरो को अदा किए; जिनमें 36 उपग्रह 2023 में तय अगले मिशन में लॉन्च किए जाएंगे
* इसरो को सभी उपग्रहों को 601 किमी की कक्षा में सटीक प्रक्षेपण इस तरह करना होगा कि दो उपग्रहों के बीच 137 मीटर की न्यूनतम दूरी बनी रहे
पहली बार
पहला व्यावसायिक लॉन्च एलवीएम-3 के जरिए
पहला एलवीएम-3 से अनेक उपग्रह प्रक्षेपण मिशन पृथ्वी की निचली कक्षा (601 किमी) में
पहला भारतीय लॉन्च करीब 6,000 किलो पेलोड के साथ
पहला वनवेब मिशन एनएसआइएल* के साथ
*ब्रिटेन स्थित वनवेब की योजना अंतरिक्ष के जरिए वैश्विक संचार नेटवर्क मुहैया कराने के लिए 648 उपग्रह इंटरनेट तैयार करने की है (यह उसका 14वां लॉन्च है); न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआइएल) इसरो की व्यावसायिक शाखा है और वह अंतरिक्ष विभाग के प्रशासकीय नियंत्रण के तहत है
रॉकेट
जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) मार्क-3 को शुरू में जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में 4,000 किलो के उपग्रह के प्रक्षेपण के लिए तैयार किया गया था
इसरो ने इसे नया नाम एलवीएम-3 दिया है, ताकि उसकी पहचान विभिन्न कक्षा में उपग्रह प्रक्षेपण की बन सके; पृथ्वी की निचली कक्षा में लॉन्च केलिए 10,000 किलो वजन ले जा सके
यह तीन चरण का रॉकेट है, जिसमें दो ठोस मोटर स्ट्रैप-ऑन, एक तरल प्रोपेलेंट मूल चरण, और एक क्रायोजेनिक चरण होता है
यह उसका पांचवां सफल मिशन है, पहली कक्षा उड़ान 2017 में हुई थी, तब भारत का संचार उपग्रह जीएसएटी-19 लॉन्च किया गया था
बाद में इसे 2019 में चांद मिशन के लिए चंद्रयान-2 के लॉन्चलिए इस्तेमाल में लाया गया; जो रॉकेट की पहली अभियानगत उड़ान थी
यह गगनयान के प्रक्षेपण में भी इस्तेमाल में लाया जाएगा, जो 2024 में तय भारत का पहला क्रू मिशन होगा
बाजार
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 2025 तक 12.8 अरब डॉलर तक बढ़ सकती है (2020 में 9.6 अरब डॉलर); लॉन्च सेवा वर्ग में 1 अरब डॉलर का अनुमान (60 करोड़ डॉलर से)*
इसरो के चेयरमैन एस. सोमनाथ के मुताबिक, बहु उपग्रह मिशन के लिए लॉन्च व्हीकल की वैश्विक मांग में इजाफा हो रहा है
उनके मुताबिक, रूसी रॉकेट पर अब तवज्जो नहीं दिया जाता, जबकि चीन के रॉकेटों की व्यावसायिक क्षमता की मान्यता पश्चिम में नहीं है
द एरियन 6 में अभी देरी है, जिसे यूरोपीयन स्पेस एजेंसी के लिए एरियनग्रुप विकसित कर रहा है
इन सभी वजहों से भारत के लिए इस विशेष वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में मौके खुल गए हैं, जिसे 6 अरब डॉलर का आंका जाता है
वनवेब के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल कहते हैं कि आने वाले वर्ष में करीब 12-13 लॉन्च की जरूरत होगी, उम्मीद है कि कुछ इसरो को मिल जाएंगे
*स्रोत: इंडियन स्पेस एसोसिएशन, और अनर्स्ट ऐंड यंग रिपोर्ट

