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अनुभवी जनरल

सीमाओं के लिए जिम्मेदार चीनी सेना की एकल थिएटर कमान के मुकाबले चीन के मोर्चे का प्रबंधन करने के लिए भारतीय सेना के पास आठ कमान हैं. तजुर्बे के दम पर नए सीडीएस अपना लक्ष्य हासिल कर लेंगे

पथ प्रदर्शक जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
पथ प्रदर्शक जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
अपडेटेड 18 अक्टूबर , 2022

भारतीय सशस्त्र बलों को आखिरकार शीर्ष कमांडर मिल गया. शुक्रवार, 30 सितंबर को जनरल अनिल चौहान ने सादे से समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) का पदभार संभाल लिया. कम बोलने वाले 61 वर्षीय जनरल चौहान ने अब तक अपने सैन्य रिकॉर्ड को ही अपने लिए बोलने दिया है. सैन्य अभियानों के महानिदेशक (डीजीएमओ) के तौर पर उन्होंने 2019 में पाकिस्तान के काफी अंदर आतंकी शिविर पर बालाकोट हवाई हमले की देखरेख की थी. वहीं, 2020 में जब चीन ने भारत के पूर्वी सीमा पर पांव पसारना शुरू किया था तो पूर्वी सेना कमांडर के रूप में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी.

असल में, सीडीएस का यह शीर्ष पद भारतीय सशस्त्र बलों की लड़ाकू क्षमताओं के समग्र एकीकरण और समन्वय में सुधार के लिए बनाया गया है. लेकिन, भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की दिसंबर 2021 में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद से यह पद 10 महीने से खाली था. जनरल चौहान की देश के दूसरे सीडीएस के तौर पर नियुक्ति के साथ भारतीय सैन्य इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि कोई सेवानिवृत्त थ्री-स्टार जनरल फोर-स्टार जनरल के रूप में सक्रिय सेवा में वापस लौटा है.

सरकार ने जब जून में सेवा नियमों में फेरबदल करते हुए सेवानिवृत्त अफसरों को सीडीएस नियुक्त करने का रास्ता साफ किया था तो सैन्य हलकों में जनरल चौहान की चर्चा संभावित दावेदार के रूप में थी. जनरल चौहान अपने 40 साल के शानदार करियर के बाद मई 2021 में सेवानिवृत्त हुए थे. उसके बाद भी वे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ काम कर रहे थे.

चीन मामलों के विशेषज्ञ जनरल चौहान सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) के सचिव के रूप में भी काम करेंगे. इससे इन अटकलों पर विराम लग गया है कि सरकार इन दोनों पदों को विभाजित करने की योजना बना रही है. वे स्टाफ कमेटी के प्रमुखों के स्थायी चेयरमैन और प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले परमाणु कमान प्राधिकरण के सैन्य सलाहकार भी होंगे. असल में, वे खरीद समेत तीनों सेवाओं के लिए, पूंजी अधिग्रहण छोड़कर, सभी सैन्य मामलों के लिए जिम्मेदार होंगे.

रक्षा बलों के थिएटराइजेशन यानी उनकी क्षमताओं के समन्वय को बेहतर करने का काम पूरा करना उनकी बड़ी चुनौतियों में से है. इसमें थिएटर कमानों का गठन किया जाएगा. भारतीय सेना अभी 17 एकल-सेवा कमान के तहत काम करती है. भारत के साथ वाली सीमाओं के लिए जिम्मेदार चीनी सेना की एकल थिएटर कमान के मुकाबले चीन के मोर्चे का प्रबंधन करने के लिए भारतीय सेना के पास आठ कमान हैं. तजुर्बे के दम पर नए सीडीएस अपना लक्ष्य हासिल कर लेंगे.

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