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चिपकू बम: आतंक का नया हथियार

आतंकियों की ओर से आसान स्टिकी बम का संभावित इस्तेमाल अमरनाथ तीर्थयात्रियों के लिए नया खतरा बनकर उभरा है

बदलते निशाने : कठुआ के तलिया हरिया चक में 29 मई को मार गिराया गया हेक्साकॉप्टर (बाएं ऊपर), बरामद किए गए स्टिकी बम (दाएं नीचे) और यूबीजीएल
बदलते निशाने : कठुआ के तलिया हरिया चक में 29 मई को मार गिराया गया हेक्साकॉप्टर (बाएं ऊपर), बरामद किए गए स्टिकी बम (दाएं नीचे) और यूबीजीएल
अपडेटेड 4 जुलाई , 2022

अगस्त 2021 में अमेरिका के अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाने से काफी पहले से ही, तालिबान विद्रोही इस छापामार रणनीति का इस्तेमाल अमेरिकी फौज की जमीनी ताकत को छिन्न-भिन्न करने और हिंसक घटनाओं को अंजाम देने के लिए कर रहे थे. वह भी एक साधारण उपकरण से: छोटे स्टिकी बमों को वे दुश्मन की गाड़ियों पर लगाकर धमाके करते थे. उस सफलता से उत्साहित होकर कश्मीर के उग्रवाद में भी इस नए हथियार का प्रवेश हो गया है.

14 फरवरी को एलओसी पर सांबा में ड्रोन की एक खेप बरामद होने के बाद सुरक्षाबल इस नए खतरे को लेकर सतर्क हैं. सस्ता और ले जाने में आसान स्टिकी बम, एक छोटे से बक्से में आरडीएक्स या टीएनटी को भरकर तैयार होता है. लक्ष्य से चिपकने में सक्षम बनाने के लिए इसमें चुंबक लगा होता है और एक टाइमर की मदद से दूर से ही इसमें विस्फोट किया जा सकता है. सुरक्षा एजेंसियां आशंकित हैं क्योंकि इससे घाटी में संघर्ष के तौर-तरीके बदल सकते हैं. खासकर इसलिए कि इन आइईडी को लगाने के लिए किसी विशेष प्रशिक्षण की जरूरत नहीं होती. जम्मू के एडीजीपी मुकेश सिंह कहते हैं, ''इसमें विस्फोट कराने के लिए बस दो खुले तारों को जोड़ने भर की जरूरत पड़ती है.'' इसलिए, 13 मई जैसे विस्फोट करने के लिए आतंकियों को विशेष ट्रेनिंग की जरूरत ही नहीं होगी. 13 मई को वैष्णो देवी जा रही तीर्थयात्रियों से भरी एक बस के ईंधन टैंक में बम चिपका दिया गया था. उस विस्फोट में चार लोग मारे गए थे और लगभग दो दर्जन घायल हो गए थे.

ऐसा नहीं है कि इससे पहले भारत, स्टिकी बम से अनजान था. फरवरी 2012 में नई दिल्ली में एक कार पर स्टिकी बम लगाकर हमला हुआ था जिसमें इज्राएली राजनयिक की पत्नी घायल हो गई थीं. पर अब इसे युद्ध के एक नए मैदान कश्मीर में बड़े जमीनी खतरे के रूप में महसूस किया जा रहा है. 9 मार्च को जम्मू के उधमपुर के बाजार में हुए हमले में, एक व्यक्ति की मौत हो गई और 16 लोग घायल हो गए. रामबन जिले के हल्ला बोहर धार के कथित अपराधी मोहम्मद रमजान सोहिल को पकड़ने में जम्मू-कश्मीर पुलिस को ढाई महीने लग गए. उसने पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकवादी मोहम्मद अमीन 'खुबैब' के निर्देश पर स्टिकी बम से विस्फोट किया था. एडीजीपी मुकेश सिंह का कहना है कि मोटला डेसा के खुर्शीद अहमद और भदेरवाह के निसार अहमद खान से दो और मैग्नेट बम बरामद किए गए.

29 मई को, सात स्टिकी बम और एक यूबीजीएल (अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) से लदे एक उत्तर कोरियाई हेक्साकॉप्टर को कठुआ में मार गिराया गया. इसे 30 जून से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा से पहले सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा गया. पर एक शीर्ष पुलिस अधिकारी का कहना है कि यह ''एक नमूना मात्र'' है. हथियारों की ऐसी कई खेपें आतंकवादियों तक पहुंच चुकी हैं. सुरक्षाबल सबसे ज्यादा स्टिकी बम को लेकर चिंतित हैं. मुकेश सिंह का कहना है कि पुलिस ने ''एसओपी बनाने और नए खतरे का मुकाबला करने के लिए गहन निगरानी'' सहित कई जरूरी उपाय किए हैं.

लेकिन 43 दिवसीय अमरनाथ यात्रा जो महामारी के कारण दो साल के अंतराल के बाद इस साल फिर से शुरू हो रही है, खासकर एक आतंकवादी समूह द्वारा ''खून-खराबे'' की चेतावनी के बाद थोड़ी घबराहट पैदा कर रही है. एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि इस बार पांच लाख से अधिक तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है और उनकी यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए रणनीति में काफी बदलाव किया गया है. जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने यातायात के विशेष नियमों और ड्रोन तथा सीसीटीवी से कड़ी निगरानी के निर्देश दिए हैं.

बेशक, इन सबके पीछे एक वजह है. रक्षा विशेषज्ञ और पूर्व सैनिक प्रवीण साहनी कहते हैं, ''भारत ने धारा 370 को रद्द करके सीमा रेखा लांघी और चीजें बदल गईं. चीन और पाकिस्तान ने घाटी कि परिस्थितियों पर नजरें जमा रखी हैं और लोगों के गुस्से का इस्तेमाल रणनीतिक उद्देश्यों के लिए कर रहे हैं.''

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