
इस साल 24 जुलाई 2022 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल खत्म हो रहा है. उनका उत्तराधिकारी चुनने का समय अब आ गया है. परंपरा के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति के पद के चुनाव की अधिसूचना मध्य-जून में जारी होने के साथ जुलाई में मतदान शुरू हो जाता है. मध्य-जुलाई तक राज्यसभा के 66 सदस्य रिटायर हो रहे हैं. इन पदों को पूरे साल चलने वाले मतदान के जरिए भरा जाएगा. 13 सदस्य 31 मार्च को चुने जाएंगे.
हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा के शानदार प्रदर्शन ने पार्टी को राष्ट्रपति चुनाव के लिए मजबूत स्थिति में ला दिया है. उसके पास 4,65,797 वोटों की ताकत है और एनडीए के उसके सहयोगियों के पास 71,329 वोट और हैं.
निर्वाचक मंडल में 10,98,903 वोट हैं और भाजपा को बहुमत के लिए 5,49,452 वोटों की जरूरत है. जम्मू-कश्मीर विधानसभा निलंबित होने और 6,264 वोट मूल्य की 87 सीटें न होने से बहुमत का निशान 3,132 वोट नीचे आ जाएगा.
यानी भाजपा के पास अब भी 9,194 वोट कम हैं और अपना उम्मीदवार जिताने के लिए उसे नए साथियों की जरूरत है, जो वह नवीन पटनायक की अगुआई वाले बीजेडी या वाइ.एस. जगन मोहन रेड्डी की वाइएसआरसीपी सरीखे संभावित मित्रों से पा सकती है.
पार्टी पिछली बार आरएसएस के साथ मिलकर दलित नेता कोविंद को राष्ट्रपति भवन पहुंचाने में सफल रही थी. इस बार वह या तो साधनहीन या भौगोलिक रूप से कम प्रतिनिधित्व वाले समुदाय के राजनेता को शीर्ष संवैधानिक पद के लिए चुनना चाहती है.


