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पंजाबः नया सीएम पुरानी परेशानियां

मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप ने पंजाब की राजनैतिक जंजीरें तो तोड़ दीं, क्या राज्य की जनता और अर्थव्यवस्था की बेड़ियां भी वे काट पाएंगे?

नए दौर का आगाज आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान 16 मार्च को अपने शपथग्रहण समारोह के दौरान
नए दौर का आगाज आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान 16 मार्च को अपने शपथग्रहण समारोह के दौरान
अपडेटेड 22 मार्च , 2022

जब से आम आदमी पार्टी (आप) को पंजाब विधानसभा चुनावों में शानदार जीत मिली है, सोशल मीडिया पर नए मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुराने वीडियो की बाढ़ आ गई है. उनमें उन्होंने सियासतदानों, अफसरशाहों और पुलिस पर तीखा तंज कसा है. कॉमेडियन से राजनीतिक बने मान सियासी हास्य-व्यंग्य की कला के उस्ताद हैं. मान ने इसी भाषण कला से 2014 से लोकसभा में अपनी अलग पहचान बनाई. अब वे मुख्यमंत्री हैं, तो स्थिति बदल गई है. सरकार चलाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है तथा वे खुद व्यंग्य ही नहीं, बल्कि बहुत कुछ के निशाने पर होंगे.

आप उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति को लेकर उलझन में है. शायद मंत्रिमंडल के गठन में इसी वजह से देरी हो रही है. सूत्रों के मुताबिक, मान उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति नहीं चाहते, पर आप एक ओबीसी सिख, एक दलित और एक सवर्ण हिंदू को उपमुख्यमंत्री बनाने पर विचार कर रही है. पंजाब मंत्रिमंडल में अधिकतम 17 मंत्री बन सकते हैं.

मान को आगे की भारी-भरकम चुनौतियों का भान है. जीत के बाद उन्होंने कहा कि उनके विधायकों को ''महीने और साल नहीं बल्कि दिनों की गिनती करते हुए'' काम करना होगा. सबसे बड़ी चुनौती राज्य का खाली होता खजाना है. इस वित्त वर्ष का राजस्व प्राप्ति लक्ष्य 95,257 करोड़ रुपए है, पर बीते कई वर्षों से पंजाब को 15-20 फीसद तक कम उगाही की बुरी आदत पड़ गई है. राज्य ने पहले ही 2.82 लाख करोड़ रुपए का कुल कर्ज बताया है, जिसमें 1 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि बीते पांच साल में हुई. मान की परेशानियां तब और बढ़ जाएंगी जब जून के बाद केंद्र जीएसटी की क्षतिपूर्ति (सालाना करीब 15,000 करोड़ रुपए) देने को बाध्य नहीं होगा. अलबत्ता 2021-22 में पंजाब का जीएसटी संग्रह 15,109 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा था.

अगली चुनौती चुनावी वादों को पूरा करना है. इसमें हर घर को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, 18 साल से बड़ी हर महिला को 1,000 रुपए देना और बुजुर्गों की पेंशन बढ़ाकर हर माह 2,500 रुपए करना शामिल है. आप ने 6,000 मोहल्ला क्लिनिक बनाने और संपत्ति कर खत्म करने का वादा भी किया है. पंजाब खेतों की सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली, महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा और कई अन्य खैरातें पहले से दे रहा है. पंजाब सरकार के एक शीर्ष अफसर ने कहा कि राज्य में राजस्व बढ़ाने के रास्ते हैं, ''पर इसके लिए राजकाज और अनुपालन में सुधार लाना होगा...और लूट-खसोट रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे.''

तात्कालिक काम

मान के लिए पहली चुनौती अगले महीने शुरू हो रही गेहूं की सुचारु खरीद पक्का करना है. पीयूष गोयल की अगुआई वाले केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने पंजाब से 1.31 करोड़ टन गेहूं की ही खरीद करने को कहा है, जबकि राज्य की एजेंसियों ने 1.35 करोड़ टन खरीद की योजना बनाई है. राज्य के अफसर इसके लिए 29,500 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) रिलीज करवाने के लिए लॉबीइंग कर रहे हैं.

मान को गोयल के साथ मिलकर अधिकतम खरीद सुनिश्चित करनी होगी. राज्य की नाकारा खरीद व्यवस्था को लेकर भी चिंता है. पंजाब पिछले खरीफ सीजन में अनाज खरीद का सीधा भुगतान किसानों के खाते में करने वाला देश का आखिरी राज्य था. गोयल के मंत्रालय के लगाम कसने के बाद राज्य की एजेंसियां अब बैंक खातों को डिजिटल लैंड रिकॉर्ड से जोड़ने में जुटी हैं. केंद्र रबी (गेहूं) और खरीफ (धान) के सीजन में पंजाब से 60,000 करोड़ रुपए का अनाज खरीदता है. राज्य और केंद्र के बीच टकराव का एक मुद्दा ग्रामीण विकास निधि (आरडीएफ) भी है, जिसमें फसल के एमएसपी पर 3 फीसद की दर से 1,100 करोड़ रुपए मिलते हैं. वैसे खेती विरासत मंच के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर उमेंद्र दत्त कहते हैं कि मान का असल ध्यान खेती के ही कायापलट पर होना चाहिए. वे कहते हैं, ''पंजाब मिट्टी, भूमिगत जल और हवा के प्रदूषण से जूझ रहा है. एकमात्र हल यह है कि फसलों में विविधता लाएं और ज्यादा जैविक फसलें उगाएं.''

मान ने फसलों में विविधता लाने का वादा करते हुए कहा है कि सरकार पैदावार की खरीद इस तरह करेगी कि ज्यादा से ज्यादा किसान गेहूं और धान के चक्र से बाहर निकलने के लिए प्रोत्साहित हों. शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल सरीखे उनके प्रतिद्वंद्वियों का कहना है कि जब नकदी की पहले ही तंगी है, पैदावार की खरीद कारगर विकल्प नहीं है. मान को दूसरा समाधान ढूंढना होगा. उधर उद्योग फिक्रमंद हैं कि अतिरिक्त उपकर (सेस) या शुल्क कोविड के असर से बाहर आते उद्योगों को फिर पटरी से उतार देंगे. हालिया किसान आंदोलन से मची अफरा-तफरी से निजी निवेशक पहले ही घबराए हुए हैं. मान को उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कारोबार करने में आसानी के मामले में पंजाब की क्षमताओं के बारे में नए सिरे से भरोसा दिलाना होगा.

मान को पता है कि नौकरियों का सृजन करके ही नशे की महामारी, संगठित अपराधों में वृद्धि जैसी बुराइयों पर लगाम कसी जा सकती है. राज्य की 9 फीसद बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत (7.5 फीसद) से बहुत ज्यादा नहीं है, पर इस संवेदनशील सरहदी राज्य में नौजवानों में बढ़ता असंतोष चिंता की बात है.

पैसे का इंतजाम

तो क्या मान शहरी काम-धंधों को संकट में डाले बिना राजस्व बढ़ा सकते हैं? निवर्तमान वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने प्रोफेशनल टैक्स की सीमा सालाना 2,500 रुपए से बढ़ाकर 12,000 रुपए करने के लिए केंद्र से अनुच्छेद 276(2) में संशोधन करने के लिए कहा था. पंजाब पहले ही राज्य के सभी आयकर दाताओं से हर माह 200 रुपए वसूलता है. केजरीवाल सरकार दिल्ली में भी यही वसूली करती है और जाहिरा तौर पर सीमा में छूट की समर्थक भी है. एक पूर्व शीर्ष अफसरशाह कहते हैं कि अगर शराब, रेत की खुदाई, परिवहन और केबल टीवी से जुड़ी नीतियां पारदर्शी ढंग से लागू की जाएं और कड़ाई से उनका पालन करवाया जाए, तो अतिरिक्त राजस्व पक्का किया जा सकता है. जमीन का विकास और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) का मौद्रिकीकरण अन्य विकल्प हैं.

वहीं, केंद्र के साथ कुछ टकराव भी होंगे. बांधों का नियंत्रण फिर पाना (बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 ने राज्यों की भूमिका कम कर दी), भाखड़ा व्यास प्रबंधन बोर्ड से जुड़ा विवाद और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ का पंजाब को हस्तांतरण जैसे मुद्दे पहले ही तैयार हैं. मान सरकार को कुछ मुद्दों पर दिल्ली की आप सरकार के विरुद्ध भी होना होगा. इनमें सतलज यमुना लिंक नहर का निर्माण, नदी जल बंटवारे की देय रकम और वायु प्रदूषण शामिल हैं. उन्हें आप में केजरीवाल से सत्ता संतुलन भी साधना होगा. पंजाब यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान पढ़ाने वाले आशुतोष कुमार कहते हैं, ''वे दिल्ली की पढ़ाई पट्टी पर चलने वाले नेता की छवि गवारा नहीं कर सकते.''

पंथिक उलझन

मान के लिए सियासी रूप से सबसे तकलीफदेह चुनौती 2015 में फरीदकोट में हुई धार्मिक बेअदबी की कथित घटनाओं से घिरे विवादों और कानूनी मामलों का हल निकालना है. मौजूदा विधानसभा में आप के पास 'पंथिक' (एसजीपीसी से जुड़े सिख) नुमाइंदे किसी भी अन्य पार्टी से ज्यादा हैं. इससे आप को तीव्र धार्मिक भावनाओं से जुड़े अनसुलझे मुद्दे सुलझाने के लिए अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ सकता है. इनमें देविंदर पाल सिंह भुल्लर जैसे सिख आतंकी की रिहाई का मामला भी है, जो 1993 के दिल्ली बम विस्फोट मामले में सजा काट रहा है. उसकी मौत की सजा मार्च 2014 में उम्रकैद में बदल दी गई थी. उसकी रिहाई का फैसला दिल्ली के दंड समीक्षा बोर्ड को लेना है जिसकी कमान आप के मंत्री सत्येंद्र जैन के हाथ में है.

मान को पंथिक मुद्दों पर बहुत संभलकर चलना होगा. सिमरनजीत सिंह मान के शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) सहित खालिस्तान समर्थक धड़ों ने इस चुनाव में 5 फीसद से ज्यादा वोट हासिल किए. इन संगठनों से लोकतांत्रिक तरीकों से निपटते हुए मान को पक्का करना होगा कि हथियारों की तस्करी और चुनकर की जाने वाली हत्या पर लगाम लगी रहे. इंग्लैंड में रहने वाले कबड्डी खिलाड़ी संदीप सिंह नांगल की 14 मार्च को पंजाब के नकोदर के नजदीक हत्या कर दी गई. इस हत्या के पीछे खालिस्तान समर्थक धड़ों के होने का संदेह है.

पंजाब में आप के सामने देश भर में भाजपा का स्वाभाविक विपक्ष बनने का अपना सपना पूरा करने का बड़ा अवसर है. अब यह कोई चूक गवारा नहीं कर सकती.

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