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उत्तर प्रदेशः दुश्मन का दुश्मन दोस्त

राजा भैया के नाम से मशहूर रघुराज 1993 से कुंडा से विधायक हैं और बगल की बाबागंज सुरक्षित सीट पर भी उनका ही उम्मीदवार कई चुनाव से जीत रहा है.

राजा भैया
राजा भैया
अपडेटेड 18 फ़रवरी , 2022

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में भाजपा अपने गठबंधन से बाहर के भी एक पार्टी के विधायकों को लेकर आश्वस्त दिख रही है. ये हैं रघुराज प्रताप सिंह की पार्टी जनसत्ता दल के विधायक. राजा भैया के नाम से मशहूर रघुराज 1993 से कुंडा से विधायक हैं और बगल की बाबागंज सुरक्षित सीट पर भी उनका ही उम्मीदवार कई चुनाव से जीत रहा है.

बसपा से पुराने बैर और अब अखिलेश यादव से अदावत के बाद उनके सियासी विकल्प नहीं बचे. कहा जा रहा है कि राजा भैया ने भाजपा से गठजोड़ की भी कोशिश की, पर एक खेमे ने दलितों में सही संदेश नहीं जाने का हवाला देकर उनकी एंट्री पर रोक लगवा दिया. पर राजा भैया ने योगी का समर्थन वाला संदेश देकर भविष्य के संकेत दे दिए. प्रतापगढ़ में सपा के खिलाफ वर्चस्व की जंग में उन्हें भाजपा के साथ की जरूरत भी तो है.

उत्तर प्रदेश
दुआ, सलाम या चुनावी दांव?

फरवरी की 3 तारीख को पश्चिमी यूपी के बुलंदशहर में गंगा-जमुनी तहजीब का नजारा दिखा, जब प्रियंका गांधी का कारवां और अखिलेश यादव तथा जयंत चौधरी का रथ अपने चुनाव अभियान के दौरान पास से गुजरा. इन सियासी विरोधियों—कांग्रेस की यूपी प्रभारी महासचिव प्रियंका, और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश तथा राष्ट्रीय लोकदल के जयंत—के बीच मुस्कुराहटों का आदान-प्रदान हुआ और इन्होंने एक-दूसरे का अभिवादन किया.

यह सौहार्द सोशल मीडिया पर भी फैला जब अखिलेश ने एक तस्वीर ट्विटर पर साझा की और लिखा, 'एक दुआ सलाम, तहजीब के नाम.’ प्रियंका ने इसके जवाब में फोटो पोस्ट किया और चुटीला कैप्शन लिखा 'हमारी भी आपको राम राम’ और इसमें अखिलेश और जयंत दोनों को टैग किया.

सियासी रणनीतिकारों का मानना है कि यह महज राह चलते मिल जाने का मामला नहीं है. दोनों ही पक्ष एक-दूसरे के कारवां के बारे में जानते थे. वे रुके क्योंकि रुकना चाहते थे. यह विपक्षी एकता का प्रदर्शन था और यह कांग्रेस के उस कदम में भी दिखता है कि पार्टी ने अखिलेश और शिवपाल यादव के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा किया है. क्या यह चुनाव-बाद साझेदारी की तैयारी है?

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