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कृषि पर हल्का हाथ

कृषि आय दोगुनी करने की अब कोई चर्चा नहीं, हरित खेती पर जोर देना अच्छी बात है, लेकिन भविष्य के स्पष्ट रोडमैप के बगैर इस क्षेत्र को रियायतें जारी रहेंगी.

उर्वर भूमि अमृतसर में सरसों का खेत
उर्वर भूमि अमृतसर में सरसों का खेत
अपडेटेड 17 फ़रवरी , 2022

कृषि/ उर्वर भूमि

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी कृषि सुधारों को कानून वापसी के साथ पीछे हटना पड़ा, तो हर किसी को उक्वमीद थी कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस दिशा में बजट के जरिए नई कोशिश करेंगी. बहरहाल, वित्त मंत्री के बजट भाषण में कृषि में सुधार के लिए तकनीक के प्रयोग की चर्चा थी, जिसमें ड्रोन का इस्तेमाल और रसायनमुक्त खेती को बढ़ावा दिया जाना शामिल था और खास जोर गंगा के साथ लगे पांच किलोमीटर के दायरे के गलियारों पर था—लेकिन, उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने की बात को दोहराया नहीं.

हालांकि, बजट के कृषि प्रस्ताव बेहतर लग सकते हैं, लेकिन उनका असर देश के 20 करोड़ किसानों में से एक फीसद से भी कम पर पडऩे वाला है. दूसरी बात, किसानों की मदद के लिए बनीं सरकारी एजेंसियों में संस्थागत सुधारों की कमी के कारण पहले से ही जैविक और प्राकृतिक खेती का उपयोग करने वाले किसान अभी भी संघर्ष कर रहे हैं. खेती विरासत मंच के कार्यकारी निदेशक उमेंद्र दत्त कहते हैं, ''इन घोषणाओं के पीछे नीयत अच्छी है लेकिन संस्थाओं को किसानों, वैज्ञानिकों, कार्यकर्ताओं और अन्य संबंधित हितधारकों के बीच संवाद विकसित करना चाहिए.’’

अपने बजट भाषण में, वित्त मंत्री सीतारमण ने कुल खर्च का 3.1 फीसद हिस्सा—1.24 लाख करोड़ रुपए—कृषि और किसान कल्याण विभाग को आवंटित किया है. इनमें तीन योजनाओं की लागत करीब 1.03 लाख करोड़ रुपए है—पीएम किसान (करीब 68,000 करोड़ रुपए), अल्पकालिक ऋणों पर ब्याज की मदद (करीब 19,500 करोड़ रुपए) और फसल बीमा (15,500 करोड़ रुपए) है.

सीतारमण ने राज्य सरकारों को कृषि विश्वविद्यालयों को प्राकृतिक जीरो-बजट और ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए पाठ्यक्रमों में सुधार करने को भी कहा है. परंपरागत कृषि विकास योजना को, जिसका मकसद ऑर्गेनिक किसानों को मदद उपलब्ध कराना है, इस साल अधिक बजट नहीं मिल पाया है, फिर भी वित्त मंत्री ने करीब 198 करोड़ रुपए पूर्वोत्तर भारत में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आवंटित किए हैं.

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, बजट निजी निवेश के लिए कोई रोडमैप नहीं पेश करता. कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड में भी कटौती की गई है, जिसका मकसद खेती से जुड़े बुनियादी ढांचे का विकास था. साल 2021-22 में, केंद्र ने इस मद में 900 करोड़ रु. का आवंटन किया था और 2022-23 में सीतारमण ने इसके लिए 500 करोड़ रुपए ही दिए हैं.

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के आवंटन में 422 फीसद का इजाफा हुआ है और इसे 2,000 करोड़ रु. से बढ़ाकर 10,433 करोड़ रुपए कर दिया गया है. यह योजना राज्य सरकारों को इस बात की आजादी देती है कि वे इस योजना के तहत वृहत आवंटनों में अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकें और इससे राज्य सरकारें स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर बदलाव कर सकती हैं. हाल के वर्षों में केंद्र इस योजना में आवंटन कम कर रहा था, लेकिन इस साल मामला उलट गया. 

इसी तरह, 7,183 करोड़ रुपए के बजट के साथ कृषि उन्नति योजना को फिर से शुरू किया गया है. साल 2016-17 में, इसमें 7,580 करोड़ रुपए के बजट के साथ 10 योजनाएं शामिल थीं. इस साल के बजट में इसमें 10 अलग योजनाओं को शामिल किया गया है. वनस्पति तेलों के घरेलू उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के मकसद से इस फंड का करीब 21 फीसद हिस्सा पाम, तिलहन और खाद्य तेलों के लिए रखा गया है.

3.1 %
हिस्सा कुल बजट का, कृषि को आवंटित किया गया है
422 %
वृद्धि हुई है राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के आंवटन में.

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