
इकत्तीस हजार स्कूली शिक्षकों की भर्ती के लिए पिछले साल सितंबर में आयोजित राजस्थान पात्रता प्रवेश परीक्षा (रीट) में घोटाले के कारण—जिसमें परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होने का मामला शामिल है—अशोक गहलोत सरकार बुरी तरह से घिर गई है. राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) की जांच के बाद पिछले हफ्ते इस सिलसिले में राजीव गांधी स्टडी सर्कल (आरजीएससी) के कई सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं या शक के घेरे में हैं. कांग्रेस समर्थित थिंक टैंक आरजीएससी के अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री गहलोत हैं. गहलोत के करीबी सहयोगी और उनकी सरकार में तकनीकी शिक्षा और आयुर्वेद राज्य मंत्री सुभाष गर्ग इस संगठन के राष्ट्रीय समन्वयक हैं.
रीट परीक्षा के लिए 26 लाख से अधिक लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें से 16 लाख परीक्षार्थियों ने 26 सितंबर, 2021 को परीक्षा दी थी. परीक्षा में घोटाले की बात परीक्षा के समय ही सामने आ गई थी जब एक प्रारंभिक सूचना में पुलिस को पता लगा था कि परीक्षा के दिन सवाई माधोपुर के कुछ परीक्षार्थियों ने प्रश्नपत्र का हल हासिल करने के लिए परीक्षा के दौरान ही कोटा में कुछ लोगों तक प्रश्नपत्र पहुंचा दिया था. गहलोत सरकार के लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि उसके ऊपरी स्तर पर के आरोप लग रहे हैं. परीक्षा में हुई गड़बड़ी में भी कथित तौर पर कुछ पुलिस अधिकारियों के परिजन शामिल थे. जांच शुरू होने से अब तक 38 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

बीती 20 जनवरी को एसओजी ने गुजरात में भजनलाल बिश्नोई नाम के एक व्यक्ति समेत कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया जिसके बाद परीक्षा घोटाले के बड़े पैमाने का होने के और सबूत सामने आए. इन संदिग्धों से हुई पूछताछ के बाद राजस्थान के पुलिस महानिदेशक एम.एल. लाठर का कहना है, ''ऐसा लगता है कि प्रश्नपत्र बेचने का पहला सौदा 5 करोड़ रुपए में हुआ था, जिसके बाद कई सौ अन्य लोगों को 15 लाख रुपए तक में उसे बेच दिया गया.'' इस बात का भी संदेह है कि गहलोत सरकार के मंत्रियों और प्रदेश कांग्रेस कमेटी में शामिल नेताओं और उनके सहयोगियों ने इस व्यापक घोटाले में मदद की और लाभान्वित हुए.
मुख्यमंत्री गहलोत व्यक्तिगत रूप से इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और इससे सरकार की प्रतिष्ठा पर आई आंच को कम करने का प्रयास कर रहे हैं. राज्य पुलिस की ओर से की गई गिरफ्तारियों का उन्होंने यह कहते हुए समर्थन किया है कि ''किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा.'' अपनी बात में वे जोड़ते हैं कि, ''मुझे एक बार इंडिया टुडे में यह कहते हुए उद्धृत किया गया था कि 'हर गलती सजा मांगती है.' अब रीट पेपर लीक के मामले में भी मैं उसी बात पर कायम हूं.'' गहलोत ने 30 जनवरी को आरजीएससी के सदस्य तथा राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष, डी.पी. जरोली को हटा दिया. इस बीच, गिरफ्तार लोगों की संख्या 38 तक पहुंचने के साथ ही गहलोत ने तीन अन्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया. सभी तरह की भर्ती प्रक्रिया की सुरक्षा में सुधार के लिए मुख्यमंत्री ने उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति वी.के. व्यास की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित की है. इसके अलावा उन्होंने घोषणा की है कि राज्य परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक करने जैसी भर्ती संबंधी धोखाधड़ी के लिए दंड को और सख्त किए जाने वाले कानून बनाए जाएंगे.
फिर भी, इन प्रयासों से जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ है. पुलिस जांच से लगातार हो रहे पर्दाफाश से मिल रही मदद के चलते विपक्षी नेताओं के हमले भी लगातार जारी हैं. इस प्रकरण में सरकार के घोर आलोचकों में शामिल रहे सांसद और भाजपा नेता किरोड़ी लाल मीणा की मांग है कि राजस्थान सरकार इस मामले की जांच सीबीआइ (केंद्रीय जांच ब्यूरो) को सौंपे. उनका कहना है कि रीट की पूरी प्रक्रिया पैसा बनाने की कवायद थी और इसके हर चरण में भ्रष्टाचार था—पेपर सेट करने और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करने से लेकर परिणामों में हेरफेर करने और प्रश्न पत्रों को लीक करने तक. उन्होंने विशेष रूप से परीक्षा के समय पीसीसी अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के साथ-साथ राज्यमंत्री सुभाष गर्ग को भी निशाना बनाया है. गहलोत ने 2020 में सचिन पायलट की जगह डोटासरा को पीसीसी प्रमुख बनाया था. गर्ग राष्ट्रीय लोक दल के विधायक हैं और सरकार में मंत्री होने के साथ ही गहलोत के करीबी माने जाते हैं.
मीणा ने डोटासरा पर अपने निर्वाचन क्षेत्र सीकर में एक कोचिंग संस्थान के माध्यम से पेपर लीक करने की व्यवस्था करने का भी आरोप लगाते हुए कहा कि उन्न्त संस्थान ने 2,000 प्रश्नों का वह प्रश्न बैंक बेचा था जिसमें से अंतिम रूप से प्रश्नपत्र बनाया गया था. उनका तर्क है कि सीबीआइ जांच ही कुछ कर सकेगी क्योंकि इसमें संवेदनशील पदों पर काबिज प्रमुख कांग्रेस नेता शामिल हैं. भाजपा विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी कहते हैं, ''बिना आग के धुआं नहीं उठता और रीट की आग में गहलोत सरकार को भारी नुक्सान हुआ है.''
जनवरी की 30 तारीख को मीणा ने विस्फोटक आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा था कि परीक्षा में धोखाधड़ी सुनिश्चित करने के लिए ही महत्वपूर्ण जिलों में आरजीएससी के नौ सदस्यों को रीट परीक्षाओं की 'निगरानी' की जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना गया था. उदाहरण के लिए, उनका कहना है कि जयपुर में आरजीएससी सदस्य प्रदीप पराशर को चुना गया था, जबकि पराशर के पास कोई अन्य आधिकारिक पद नहीं था. एक शैक्षणिक संस्थान चलाने वाले राम कृपाल मीणा को मौखिक आदेश पर उप-समन्वयक के रूप में चुना गया था. जांच शुरू होने के बाद से ही पराशर और राम कृपाल दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है. माना जाता है कि पराशर उस समूह का हिस्सा थे जो जयपुर में शिक्षा विभाग के स्ट्रांग रूम से विभिन्न जिलों में प्रश्नपत्रों के परिवहन का काम संभाल रहे थे. माना जा रहा है कि लीक हुआ प्रश्नपत्र उसी समय चोरी हो गया था. इस बात के भी सबूत हैं कि जब यह घटना हुई तो जरोली उस इमारत में मौजूद थे, हालांकि उन्होंने इससे इनकार किया है.
इन आरोपों के जवाब में डोटासरा ने कहा है कि एसओजी को अपनी जांच पूरी करने के लिए समय दिया जाना चाहिए. गर्ग का कहना है कि उन्हें निशाना बनाए जाने का कारण उनका तेजी से राजनैतिक उदय है. उन्होंने अपने ऊपर लग रहे आरोपों को वापस मीणा पर लगाने का प्रयास करते हुए सुझाव दिया कि एसओजी को इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि क्या मीणा खुद भी इसी तरह के अपराधों में शामिल गिरोहों से संबंध रखते हैं. इधर, मुख्यमंत्री गहलोत ने रीट के घोषित परिणाम रद्द करने और परीक्षा पुन: आयोजित किए जाने की मांगों को मानने से यह कहते हुए इनकार किया है कि ऐसा करना ईमानदारी से सफल हुए योग्य लोगों के प्रति अनुचित होगा. राज्य सीबीआइ जांच का भी विरोध कर रहा है, शायद इस डर से कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जांच का इस्तेमाल कांग्रेस के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार को शर्मिंदा करने के लिए करेगी.
लगता नहीं कि रीट घोटाले के नतीजों का असर जल्द ही दूर हो सकेगा. इसे अभी ही 2020 में पायलट के विद्रोह के समय की चुनौती के बराबर का संकट माना जा रहा है. संयोग से, पायलट खुद लंबे समय से गर्ग और डोटासरा दोनों का विरोध करते रहे हैं. लोगों का मानना था कि उनके कारण ही डोटासरा से मंत्री पद छिन गया था जबकि गर्ग को नवंबर में कैबिनेट विस्तार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं मिली. उन्होंने हाल ही में रीट मुद्दे पर चुप्पी तोड़ते हुए मामले की पारदर्शी जांच और व्यवस्था में लोगों का विश्वास बहाल करने के लिए दोषियों को दंडित करने की बात कही है.
विपक्ष को उम्मीद है कि वर्तमान में रीट परिणामों को रद्द करने और घोटाले की सीबीआइ जांच का आदेश देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा राजस्थान उच्च न्यायालय अंतत: सीबीआइ जांच का आदेश देने के लिए तैयार होगा. परिणाम जो भी हो, इस प्रकरण के कारण मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की आगे की राह पथरीली हो गई है.

