हस्तिनापुर/चुनावी हलचल
उत्तर प्रदेश (यूपी) में मेरठ जिले की हस्तिनापुर (सुरक्षित) और उत्तराखंड में गंगा के उद्गम क्षेत्र से जुड़ी गंगोत्री विधानसभा सीट से एक सियासी मिथक जुड़ा हुआ है. इन सीटों पर जिस पार्टी ने विधानसभा चुनाव जीता, राज्य में उसी पार्टी की सरकार भी बनी.
विभाजित उत्तर प्रदेश में गंगोत्री विधानसभा सीट उत्तरकाशी के नाम से जानी जाती थी. उत्तराखंड राज्य बनने के बाद गंगोत्री सीट अस्तित्व में आई. वर्ष 1952 से अब तक इस सीट पर नौ बार कांग्रेस, चार बार भाजपा, दो बार जनता पार्टी और एक बार समाजवादी पार्टी ने चुनाव जीता है.
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद यहां से वर्ष 2002 और 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस तथा वर्ष 2007 और 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की थी. इसी क्रम में इन पार्टियों ने उत्तराखंड में सरकार भी बनाई थी.
उधर, हस्तिनापुर सीट से जिस पार्टी का विधायक चुना जाता है यूपी में उसी पार्टी की सरकार भी बनती है. वर्ष 1957 में अस्तित्व में आई इस सीट पर 65 वर्षों के दौरान के हुए विधानसभा चुनाव के दौरान वर्ष 1996 में एक मौका ऐसा भी आया जब यहां से निर्दलीय उम्मीदवार विधायक चुना गया था.
हालांकि, बाद में वह विधायक सत्तारूढ़ दल भाजपा में शामिल हो गया था. मेरठ कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर मनोज सिवाच बताते हैं, ''वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में हस्तिनापुर सीट से सपा उम्मीदवार विजयी हुआ था लेकिन सरकार बसपा-भाजपा गठबंधन की बनी थी. यह सरकार ज्यादा दिन टिक नहीं पाई.
वर्ष 2003 में सपा की सरकार बनी थी. वर्ष 2007 में बसपा और वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा का उम्मीदवार जीता और इसी क्रम में क्रमश: बसपा और सपा की सरकार भी बनी. वर्ष 2017 में हस्तिनापुर से भाजपा के दिनेश खटीक ने चुनाव जीता और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी.’’
हस्तिनापुर से जुड़े इसी मिथक को देखते हुए सभी राजनैतिक दलों ने इस विधानसभा सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. भाजपा ने हस्तिनापुर विधानसभा सीट पर विधायक दिनेश खटीक को ही दोबारा मैदान में उतारा है तो वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने वाले योगेश वर्मा समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर ताल ठोक रहे हैं
बसपा उम्मीदवार संजीव जाटव पहली बार चुनाव मैदान में उतरे हैं, तो मॉडलिंग की दुनिया में जलवा बिखेरने वाली अर्चना गौतम को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है. अर्चना भी पहली बार चुनाव लड़ रही हैं.
राजनैतिक पार्टियों के आकलन के अनुसार, हस्तिनापुर (सुरक्षित) सीट पर जाटव मतदाता करीब 70 हजार, मुस्लिम 65 हजार, गुर्जर 51 हजार, जाट 22 हजार, ब्राह्मण 12 हजार और वैश्य-जैन मतदाता 11 हजार के करीब हैं. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा उम्मीदवार दिनेश खटीक 99,436 वोट पाकर चुनाव जीते थे. अब दिनेश पर अपने पिछले चुनावी प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है.
वर्ष 2022 विधानसभा चुनावों के नतीजों से पता चलेगा कि हस्तिनापुर और गंगोत्री विधानसभा सीटें अपना सियासी मिथक बरकरार रखती हैं या नहीं.

