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विधानसभा चुनाव 2022ः दो तो गए

इमरान ने पार्टी बदल ली. इसकी वजह? सपा के सूत्र बताते हैं, ''पहले इमरान दो टिकट चाहते थे, एक अपने लिए और एक अपने सहयोगी के लिए—और जब ऐसा नहीं हुआ तो वह चिढ़ गए.

इमरान मसूद
इमरान मसूद
अपडेटेड 7 फ़रवरी , 2022

विधानसभा चुनाव 2022/चुनावी हलचल

उत्तर प्रदेश

शब्दों का क्या असर हो सकता है, कोई कुछ बता नहीं सकता. प्रियंका गांधी के यह कहने कि यूपी में 'कोई दूसरा चेहरा’ नहीं है, के कुछ ही दिनों बाद कांग्रेस ने सूबे में पहले से छोटी होती जा रही जाने-पहचाने चेहरों की सूची में से दो चेहरे खो दिए !

पूर्व गृह राज्यमंत्री आर.पी.एन. सिंह ने एक नया अध्याय शुरू करने का फैसला किया. दूसरे रहे: इमरान मसूद, जो पूर्व पार्टी सचिव और सहारनपुर के जाने-माने चेहरे हैं. एक दिन पहले एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी (सपा) के हाथों अपने अपमान का जिक्र किया.

पर अगले ही दिन, इमरान ने पार्टी बदल ली. इसकी वजह? सपा के सूत्र बताते हैं, ''पहले इमरान दो टिकट चाहते थे, एक अपने लिए और एक अपने सहयोगी के लिए—और जब ऐसा नहीं हुआ तो वह चिढ़ गए. बाद में, उन्होंने बसपा से टिकट की जुगत लगाई लेकिन अखिलेश जी ने किसी तरह उनको मना लिया.’’

उत्तराखंड

खंडूड़ी है जरूरी
उत्तराखंड में वर्ष 2012 में भाजपा कार्यकर्ताओं ने दीवारों पर 'खंडूड़ी है जरूरी’ नारा लिख दिया था. उन्हें पार्टी के सबसे अहम और हर खांचे में फिट शख्स के रूप में देखा जा रहा था—वे सैन्य दिग्गज, फायरब्रान्ड वक्ता, साफ छवि वाले और काम कर दिखाने वाले शख्स थे.

लेकिन मौजूदा हालात विपरीत हैं: भाजपा उस चैप्टर को दफना देने को आतुर है. 75 साल की उम्र के नियम का हवाला देते हुए बी.सी. खंडूड़ी को 2019 में सेवानिवृत्त होने को मजबूर किया गया. फिर अमेरिका से लौटे उनके बेटे मनीष को टिकट देने से मना कर दिया गया.

लेकिन खंडूड़ी युग के अंत का ऐलान करने वाले गलत साबित हो रहे हैं. उनकी बेटी ऋतू ने पौड़ी क्षेत्र में पारिवारिक गढ़ कोटद्वार से टिकट हासिल करके सबकी बोलती बंद कर दी है.

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