जहां सबकी नजर: धूरी, पंजाब
उत्तेजना से भरे इस चुनाव में सारा ध्यान धूरी सीट पर आ गया, जब आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार 48 वर्षीय भगवंत मान को मालवा बेल्ट के केंद्र में स्थित इस सीट से उतारने का फैसला किया. मान निवर्तमान लोकप्रिय विधायक तथा प्यार से गोल्डी कहे जाने वाले 40 वर्षीय दलवीर सिंह खंगूरा के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं.
गोल्डी तेजतर्रार, पर मृदुभाषी कांग्रेसी हैं. अपने क्षेत्र के हर गांव में उनकी पहुंच है. मान की किस्मत, धूरी संगरूर लोकसभा सीट का हिस्सा है और जहां से वे दो बार जीते हैं. वहां सियासी परिदृश्य दिलचस्प है और पंजाब के सभी सियासी रंग मौजूद हैं. सतलज नदी के दक्षिण-पूर्व में स्थित मालवा इलाके में राज्य के 22 में से 14 जिले हैं. धूरी 'रॉयल पंजाब’ में स्थित है.
रॉयल पंजाब यानी फुलकियां पट्टी में पूर्ववर्ती पटियाला, नाभा, फरीदकोट, जींद और मलेरकोटला की रियासतें आती हैं. दशकों तक यह क्षेत्र नक्सलवाद का गढ़ रहा. बाद में खालिस्तान आंदोलन को यहां उपजाऊ जमीन मिली. हाल में यह किसान आंदोलन का केंद्र रहा. उबाल ला देने वाली बेअदबी की घटनाएं भी यहीं हुईं.
ये सभी जीवंत मुद्दे हैं—और इन पर पूर्ववर्ती रजवाड़ों (सभी जट सिख, मलेरकोटला के पठान शासकों को छोड़कर), कम्युनिस्ट सहानुभूति वालों और विद्रोही सिख पहचानवादियों की पकड़ है जो अनुच्छेद 370 को हटाने और सीएए के विरुद्ध भी खड़े हुए. शहरी वर्चस्व वाले कारोबारी ब्राह्मण और बनिए अमूमन स्विंग वोटर होते हैं—उनका असर इतना है कि अकाली दल ने यहां हिंदू उम्मीदवार उतार दिया है.
2017 में आप ने अपनी 20 में से 16 सीटें इन्हीं क्षेत्रों में जीती थी. पर यह अमरिंदर सिंह और किसान संगठनों का भी क्षेत्र है. यानी राजाओं के खिलाफ आम आदमी उठ खड़े हुए हैं!

