
उत्तर प्रदेश के चुनावी महासमर में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. वे अपनी लोकलुभावन नीतियों का गुब्बारा चुनावी आसमान में लहरा रहे हैं.
आम आदमी पार्टी (आप) ने यूपी चुनाव में 250 से अधिक सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. आप की जमीन मजबूत करने के लिए पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने 18 सिपहसालार यूपी में भेजे हैं. ये सिपहसालार दिल्ली में आप के विधायक हैं जिन्हें केजरीवाल ने यूपी के अलग-अलग जोन में तैनात किया है. ये विधायक अपने जोन में आने वाली विधानसभा सीटों पर पार्टी की जमीन मजबूत करने के मिशन में लगे हुए हैं. इन्हीं विधायकों से मिला 'फीडबैक' 2 जनवरी को लखनऊ के स्मृति उपवन में आप की महारैली में उठे मुद्दों में स्पष्ट दिख रहा था.
महारैली के मुख्य अतिथि, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने भाषण में मुफ्त बिजली और महिला हित को चुनावी मुद्दा बनाने का भरसक प्रयास किया. केजरीवाल ने जोर लगाते हुए कहा कि उन्हें हर महीने 300 यूनिट बिजली फ्री देने का फॉर्मूला मालूम है और इसी फॉर्मूले के तहत वे दिल्ली में 35 लाख लोगों को मुफ्त बिजली दे रहे हैं. केजरीवाल ने यूपी में आप की सरकार बनने पर 18 वर्ष की उम्र से अधिक की महिला को 1,000 रुपए प्रति माह देने की घोषणा की. उनकी घोषणा के बाद यूपी में सक्रिय आप के 700 सोशल मीडिया वॉलंटियर प्रदेश में बने 75,000 व्हाट्सऐप ग्रुप में फ्री बिजली, स्मार्ट स्कूल समेत दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार की योजनाओं को लगातार प्रसारित करने में जुट गए हैं. केजरीवाल 250 से अधिक सीटों पर अपने उम्मीदवारों के पक्ष में वर्चुअल रैली के साथ डोर-टू-डोर प्रचार करने के लिए भी मैदान में उतर सकते हैं.
आप अगर 'दिल्ली मॉडल' के जरिए यूपी में मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है तो कांग्रेस भी 'छत्तीसगढ़ मॉडल' का जिक्र करके प्रदेश में तीन दशकों से चला आ रही सत्ता का सूखा दूर करने के प्रयास में है. इसी रणनीति के तहत कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी का वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया है. 2 अक्तूबर को वरिष्ठ पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी संभालने के बाद बघेल यूपी में 30 से अधिक रैलियां और सभाएं कर चुके हैं. विधानसभा चुनाव के दौरान कृषि पर श्वेत पत्र जारी करने की जिम्मेदारी भी प्रियंका गांधी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को ही सौंपी.

लखनऊ के मॉल एवेन्यु स्थित कांग्रेस मुख्यालय में 19 जनवरी को 'आमदनी न हुई दोगुनी, दर्द सौ गुना' शीर्षक से कृषि पर श्वेत पत्र जारी करने के दौरान बघेल ने छत्तीसगढ़ सरकार की 'गोधन न्याय योजना' की जानकारी दी, जिसमें किसानों से दो रुपए प्रति किलो के हिसाब से गोबर खरीदकर उन्हें 10 रुपए प्रति किलो की दर से वर्मी कंपोस्ट खाद मुहैया कराई जाती है. बघेल 28 जनवरी से ब्रज क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में सघन चुनाव प्रचार में जुटने की तैयारी कर चुके हैं.
अरविंद केजरीवाल और भूपेश बघेल ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों के कई अन्य मुख्यमंत्री भी यूपी की चुनावी वेला में अपना दमखम दिखाने की तैयारी कर रहे हैं (देखें बॉक्स). राजनैतिक विश्लेषक इसे भाजपा के खिलाफ विपक्ष के बिखराव के प्रतिफल के तौर पर देख रहे हैं. लखनऊ में कान्य कुब्ज कॉलेज में राजनीतिशास्त्र विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर बृजेश मिश्र बताते हैं, ''403 विधानसभा सीटों वाले यूपी में भाजपा के विरोध में बिखरा विपक्ष अपनी मौजूदगी को मजबूत करने के लिए सारे प्रयास कर रहा है. इसी ने दूसरे राज्यों में विपक्षी पार्टियों के मुख्यमंत्रियों के लिए जगह बनाई है. विकास मॉडल का प्रचार, खास जाति को लुभाने या फिर क्षेत्र विशेष के लोगों पर डोरे डालने के लिए दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों का सहारा लिया जा रहा है.''
ओबीसी मतदाताओं पर नजर
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बघेल को यूपी विधानसाभा चुनाव के लिए कांग्रेस का वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाए जाने के पीछे कुर्मी पिछड़ी जाति को लुभाने की रणनीति भी है. बृजेश मिश्र बताते हैं, ''यूपी विधानसभा चुनाव में कई ओबीसी जातियां राजनैतिक रूप से एकजुट हो रही हैं. इन मतदाताओं को लुभाने के लिए कांग्रेस के पास यूपी में कोई भी बड़ा ओबीसी चेहरा नहीं था. बघेल के जरिए यूपी में विधानसभा चुनाव के दौरान ओबीसी, खासकर कुर्मी मतदाताओं में कांग्रेस की पैठ बढ़ाने की रणनीति भी है.'' बघेल विशेषकर कुर्मी और निषाद बहुल इलाकों में सभाएं करके पार्टी का जनाधार मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं. गोरखपुर के चंपा देवी पार्क में 31 अक्तूबर को आयोजित कांग्रेस की प्रतिज्ञा रैली से पहले शहर में प्रियंका गांधी के साथ बघेल की फोटो वाली होर्डिंग लग गई थीं. इन होर्डिंग में भूपेश बघेल को 'पिछड़ा वर्ग के हितों का संरक्षक' बताया गया था. 17 नवंबर को बुंदेलखंड के चित्रकूट के रामघाट में प्रियंका गांधी 'शक्ति संवाद' कार्यक्रम में शिरकत कर रही थीं तो पड़ोस के जिले बांदा में नरैनी रोड पर मौजूद एक मैरिज हॉल में बघेल कुर्मी समाज के नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे.
पिछड़ी जातियों के बीच बघेल छत्तीसगढ़ सरकार की किसानों के लिए शुरू की गई योजनाओं की जानकारी देकर यूपी की योजनाओं से उनकी तुलना भी करते हैं. बघेल निषाद समाज से अपनत्व बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले का संबंध जोड़ते हैं. 23 दिसंबर को गोरखपुर से देवरिया बाइपास पर आयोजित मछुआरा संवाद कार्यक्रम में बघेल ने बताया कि बिलासपुर जिले का नाम बिलासा देवी निषाद के नाम पर पड़ा है. छत्तीसगढ़ में बिलासा की पूजा एक देवी के रूप में होती है. छत्तीसगढ़ सरकार हर वर्ष मत्स्य पालन के लिए बिलासा देवी पुरस्कार भी देती है. निषाद समाज के साथ बैठकों में बघेल यह जिक्र करना नहीं भूलते कि उनकी सरकार ने बिलासपुर के चकरभाटा एयरपोर्ट का नाम वीरांगना बिलासा देवी के नाम पर कर दिया है.
संगठन विस्तार की रणनीति
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिस तरह से बंगाल चुनाव में भाजपा को शिकस्त दी थी उसके बाद से यूपी में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संगठन विस्तार की अटकलें लगाई जा रही थीं. ममता बनर्जी ने 25 अक्तूबर को पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में आयोजित एक समारोह में कांग्रेस के पूर्व एमएलसी राजेश पति त्रिपाठी और उनके पुत्र पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी को टीएमसी की सदस्यता दिलाई. टीएमसी ने यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने से इनकार किया है लेकिन ममता बनर्जी लखनऊ के बाद वाराणसी में सपा के पक्ष में वर्चुअल रैली कर सकती हैं.
उधर, कांग्रेस ने भी अपने संगठन को विस्तार देने और बूथ स्तर तक सक्रिय करने के लिए बघेल के 'छत्तीसगढ़ मॉडल' का ही सहारा लिया है. इसी मॉडल के जरिए कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में बूथ स्तर तक सक्रिय कार्यकर्ताओं की एक प्रशिक्षित टीम तैयार की थी. कांग्रेस ने राष्ट्रीय सचिव और मुख्यमंत्री बघेल के सलाहकार राजीव तिवारी को यूपी में सहप्रभारी बनाया है.
तिवारी की निगरानी में ही पिछले वर्ष जुलाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के वृहद प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत की गई. यूपी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिलाने के लिए 200 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए. इन कार्यकर्ताओं को छत्तीसगढ़ से आए मास्टर ट्रेनर ने रायबरेली में प्रशिक्षण दिया. तिवारी बताते हैं, ''सबसे पहले पार्टी संगठन के लिहाज से सभी सात जोन में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुए. इसके बाद 75 जिला अध्यक्ष, 89 शहर और महानगर अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष से लेकर बूथ अध्यक्ष के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए. पिछले वर्ष जुलाई से दिसंबर तक आयोजित इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संगठन विस्तार और कांग्रेस के बारे में किए जा रहे आरएसएस के कुप्रचार का 'काउंटर' करने की तरकीब भी बताई गई.''
अयोध्या से संदेश
यूपी में राजनैतिक मौजूदगी दर्ज कराने में जुटे दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री अयोध्या जाने से परहेज नहीं कर रहे हैं. केजरीवाल दो दिवसीय दौरे पर 25 अक्तूबर को अयोध्या पहुंचे थे. यहां केजरीवाल ने रामलला और बजरंगबली का दर्शन करने के साथ सरयू आरती भी की थी. इस मौके पर केजरीवाल ने घोषणा की थी कि वे मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत दिल्ली के बुजुर्ग नागरिकों को अयोध्या का भ्रमण कराएंगे. केजरीवाल की घोषणा के 40 दिन बाद 4 दिसंबर को मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत एक स्पेशल ट्रेन 960 श्रद्धालुओं को लेकर अयोध्या पहुंची.
बघेल 23 दिसंबर को अयोध्या के बीकापुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम दशरथपुर में कांग्रेस के प्रतिज्ञा महासम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे. अपने संबोधन में बघेल ने रामनगरी, श्रीराम और रामराज्य का कई बार उल्लेख किया. अयोध्या के साकेत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य वी. एन. अरोड़ा कहते हैं, ''अयोध्या में राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद अरविंद केजरीवाल के अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री यहां दर्शन के लिए आ चुके हैं. इसके पीछे इन मुख्यमंत्रियों की मंशा यूपी के साथ अपने राज्य के हिंदू मतदाताओं को एक सकारात्मक संदेश देने की है.''
अब देखना है कि विधानसभा चुनाव में यूपी का मतदाता 'बाहरी' मुख्यमंत्रियों से कैसा अपनत्व जाहिर करता है.

