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देश का मिजाजः नया विपक्ष नया चेहरा?

कांग्रेस की किस्मत सुधारने के लिए राहुल गांधी पर दांव लगाना भले ही सबसे बढ़िया विकल्प हो, लेकिन भाजपा के खिलाफ विपक्षी गठबंधन की अगुआई करने के लिए ममता बनर्जी को बेहतर उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा.

पीछे से नेतृत्व दिसंबर 2021 में सांसदों के निलंबन के खिलाफ हुए प्रदर्शन में राहुल गांधी
पीछे से नेतृत्व दिसंबर 2021 में सांसदों के निलंबन के खिलाफ हुए प्रदर्शन में राहुल गांधी
अपडेटेड 27 जनवरी , 2022

देश का मिज़ाज/ कांग्रेस: विपक्ष

वर्ष 2021 के आखिरी सप्ताह में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने के सरकार के फैसले की घोषणा की तो विपक्षी दलों को उस पर टीका-टिप्पणी करने का मुद्दा मिल गया. 

प्रधानमंत्री के कदम पीछे खींचने की टेलीविजन पर घोषणा के कुछ ही क्षणों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी की इन कानूनों को निरस्त करने की भविष्यवाणी करने वाला एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर वायरल हो गया.

तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने यहां तक कहा कि वे आधार कार्ड नंबर को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ने का प्रस्ताव करने वाले एक और विवादास्पद विधेयक (चुनाव कानून विधेयक 2021) पर सरकार को फिर से घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे. 

देश का मिजाजः नया विपक्ष नया चेहरा?
देश का मिजाजः नया विपक्ष नया चेहरा?

फिर भी, हमारे नवीनतम देश का मिज़ाज सर्वेक्षण से प्रतीत होता है कि संसद में विपक्षी दलों के जुझारूपन में व्यक्त हो रहे सामूहिक उत्साह को लोंगों का बहुत समर्थन नहीं मिला है. सर्वेक्षण के जनवरी 2022 संस्करण से पता चलता है कि 43.1 फीसद उत्तरदाता विपक्षी दलों को संसद में लगातार व्यवधान पैदा करने के लिए जिम्मेदार मानते हैं, जबकि 32 फीसद लोग इसके लिए सरकार को दोषी ठहराते हैं.
 
कोविड की दूसरी लहर में हुई तबाही के कारण जनता के गुस्से और पीड़ा ने मोदी सरकार को रक्षात्मक मुद्रा अपनाने के लिए बाध्य कर दिया था. विपक्षी दलों ने भी महामारी से निबटने में असफलता पर सरकार को घेरने की पूरी कोशिश की, फिर भी आधे से अधिक उत्तरदाताओं (53 फीसद) का मानना है कि विपक्षी दलों ने केवल निंदा करने के मकसद से सरकार की आलोचना की थी. केवल 32 फीसद ने माना कि विपक्ष ने रचनात्मक ढंग से सरकार की आलोचना की.

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विपक्ष के प्रति लोगों के भरोसे की स्पष्ट कमी का सीधा संबंध कांग्रेस के प्रदर्शन से है. लगातार दो लोकसभा चुनावों (2014 और 2019) में खराब प्रदर्शन और शीर्ष नेतृत्व पर अंतहीन अनिश्चितता ने सही मायने में इसके एकमात्र राष्ट्रीय विपक्षी दल होने की आम धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया है. जिन थोड़े से राज्यों में वह सत्ता में है, वहां के नेताओं के बीच सार्वजनिक कलह ने इस धारणा को खराब करने में मदद की है.

नतीजतन, जैसा कि लगातार देश के मिज़ाज सर्वेक्षण में दिखता है, इस पार्टी के प्रति लोगों के समर्थन में गिरावट आई है और इस बार के सर्वेक्षण में केवल 33 फीसद उत्तरदाताओं ने उसके प्रदर्शन को 'अच्छा’ माना है. यह जनवरी 2021 में ऐसी राय रखने वाले 41 फीसद उत्तरदाताओं से कम है.

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केवल भाजपा ही नहीं, अन्य विपक्षी दलों की ओर से भी लगातार आलोचना के बावजूद, पार्टी का पुनरुद्धार करने के लिए राहुल गांधी को सबसे उपयुक्त माना जा रहा है. करीब 18 फीसद उत्तरदाताओं ने कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए सबसे उपयुक्त नेता के रूप में उन्हें समर्थन दिया.

यह जनवरी 2020 में उन्हें मिले 24 फीसद समर्थन से कम, लेकिन एक साल पहले मिले 15 फीसद समर्थन से ज्यादा था. हालांकि, ऐसा मानने वालों की संख्या बढ़ी है कि कि गांधी परिवार के बिना कांग्रेस की स्थिति बेहतर होगी (छह महीने पहले के 45 फीसद की तुलना इस बार 49 फीसद).

देश का मिजाजः नया विपक्ष नया चेहरा?
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उत्तर प्रदेश की प्रभारी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के प्रति जनसमर्थन में गिरावट देखी गई है. प्रियंका उत्तर प्रदेश में पार्टी के पुनरुद्धार की कोशिश कर रही हैं और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राज्य में पार्टी के अभियान की अगुआई कर रही हैं. लेकिन वास्तव में पार्टी का पुनरुद्धार करने में सक्षम सबसे उपयुक्त नेताओं की सूची में वे चौथे नंबर पर खिसक गई हैं.

इसके विपरीत, गांधी परिवार से बाहर के दो नेताओं की लोकप्रियता में वृद्धि देखी गई है. लगभग 30 फीसद उत्तरदाताओं ने 89 वर्षीय मनमोहन सिंह को कांग्रेस का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त माना (एक साल पहले के 27 फीसद से ऊपर), जबकि गांधी परिवार से बाहर के दूसरे सबसे लोकप्रिय नेता 44 वर्षीय सचिन पायलट हैं (12 प्रतिशत). पायलट राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री हैं और साल 2020 में बागी होकर उन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को हटाए जाने की मांग की थी. 

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पार्टी के नेतृत्व के बारे में अनिश्चितता और चुनावों में इसके लगातार खराब प्रदर्शन ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरीखे अन्य विपक्षी दलों को भाजपा-विरोधी विपक्ष के आधार  के रूप में अपना दावा पेश करने के लिए प्रोत्साहित किया है. अब कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका के बिना ही गठबंधनों को लेकर बातचीत हो रही है.

उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने फरवरी/मार्च में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार करने का फैसला किया है. इस तरह के प्रयासों को स्पष्ट रूप से जनता का समर्थन भी है. लगभग 48 फीसद उत्तरदाताओं का मानना है कि टीएमसी विपक्षी दलों के एक प्रभावी गठबंधन का निर्माण और नेतृत्व कर सकती है. 

पिछले साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ भारी जीत से उत्साहित ममता बनर्जी गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए विपक्षी नेताओं में सबसे ज्यादा पसंदीदा नेता के रूप में उभरी हैं—17 फीसद से अधिक उत्तरदाताओं ने उनका समर्थन किया है, जो ठीक एक साल पहले के 11 फीसद से अधिक है. 

इसके विपरीत, विपक्षी गठबंधन के नेता के रूप में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल की स्वीकृति में गिरावट आई है. छह महीने पहले उन्हें 20 फीसद समर्थन हासिल था जो अब 15.5 फीसद रह गया है. इसे केजरीवाल के लिए अच्छी खबर नहीं माना जा सकता क्योंकि उनकी महत्वाकांक्षा राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी होने की है और उनकी पार्टी पंजाब, गुजरात, उत्तराखंड तथा गोवा जैसे अन्य राज्यों में दाखिल हो रही है.

देश का मिजाजः नया विपक्ष नया चेहरा?
देश का मिजाजः नया विपक्ष नया चेहरा?

अलग-अलग नेताओं की घटती-बढ़ती लोकप्रियता और उनके बीच अपना प्रभाव बढ़ाने की होड़ के बावजूद, मतदाताओं को उम्मीद है कि केंद्र में मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा को चुनौती देने वाला कोई प्रभावी गठबंधन बन पाएगा. लगभग 50 फीसद उत्तरदाताओं ने इस विचार का समर्थन किया है.

विपक्षी दलों के लिए और भी उत्साहजनक बात यह है कि उनके प्रति नकारात्मक भाव रखने वालों की संख्या घटी है. केवल छह महीने पहले ऐसे लोगों की संख्या 43 फीसद थी जो अब घट कर 41 फीसद रह गई है. 

अब इन विपक्षी नेताओं के सामने ज्यादा कठिन काम यह है कि वे अपने मकसद के लिए एकजुट हों और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठ कर जनता के भरोसे को सही ठहराने में कामयाब हों. ठ्ठ

नई पहल
विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए ममता बनर्जी एक पसंदीदा विकल्प बनी हैं

कांग्रेस का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त नेता के रूप में मनमोहन सिंह (30%) और सचिन पायलट (12%) की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है


सर्वेक्षण में 48 फीसद लोगों का मानना है कि टीएमसी विपक्षी दलों के एक प्रभावी गठबंधन का निर्माण और नेतृत्व कर सकती है.

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