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प्रधान संपादक की कलम से

एक किसान नेता के आंसू आंदोलन की मजबूती की वजह बन गए, जो केंद्र सरकार के तीन विवादास्पद कानूनों को वापस लेने के साथ ही खत्म हुआ.

11 जनवरी, 2021 का आवरण
11 जनवरी, 2021 का आवरण
अपडेटेड 10 जनवरी , 2022

सुर्खियों के सरताज- 2021

अरुण पुरी

भारी शोर-गुल वाले उस लोकतंत्र में कभी खबरों या शिख्सियतों की कमी नहीं होती है जो जल्दी ही दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी का देश बनने वाला है. नेताओं, खिलाड़ियों, फिल्मी सितारों, कारोबारियों और उथल-पुथल भरी घटनाओं से यही जान पड़ता है, मानो 'दिलचस्प वक्त में जियो’ जैसा जुमला भारत के लिए ही बना है.

लिहाजा, इंडिया टुडे में हमारे लिए साल के सुर्खियों के सरताज को चुनना बेहद कठिन हो जाता है, यानी वह शख्स या घटनाक्रम, जिसने समूचे साल की अहम घटनाओं को आकार दिया हो. पिछले दो साल इस देश में दिलचस्प ही नहीं, अप्रत्याशित भी रहे हैं. 2020 का हमारा सुर्खियों का सरताज कोरोनावायरस था, आंखों से न दिखने वाला, अदना-सा विषाणु, जिसने दुनिया को अचानक ठप कर दिया, और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी तबाही और उथल-पुथल का कारण बना.

इस साल कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर ने भारी तबाही मचाई, देश में 2,00,000 से ज्यादा लोग मारे गए, इससे वाशिंगटन स्थित सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट ने उसे 'बंटवारे के बाद सबसे बुरी त्रासदी’ कहा. बेशक, दूसरी अहम घटनाएं और सुर्खियों में छाने वाले भी हुए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को यह यकीन दिलाने के लिए सुधारक की भूमिका में पेश आए कि आत्मनिर्भरता और निजीकरण अनिवार्य तौर पर विलोम नहीं होते.

एक किसान नेता के आंसू आंदोलन की मजबूती की वजह बन गए, जो केंद्र सरकार के तीन विवादास्पद कानूनों को वापस लेने के साथ ही खत्म हुआ. एक अजीबो-गरीब घटना में धूर्त पुलिस अधिकारियों ने विस्फोटकों भरी एसयूवी देश के सबसे धनी कारोबारी के घर के पास खड़ी करने की साजिश रची. उसके बाद के घटनाक्रम में मुंबई के पुलिस आयुक्त अपने ही साथियों से छिपते फिरे.

एक सुपरस्टार का बेटा ड्रग्स के मामले में पकड़ा गया. एक मुख्यमंत्री ने अपने गृह राज्य में भाजपा के अजेय लगने वाले रथ को रोक दिया. दो नए मुख्यमंत्री असम और तमिलनाडु में सुर्खियों में उभरे. एक प्रतिभावान एथलीट भारत के लिए व्यक्तिगत स्पर्धाओं में पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक जुटा लाया.

कारोबार जगत में यूनिकॉर्न युवा भारतीय उद्यमियों का जुनून का जरिया बने. सितारों की एक नई पीढ़ी को ओवर द टॉप (ओटीटी) सिरीज ने घर-घर पहुंचा दिया. कोविड महामारी में अपने मां-बाप को गंवा चुका एक भारतीय यूट्यूबर को 2 करोड़ सब्सक्राइबर मिल गए.

इन सबके बावजूद कोविड-19 के खिलाफ हमारी बड़ी लड़ाई अभी जारी है. पिछले दो साल में दुनिया भर में एक-चौथाई अरब से ज्यादा लोग संक्रमण के शिकार हुए और 53 लाख से ज्यादा लोग मारे गए. महामारी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. वायरस के नए वैरिएंट दुनिया में मौत और डर पैदा कर रहे हैं.

इस स्वास्थ्य संकट में बस एक ही और बेहद महत्वपूर्ण उम्मीद की किरण यह है कि भारत दुनिया में वैक्सीन का सबसे बड़ा उत्पादक है. इस साल के शुरू में ये कोरोनावायरस की जंग में उपलब्ध कराई गईं. इसका मतलब है कि अरबों टीकों की खातिर दुनिया के आगे हमें कटोरा लेकर नहीं जाना पड़ा, हम अब आत्मनिर्भर हैं.

अदार पूनावाला की पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया   ने साल में 1.5 अरब वैक्सीन का उत्पादन किया, और भारत में  अब तक लगे 1.4 अरब टीकों में 88 फीसद कोविशील्ड है, जिसे सीरम इंस्टीट्यूट ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के फॉर्मुले से बनाया. इस बीच भारत बायोटेक के कृष्ण एल्ला एक स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सिन बनाने में उतनी ही जल्दी कामयाब हो गए, जितनी दुनिया की बड़ी फार्मा कंपनियां.

इन दो वैक्सीन ने भारत में महामारी के तीखेपन को भोथरा कर दिया. उनके बिना हमारे अस्पतालों में कुछ और लाख लोगों की भीड़ रहती और मृत्यु का आंकड़ा भी और अधिक होता. वैक्सीन के सुरक्षा कवच और महज 10 महीने में देश भर में एक अरब से ज्यादा टीके लगाने की सरकार की सराहनीय कोशिश के बूते एक बड़ी आपदा टल गई. कम लोग बीमार पड़ रहे हैं, इससे अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए वक्त मिल गया है. इसलिए इस साल वैक्सीन ने अराजकता और आपदा के बीच फर्क पैदा किया.

इसी वजह से हमने एल्ला और पूनावाला को इस साल का सुर्खियों का सरताज चुना. उन्होंने अपने करियर और साख को दांव पर लगाने का साहस और नवाचार दिखाया. उन्हें एहसास था कि जिंदगियां दांव पर लगी हैं, अगर कुछ गलत हुआ या वैक्सीन कारगर नहीं हुई तो उनके और देश के लिए आपदा के समान है.

एल्ला के मुताबिक, वे यह दिखाना चाहते थे कि भारत अत्याधुनिक वैक्सीन अनुसंधान में बाकी दुनिया से पीछे नहीं है. पूनावाला के लिए एस्ट्राजेनेका से करार करना और अपने वैक्सीन उत्पादन को एकदम शिखर पर ले जाना भारी जोखिम भरा था, जो अखिरकार कामयाब रहा.

इस साल हमने अपने फॉर्मेट में सुधार किया है. हमने तय किया कि बड़े सुर्खियों के सरताज के अलावा इस साल ऐसे ढेरों सुर्खियां बनाने वाले रहे, जिन पर नजर जानी चाहिए. इसलिए हमने नौ कैटेगरी बनाई—राजनीति, सार्वजनिक जीवन, कारोबार, ऐक्टिविज्म, विवाद, पेशेवर, खेल, मनोरंजन और कला में हरेक में एक सुर्खियों का सरताज चुना गया.

उनमें वही शख्सियतें हैं, जिन्होंने अपने संबंधित दायरे में सुर्खियां बनाईं. उम्मीद है कि आने वाले वर्ष में कोरोनावायरस दूर की याद भर बनकर रह जाएगा और हम जोरदार आर्थिक बहाली की ओर आगे बढ़ जाएंगे. 

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