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प्रधान संपादक की कलम से

इस साल की ऊंचे और रसूखदारों की फेहरिस्त की नैतिक सीख यह है कि सत्ता और ताकत हमेशा कायम रहेगी, यह मानकर नहीं चला जा सकता

28 मार्च, 2007 का आवरण; 28 अक्तूबर, 2020 का आवरण
28 मार्च, 2007 का आवरण; 28 अक्तूबर, 2020 का आवरण
अपडेटेड 8 नवंबर , 2021

इसी महीने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए लेखक-पत्रकार थॉमस फ्रीडमैन ने सत्ता की सापेक्षिकता पर जोर दिया था. उन्होंने कहा कि प्रकृति मां ही सभी महाशक्तियों की जननी है. इस पर कोई तर्क-वितर्क कर पाना मुश्किल है, जब आप देखते हैं कि दुनिया की एकमात्र महाशक्ति, जिसके पास धरती को 10 बार बर्बाद करने जितने असलहे हैं, दुनिया भर की परिक्रमा करते एक अदने-से वायरस के आगे घुटने टेकने को मजबूर हो गई.

महामारी ने दुनिया भर में इनसानी जिंदगियों को इस तरह तहस-नहस कर दिया कि ऐसा हाल के इतिहास में किसी भी दूसरी घटना ने नहीं किया था. इसने साबित किया कि शक्ति क्षणभंगुर है. इसने इंडिया टुडे की रसूखदार लोगों की फेहरिस्त में लगातार दूसरे साल उलटफेर किए. हमारी इस सालाना फेहरिस्त में उन लोगों से परिचय करवाया जाता है, जो अपने क्षेत्र से बाहर भी ताकत और रसूख रखते हैं और जिनका हमारी जिंदगियों पर उनके कद से कहीं ज्यादा असर पड़ता है. उनका दबदबा उनकी दौलत और ओहदे से कहीं ज्यादा बड़े कारकों का नतीजा होता है.

कुछ मुट्ठी भर सदाबहार लोग हमारी रसूखदारों की सूची के आसमान में अब भी जमे हैं और इसमें वे 2003 से उपस्थिति बनाए हुए हैं. कारोबारी रसूखदारों का हमारी फेहरिस्त पर एकाधिकार जारी है, जो हमारी पहली किस्त से ही रहा है.

हमारी फेहरिस्त में 40 आंत्रप्रेन्योर यानी उद्यमी इस साल भी हैं और पिछले साल भी थे. आर्थिक मंदी से पैदा अनपेक्षित बदलावों के कारण उनकी स्थितियों में उतार-चढ़ाव आए हैं. मसलन, भारत के विमानन क्षेत्र पर सबसे संगीन असर पड़ा है. पिछले साल कुल जमा 22,400 करोड़ रुपए के वित्तीय घाटे के रुझान का इस वित्त वर्ष भी कायम रहना तय दिखाई देता है.

फलक के दूसरे छोर पर डिजिटल इंडिया धूम मचा रहा है. भारत की उपभोक्ता डिजिटल अर्थव्यवस्था, जो 2020 में 85-90 अरब डॉलर की थी, 2030 तक दस गुना बढ़कर 800 अरब डॉलर की हो जाने का अनुमान है. महामारी ने इस बदलाव की रफ्तार तेज कर दी. इसने स्वास्थ्य सेवा उद्योग को भी खूब बढ़ावा दिया. बीते साल के दौरान कोविड-19 के टीकों का क्लिनिकल ट्रायल से निकलकर लगातार और पूर्णकालिक उत्पादन होने लगा. भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता है और ऐसे में यह तो होना ही था कि हमारे दो वैक्सीन अरबपतियों ने रसूखदारों की फेहरिस्त में 18 पायदान की छलांग लगाई. रसूखदारों की हमारी फेहरिस्त में ज्यादातर नए संपदा निर्माता डिजिटल या स्वास्थ्य अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं. इन दोनों क्षेत्रों के जो रसूखदार फेहरिस्त में पहले से मौजूद हैं, उनकी रैंकिंग में उछाल आया है.

यूनिकॉर्न—कुल 1 अरब डॉलर से ज्यादा के निजी स्टार्ट-अप—की दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी तादाद भारत में है. 2021 के कैलेंडर वर्ष के पहले तीन महीनों में ही उनतीस स्टार्ट-अप भारत के बेहद ललसाते अरब-डॉलर मूल्यांकन क्लब में दाखिल हुए, जिनमें ज्यादातर फिनटेक या एडटेक क्षेत्रों के हैं.

रसूखदारों की हमारी फेहरिस्त में चार यूनिकॉर्न हैं, जिनमें से दो नए दाखिल हुए हैं. वे हमारी फेहरिस्त के इस 19वें संस्करण में बिल्कुल पहली बार आए नौ रसूखदारों में शामिल हैं. मोबिलिटी के राजा जिन्होंने रिकॉर्ड तादाद में इलेक्ट्रिक वाहन बेचे, ओलंपिक गोल्ड विजेता जिसने यकायक देश का ध्यान खींचा, वे दोनों भाई जिन्होंने भारत के ब्रोकरेज बाजार में उथल-पुथल मचा दी, ओटीटी पर चुंबक बनकर उभरा अदाकार, जीतने वाले चुनावी घोड़े पर दांव लगाने की विलक्षण क्षमता से लैस राजनैतिक रणनीतिकार, राष्ट्रीय राजधानी के हृदयस्थल को नई कल्पना के सांचे में ढाल रहा वास्तुकार, अरबपति स्टॉकब्रोकर, क्रिकेट प्रशासक बना राजनैतिक युवराज और महज 22 बरस की उम्र में यूट्यूब पर सनसनी बनकर उभरा हमारा सबसे नौजवान रसूखदार.

महामारी अभी भारत में राजनैतिक उत्प्रेरक नहीं बनी है, बावजूद इसके कि हम सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में हैं. इस साल जिन छह राज्यों में चुनाव हुए (दूसरी लहर से पहले), उनमें से किसी एक में भी यह मुद्दा नहीं थी. राजनैतिक शक्ति व्यवस्था मूलत: जस की तस है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस-भाजपा का पारिस्थितिकी तंत्र मजबूती से शिखर पर कायम है. विपक्ष अब भी बेतरतीबी और बिखराव की हालत में है—कांग्रेस के असल प्रमुख राहुल गांधी के अलावा ममता बनर्जी और शरद पवार सरीखे क्षेत्रीय क्षत्रपों ने ही राजनैतिक रसूखदारों की हमारी फेहरिस्त में जगह बनाई है. ताकतवर पीएमओ की छत्रछाया में अफसरशाहों के जरिए सरकार का हुकूमत करना बीते दिनों तेजी से बढ़ा है.

यह अभूतपूर्व परिघटना है, जिसमें हमारे यहां अब तक की सबसे बड़ी तादाद में सेवानिवृत्ति अफसरशाह कैबिनेट मंत्रियों के तौर पर काम कर रहे हैं. उधर विश्व में 'कमला', 'ऋषि' और 'प्रीति' सरीखे नाम दुनिया के सबसे ऊंचे राजनैतिक पदों पर विराजमान हैं. बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों, विश्व स्वास्थ्य संगठन और आइएमएफ सरीखी वैश्विक संस्थाओं के कुछ सबसे बड़े नामों में भारतीय मूल के लोग हैं. यह भारतीय प्रवासियों की बढ़ती ताकत और लगन का प्रमाण है.

इस साल की ऊंचे और रसूखदारों की फेहरिस्त की नैतिक सीख यह है कि सत्ता और ताकत हमेशा कायम रहेगी, यह मानकर नहीं चला जा सकता.

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