scorecardresearch

वापसी की उड़ान

एयर इंडिया अपने क्षेत्र में तभी कामयाब खिलाड़ी बन पाएगी, जब वह यात्रियों को कुछ खास, कुछ अलहदा पेशकश करे. टाटा समूह के लिए एयर इंडिया का खोया गौरव वापस लौटाने के क्रम में यह सीख काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है

उड़ने को तैयार नई दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर एयर इंडिया का विमान
उड़ने को तैयार नई दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर एयर इंडिया का विमान
अपडेटेड 8 नवंबर , 2021

एयर इंडिया का निजीकरण देर से सही केंद्र की मोदी सरकार के लिए बड़ी राहत की तरह होनी चाहिए, जो कारोबार से छुटकारा पाकर राजकाज पर फोकस करने के वादे पर अपनी प्रत्यक्ष नाकामी पर काफी आलोचना की शिकार हो चुकी है. हालांकि एयर इंडिया के लिए टाटा घराने की 18,000 करोड़ रुपए की बोली कोई महाराजा की कीमत नहीं था, फिर भी टाटा की बोली केंद्र सरकार के रिजर्व प्राइस से 40 फीसद अधिक और दूसरी बोली लगाने वाले स्पाइस जेट के मालिक अजय सिंह से करीब 20 फीसद अधिक थी. हालांकि, इस सौदे से सरकार को 2,700 करोड़ रुपए ही मिलेंगे, बाकी 15,300 करोड़ रुपए का कर्ज टाटा के मत्थे रहेगा.

एयर इंडिया तो मोदी सरकार की इस साल कई सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश की फेहरिस्त में केवल एक है. केंद्र ने 2021-22 के लिए विनिवेश/संपत्ति मौद्रीकरण के लिए 1.75 लाख रुपए का लक्ष्य रखा है. हालांकि इसको लेकर प्रगति काफी धीमी है. भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया जैसी कंपनियों की बिक्री अभी होनी है. सरकार का प्रस्ताव दो सरकारी बैंकों और एक सार्वजनिक बीमा कंपनी के निजीकरण का भी है.

इस कोशिश में केंद्र सरकार का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है. मोदी सरकार ने 2014-15 और 2020-21 के बीच विनिवेश से 6.57 लाख करोड़ रुपए उगाहने का लक्ष्य रखा है, लेकिन वह करीब 60 फीसद या 4.04 लाख करोड़ रुपए ही उगाह पाई है. वहीं, सरकार ने 2020-21 में ही 2.1 लाख करोड़ रुपए उगाहने की उम्मीद की थी, लेकिन वित्तीय वर्ष के आखिरी में बाजार में उत्साह के बावजूद करीब 10 फीसद (21,000 करोड़ रु.) ही जुट पाया है.

एयर इंडिया की खरीद के बाद अब टाटा समूह के जिम्मे कुल मिलाकर तीन एयरलाइन हो गई हैं. एयर इंडिया सौदे की औपचारिकताएं दिसंबर में पूरी होनी है. टाटा घराना विस्तारा का संचालन सिंगापुर एयरलाइन्स के साथ करता है और किफायती एयरलाइन एयरएशिया इंडिया में मलेशियाई एयर एशिया के साथ उसकी साझेदारी है.

टाटा संस के साल 1938 से 1988 तक के चेयरमैन रहे जे.आर.डी. टाटा ने एयर इंडिया की स्थापना साल 1930 में की थी. यह कंपनी जून 1953 में राष्ट्रीकरण के बाद टाटा घराने के हाथ से निकल गई थी. इस एयरलाइन को यात्रियों के लिए पसंदीदा बनाने में जेआरडी की कारोबारी काबिलियत के साथ विमान उड़ाने का उनका शौक भी मायने रखता था. साल 1930 में भारत से इंग्लैंड तक विमान उड़ाने वाले वे पहले पायलट थे और वह भी उस वक्त जब विमान उड़ाने के आधुनिक उपकरण मानक किट जैसे नहीं थे. वे साल 1932 में टाटा एविएशन सर्विस के तहत कराची और बंबई के बीच मालवाही विमान शुरू करने वाले भी पहले शख्स थे. उसके अगले साल व्यावसायिक एयरलाइन टाटा एयरलाइंस भी शुरू की गई. अंतरराष्ट्रीय उड़ान के नक्शे में भारत को पुख्ता स्थान दिलाना उनका सपना था. वह सपना 8 मार्च, 1948 को एयर इंडिया इंटरनेशनल के गठन के बाद साकार हुआ. उसकी बंबई से लंदन सेवा उसी साल 8 जून को शुरू हुई.

एयर इंडिया की विजेता बोली ऐसे समय में आई, जब महामारी से पस्त अर्थव्यवस्था खुलने लगी है, जिससे दुनिया में एयरलाइन कारोबार में जान लौटने की उम्मीदें बढ़ गई हैं. भारत में उड्डयन कारोबार को सबसे जोरदार झटका लगा है. 2020-21 में लॉकडाउन की वजह से यात्राओं पर प्रतिबंध लगने से इंडियन एयरलाइंस और हवाई अड्डों ने 22,400 करोड़ रु. का घाटा दर्ज किया है. महामारी और साथ में विमानन ईंधन की ऊंची कीमतों ने एयरलाइनों की जान निकाल दी. 2007-08 में इंडियन एयरलाइंस के विलय के बाद से ही घाटा झेल रही एयर इंडिया ने 31 मार्च 2020 को 70,820 करोड़ रुपए का घाटा दिखाया. उसका कर्ज 31 अगस्त को 61,562 करोड़ रुपए हो गया. टाटा घराने की एयरलाइनों ने भी कोई बढ़िया रंग नहीं दिखाया. खबरों के मुताबिक, एयरएशिया इंडिया का घाटा 2020-21 में पिछले साल के मुकाबले दोगुना होकर 1,533 करोड़ रुपए हो गया, जबकि विस्तारा का घाटा 1,612 करोड़ रुपए पर जा पहुंचा.

देश का बेहद प्रतिस्पर्धा वाला उड्डयन कारोबार 1950 के दशक से काफी बदल चुका है, जब एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण हुआ था. हालांकि इस क्षेत्र में बड़े अवसर भी हैं. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा (आइसीआरए) के मुताबिक, अगस्त में घरेलू हवाई यात्रियों में लगातार इजाफा दिखा. पिछले महीने की तुलना में यात्रियों में 31 फीसद का इजाफा हुआ और उनकी संख्या 66 लाख हो गई. टाटा घराना एयर इंडिया को कैसे नए रंग में ढालता है, यह देखना होगा, क्योंकि इंडिगो एयरलाइंस और पिछले दशक में पूर्ववर्ती जेट एयरवेज जैसे निजी खिलाड़ी उसका काफी बाजार दखल कर चुके हैं.

एयर इंडिया का पुराना गौरव जल्दी वापस लाना आसान शायद नहीं होगा, लेकिन दूसरे एयरलाइनों से उसे कुछ बढ़त हासिल है. एयर इंडिया की सबसे बड़ी बढ़त तो उसकी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें हैं, जिनसे उसकी दो-तिहाई कमाई होती है. उसके पास 130 विमानों का बेड़ा है और टाटा समूह के पास अब घरेलू हवाई अड्डों पर एयर इंडिया की 4,400 घरेलू और 1,800 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें के उतरने और पार्किंग करने की जगह पर नियंत्रण होगा. उसके अलावा विदेशी हवाई अड्डों पर भी 900 स्लॉट उसके जिम्मे होंगे. उसके पास दुनिया के कई हिस्सों में हजारों करोड़ रुपए की जायदाद भी होगी. हालांकि, ग्राहकों का भरोसा जीतना बहुत बड़ा काम होगा, लेकिन यह असंभव लक्ष्य भी नहीं है.

वहीं, जे.आर.डी. टाटा के साथ काम कर चुके उनके कुछ करीबी लोगों का कहना है कि चीजों को समझने के लिए उनके पास दो दृष्टिकोण थे: पहला यह कि हवाई यात्रा तभी किफायती बनेगी, जब उसका बाजार बड़ा बनेगा. दूसरा यह कि एयर इंडिया अपने क्षेत्र में तभी कामयाब खिलाड़ी बन पाएगी, जब वह यात्रियों को कुछ खास, कुछ अलहदा पेशकश करे. टाटा समूह के लिए एयर इंडिया का खोया गौरव वापस लौटाने के क्रम में यह सीख काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

Advertisement
Advertisement