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कुंभ मेलाः कोरोना का ग्रहण भारी

कोरोना का खौफ कुंभ में इस कदर व्याप्त हो गया है कि दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने महाकुंभ से लौटने वाले श्रद्धालुओं के लिए कोविड की आरटी पीसीआर जांच और होम आइसोलेशन अनिवार्य कर दिया है

कोरोना प्रकोप फैला 12 अप्रैल को हरिद्वार के घाट पर श्रद्घालुओं की भारी भीड़
कोरोना प्रकोप फैला 12 अप्रैल को हरिद्वार के घाट पर श्रद्घालुओं की भारी भीड़
अपडेटेड 27 अप्रैल , 2021

इस साल कुंभ में 21 अप्रैल को रामनवमी के पर्व स्नान पर भी महज 82 हजार लोगों ने गंगा स्नान किया. यह संख्या पिछले वर्षों के सामान्य स्नान की तुलना में भी काफी कम थी. हरिद्वार में पिछले कुंभ में पर्व स्नान पर करीब 10 लाख लोगों ने डुबकी लगाई थी. इस बार कोविड ने ऐसा आतंक बरपाया है कि 27 अप्रैल को आखिरी शाही स्नान के पहले ही घाटों पर भीड़ छंटने लगी है. कोविड संक्रमण के बढ़ते मामलों से कई अखाड़ों के अधिकांश संत हरिद्वार से विदा हो चुके हैं. मसलन, जिन 13 अखाड़ों के लिए आखिरी शाही स्नान का विशेष महत्व है, उनमें बस सात ही अखाड़े हरिद्वार में रह गए हैं.

18 अप्रैल तक विभिन्न आश्रमों के 80 संत कोविड पॉजिटिव पाए गए. 14 अप्रैल को मध्य प्रदेश के महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर वामी कपिल देव कोविड की वजह से स्वर्ग सिधार गए. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया है. विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार भी पॉजिटिव पाए गए. 11 मार्च को महाशिवरात्रि से 20 अप्रैल तक हरिद्वार में 8,251 लोग कोरोनावायरस संक्रमण से ग्रस्त पाए गए.

हालांकि, कोविड-19 बढ़ते प्रकोप से अखाड़ों का विवाद नहीं निबटा. कुंभ के समापन को लेकर अखाड़े बंट गए हैं. कोविड के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर तीन शाही स्नान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ को प्रतीकात्मक रूप से आयोजित करने की अपील की थी. उसके बाद सबसे बड़े जूना अखाड़े और कुछ सहयोगी अखाड़ों ने कुंभ समाप्ति की घोषणा की और देवताओं को विसर्जित कर अपने कैंप खाली कर दिए. लेकिन निर्मोही, निर्वाणी और दिगंबर अखाड़ों के संतों ने बैरागी कैंप में बैठक कर निर्णय लिया कि हरिद्वार महाकुंभ मेला प्रतीकात्मक नहीं हो सकता. वे अब भी 27 अप्रैल को होने वाले चौथे शाही स्नान को प्रत्यक्ष रूप से करने पर डटे हैं.

निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास कहते हैं, ''केंद्र और राज्य सरकारों के जो भी दिशानिर्देश होंगे, उनका पालन जरूर होगा.'' निर्वाणी अखाड़े के अध्यक्ष महंत धर्मदास के मुताबिक, प्रतीकात्मक कुछ नहीं होता. कुंभ में देवी, देवता, मां गंगा प्रत्यक्ष रहती हैं, इसलिए बैरागी अखाड़े प्रत्यक्ष शाही स्नान करेंगे. जूना अखाड़ा और उसके सहयोगी अग्नि और आह्वान अखाड़ों की ओर से देवता विसर्जित कर कुंभ समापन की घोषणा किए जाने से नाराज शंकराचार्य परिषद के सर्वपति शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि कुंभ समाप्त करने वाले साधु-संत शास्त्र नहीं जानते, वे कालनेमि के समान हैं. कुंभ एक नियत तिथि से शुरू होकर नियत तिथि पर ही समाप्त होता है.

यह किसी व्यक्ति विशेष के कहने पर शुरू या समाप्त नहीं होता. उनका कहना है कि जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर को कोई हक नहीं है कि वे कुंभ समाप्ति की घोषणा करें. वे आगे कहते हैं, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर हुई वार्ता के बाद आचार्य महामंडलेश्वर इतने उत्साहित हुए कि उन्होंने कुंभ स्नान को प्रतीकात्मक रूप से किए जाने के सुझाव पर कुंभ समाप्ति की घोषणा ही कर दी जबकि इसका उन्हें कोई अधिकार नहीं है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आचार्य महामंडलेश्वर का कोई पद नहीं होता है. केवल शंकराचार्य की अनुपस्थिति के कारण ही यह पद तत्कालीन व्यवस्था के तहत बनाया गया था. इसका अब कोई औचित्य है ही नहीं.''

उन्होंने कहा कि संतों को नेताओं की चाटुकारिता बंद करनी चाहिए. कुंभ के संबंध में अगर किसी को कुछ करने का अधिकार है तो वह केवल शंकराचार्य को है. महाकुंभ के आखिरी शाही स्नान से पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं. श्रीमहंत राजेंद्र दास और वैष्णव संप्रदाय के संतों ने सरकार से संन्यासी अखाड़ों के शाही स्नान करने पर रोक लगाने की मांग कर दी है. राजेंद्र दास का कहना है कि संन्यासी अखाड़ों ने कुंभ मेले से पहले ही मेला विसर्जन कर दिया है. अब उनके शाही स्नान करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है.

कोरोना का कहर

लेकिन इस विवाद से अलग, कोरोना का कहर बरपा रहा है. कुंभ के दौरान कई अखाड़ों के साधु-संतों में बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव मिलने से मेला प्रशासन में भी हड़कंप मच हुआ. हरिद्वार में मंगलवार 20 अप्रैल को कुल 609 नए कोरोना पॉजिटिव मिले. हरिद्वार में मिले 609 मामलों में से 79 लोग बाहरी राज्यों के हैं. इनके अलावा पंचायती अखाड़ा, शंभू पंचायती अटल अखाड़ा और शांति कुंज में भी कोरोना के कई केस मिले हैं. जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हरिद्वार में कोविड संक्रमण फैलने की असली वजह बाहरी राज्यों से आए श्रद्धालु हैं.

उन्हीं की वजह से कोविड का प्रसार हुआ है. इनमें हरिद्वार जिले के एक्टिव केस मात्र 28.12 फीसदी है जबकि 71.88 फीसदी मरीज बाहरी राज्यों के हैं. हरिद्वार महाकुंभ में 11 से 14 अप्रैल तक लगातार तीन बड़े स्नान हुए. इनमें 49 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई. इनमें कोविड संक्रमण की दृष्टि से संवेदनशील दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के श्रद्धालु बड़ी तादाद में शामिल थे.

11 अप्रैल से पहले जिले में औसतन 150 से 200 संक्रमित मिल रहे थे. 10 अप्रैल को 217 संक्रमित थे, लेकिन 11 अप्रैल को इनकी संख्या बढ़कर 372 हो गई.12 अप्रैल के शाही स्नान के अगले दिन संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 843 पहुंच गया. 10 से 19 अप्रैल तक जिले में कुल 5,909 संक्रमित मिले हैं. इनमें सीमा, मेला क्षेत्र और जिले की सभी तहसील क्षेत्रों की जांच शामिल हैं.

हरिद्वार के सीएमओ डॉ. एस.के. झा के अनुसार, बाहरी राज्यों से आए श्रद्धालुओं की भीड़ के बाद संक्रमण अचानक तेज हुआ है. महामंडलेश्वर कपिल देव दास की कोरोना से मौत के बाद अखाड़ों की छावनियों में रैंडम कोविड सैंपलिंग के लिए टीमें गठित की गईं. अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज सहित सभी प्रमुख संतों के जूना अखाड़े में सैंपल लिए गए, सैंपल देने वाले संतों से रिपोर्ट आने तक आइसोलेट रहने के लिए कहा गया. कुंभ मेला आईजी संजय गुंज्याल का दावा था कि मेला क्षेत्र की सीमाओं पर श्रद्धालुओं के कोविड सर्टिफिकेट की जांच की जा रही है. कोविड-19 टेस्ट का नेगेटिव सर्टिफिकेट न होने पर एक अप्रैल से 14 अप्रैल तक 56,000 श्रद्धालुओं को सीमा से ही वापस लौटाया गया. हालांकि यह काम इतना आसान नहीं है.

राज्य ने पहले ऐलान किया था कि श्रद्घालुओं के हरिद्वार में प्रवेश के लिए आरटी-पीसीआर निगेटिव रिपोर्ट और मेडिकल सर्टिफिकेट जरूरी है, लेकिन मेला को देखकर लगता है कि यह नियम बस कागज पर शोभा पाता है.

दूसरी समस्या यह है कि मेले से जो लोग अपने इलाकों और लोगों के बीच लौट रहे हैं, वे कोरोना का प्रकोप फैलाने का बड़ा कारण बन रहे हैं. यह कोविड के देश भर में प्रसार की बड़ी वजह बन रहा है. मध्य अप्रैल में संक्रमण के मामले 1.4 करोड़ तक पहुंच चुका है. 17 अप्रैल को 2,50,000 नए मामले मिले. ओडिशा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे कई राज्यों ने लौटते श्रद्घालुओं की टेस्टिंग और क्वारंटीन अनिवार्य कर दिया है. लेकिन संख्या बड़ी भारी है इसलिए न दूसरे राज्यों के लिए इतना आसान है, न उत्तराखंड के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट करना. ऐसे आयोजन में कोरोना फैलने की काफी आशंका के बाद प्रधानमंत्री को प्रतीकात्मक कुंभ की बात याद आई.

बहरहाल, जो होना था, वह तो हो चुका है. मेलाधिकारी दीपक रावत ने कहा कि स्नान के दिन कोविड-प्रोटोकॉल का पालन करवाना मुसीबत को न्योता देना हो सकता था इसलिए जिन दिनों स्नान नहीं थे, उन दिनों घाटों पर चेकिंग की गई.

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