
असम भारत के उत्तर-पूर्व अंचल का सबसे बड़ा राज्य है. यह 78,438 वर्ग किलोमीटर भूभाग पर फैला है जहां करीब 3.2 करोड़ लोग रहते हैं. इसे अक्सर लाल नदियों और नीली पहाड़ियों की धरती कहा जाता है, जिसका वास्ता महानद ब्रह्मपुत्र—जिसे असम में 'लोहित' (रक्त की तरह लाल) कहा जाता है—और उसके चारों तरफ नीले आसमान में विलीन होती पहाड़ियों से है. राज्य के वनों, चाय बागान और धान के खेतों की हरियाली मिलकर इसे ऐसी कुदरती खूबसूरती देते हैं जिसका कोई सानी नहीं है. पूर्वी हिमालय पर्वतमाला के दक्षिण में स्थित इस राज्य में दो नदियों, ब्रह्मपुत्र और बराक के चारों ओर फैली दो उर्वर घाटियां असम को जल संसाधन से समृद्ध बना देती हैं. दुनिया भर में यह न केवल एक सींग वाले गैंडे के घर के तौर पर जाना जाता है बल्कि यूनेस्को के दो विश्व धरोहर स्थल—काजीरंगा नेशनल पार्क और मानस वन्यजीव अभयारण्य—यहां हैं.
एक तरफ इतनी प्रचुर प्राकृतिक स्थिरता और शांति थी, तो दूसरी तरफ आजादी के बाद इस राज्य को सामाजिक और राजनैतक उथल-पुथल से गुजरना पड़ा, जिसने इसकी आर्थिक वृद्धि को भी पटरी से उतार दिया. 1960 के दशक के भाषाई आंदोलन और 1980 के दशक के असम आंदोलन से लेकर 1990 के दशक में चरमपंथी धड़ों की उग्रवादी गतिविधियों तक राज्य का इतिहास हिंसा और खून-खराबे की घटनाओं से भरा पड़ा है. यह भी एक प्रमुख वजह रही कि असम भारत के दक्षिणपूर्व एशियाई दरवाजे के तौर पर अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के बावजूद राज्य में निहित पूर्ण क्षमता और संभावनाओं को साकार नहीं कर पाया.
असम 1981 और 2000 के बीच महज 3.3 फीसद की सालाना आॢथक वृद्धि दर से बढ़ा, जबकि इस दौर में राष्ट्रीय औसत वृद्धि दर 6 फीसद थी. हालांकि चाय और पेट्रोलियम के रूप में असम देश को दो ऐसी चीजें देता है जो तकरीबन हरेक घर की प्रमुख जरूरत है, फिर भी जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) के लिहाज से असम भारत के राज्यों में 17वें पायदान पर खड़ा है.
बहरहाल, सदी के पलटा खाने के साथ राज्य में जो थोड़ी-बहुत शांति लौटी, उसकी बदौलत हालात बदले और राज्य आर्थिक वृद्धि और सामाजिक कल्याण को आगे बढ़ाने के रास्ते पर वापस आया. राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर और नागरिकता संशोधन कानून 2019 सरीखे विवादास्पद मुद्दों को लेकर पैदा हुई सामाजिक टूट-फूट जहां आज भी राज्य के सामाजिक-राजनैतिक माहौल में तारी है, वहीं हाल के वर्षों में असम ने आर्थिक वृद्धि पर बल देने वाले कई कार्यक्रम लागू किए, ताकि राज्य के बारे में अच्छी धारणा बनाकर भारत की मुख्यधारा से इसका भौगोलिक अलगाव कम किया जा सके. मिसाल के तौर पर, सर्बानंद सोनोवाल सरकार ने 2018 में विशाल व्यापार सम्मेलन—एडवांटेज असम: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट—का आयोजन किया, जिसमें मुकेश अंबानी सरीखे दिग्गज कारोबारियों ने हिस्सा लिया. राज्य ने उत्तर-पूर्व औद्योगिक और निवेश संवर्धन नीति तथा असम की औद्योगिक नीति भी लॉन्च की और इसके जरिए निवेशकों को वित्तीय प्रोत्साहन और बहुवर्षीय रियायतों की पेशकश की. साथ ही, राज्य की आइटी और पर्यटन नीतियों ने भी क्षेत्र विशेष के विकास पर खासा ध्यान दिया है.

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल कहते हैं, ''लोगों के स्वत:स्फूर्त समर्थन की बदौलत और पारदर्शिता तथा जवाबदेही पर हमारे अथक फोकस के बल पर हम कई सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं को कामयाबी के साथ लागू कर पाए हैं.'' असम को इस बात का भी बहुत फायदा मिला कि केंद्र सरकार ने राज्य पर बढ़-चढ़कर ध्यान दिया है, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मातहत, जिन्होंने उत्तरपूर्वी राज्यों को अक्सर भारत की वृद्धि के नए चालक बताया है. इन कोशिशों के नतीजे भी सामने आए हैं, जो इंडिया टुडे राज्यों की दशा-दिशा सर्वे की रैंकिंग में भी देखे गए, जब असम सबसे ज्यादा सुधरे हुए बड़े राज्यों की फेहरिस्त में पिछले तीन साल शीर्ष पर बना रहा है. सोनोवाल कहते हैं, ''असम की तरक्की एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजकाज में लोगों की भागीदारी और सहकारी संघवाद का शानदार उदाहरण है. हमें यकीन है कि असम प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करते हुए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है.''

मिसाल के तौर पर आप देखें कि जब सड़कों से जोड़ने की बात आती है तो राज्य ने बीते पांच सालों में अहम तरक्की होती देखी है. इसमें ब्रह्मपुत्र नदी पर दो बड़े पुल शामिल हैं, जिनमें एक भारत का सबसे लंबा 9.15 किलोमीटर का धोला-सादिया पुल और दूसरा 4.9 किलोमीटर लंबा बोगीबील पुल है, जो रेल और सड़क दोनों के लिए एशिया का सबसे लंबा संयुक्त पुल है. इस साल प्रधानमंत्री ने ब्रह्मपुत्र नदी पर एक और 19 किलोमीटर लंबे पुल की आधारशिला रखी है, जो भारत का सबसे लंबा पुल होगा और असम में धुबरी को मेघालय के फुलबारी से जोड़ेगा. प्रधानमंत्री अब आधारभूत ढांचे की एक और बहुप्रतीक्षित परियोजना पर जोर दे रहे हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीप माजुली को बाकी असम से जोड़ने वाला दो लेन का पुल है (मुख्यमंत्री विधानसभा में माजुली की ही नुमाइंदगी करते हैं). मुख्यमंत्री बताते हैं कि राज्य सरकार ने इन तीन बड़े पुलों के अलावा 1,000 से ज्यादा लकड़ी के पुलों को भी कंक्रीट के पुलों में बदला है. असम में अपने एक हालिया भाषण में मोदी ने आधारभूत ढांचे के विकास के मामले में राज्य की प्रगति को स्वीकार किया, ''असम आत्मनिर्भर भारत का अहम हिस्सा है, जहां 11,000 किमी लंबी सड़कों का निर्माण किया गया है.''

असम की अर्थव्यवस्था
साल 2020-21 में असम का जीएसडीपी मौजूदा मूल्यों पर 4.09 लाख करोड़ रुपए यानी भारत की जीडीपी का करीब दो फीसद था. भाजपा की अगुआई वाली मौजूदा सरकार के सत्ता संभालने के बाद 2015-16 और 2020-21 के बीच असम का जीएसडीपी 12.58 फीसद की सीएजीआर (चक्रवृद्धि सालाना वृद्धि दर) से बढ़ा. 2020-21 में राज्य की प्रति व्यक्ति आमदनी मौजूदा मूल्यों पर 1,30,970 रुपए थी, जिसकी वजह से राज्य निचले पायदान के राज्यों में ही अपनी जगह बना पाया. राज्य के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वसरमा कहते हैं, ''हम सामाजिक अशांति और असम की तरक्की में राजनैतिक दखलअंदाजी की विरासत में धंसे थे. लेकिन बीते पांच साल के कामों की रफ्तार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई ने पक्का कर दिया है कि असम जल्द ही देश के अग्रणी राज्यों में होगा.''
कृषि और रेशम उत्पादन
असम मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान राज्य है, जिसकी 85 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है और लगभग 70 प्रतिशत लोगों को कृषि क्षेत्र में रोजगार मिलता है. हालांकि, राज्य की जीएसडीपी में कृषि का योगदान सिर्फ 17 प्रतिशत है. चावल यहां का मुख्य भोजन है. असम मुख्य रूप से धान पैदा करता है लेकिन उत्पादकता दर खराब है. उदाहरण के लिए 2018 के आंकड़ों के अनुसार, असम 24.6 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती थी और 51.4 लाख टन चावल की पैदावार होती थी. भारत के चावल की खेती वाले राज्यों में असम नौवें स्थान पर है और देश की कुल चावल पैदावार के चार प्रतिशत से अधिक यह राज्य पैदा करता है. इसके विपरीत, चावल के चौथे सबसे बड़े उत्पादक राज्य तमिलनाडु ने केवल 20.4 लाख हेक्टेयर में धान की खेती करके 79.8 लाख टन चावल का उत्पादन किया, जो देश की कुल पैदावार का लगभग सात प्रतिशत है.

राज्य में उगाई जाने वाली अन्य फसलों में अनानास, केला, फूलगोभी, ब्रोकली, पपीता, गन्ना, हल्दी, जूट और आलू शामिल हैं. राज्य सरकार कृषि में सतत विकास को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र में प्रौद्योगिकी और कौशल विकास के उपयोग को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. केंद्र ने इसके लिए कई प्रोत्साहन भी प्रदान किए हैं. मिसाल के तौर पर, कामरूप (ग्रामीण) जिले के चायगांव में कुल 12 लाख डॉलर (8.7 करोड़ रुपए) की परियोजना लागत के साथ एक खाद्य प्रसंस्करण पार्क को मंजूरी दी है. ताजा और प्रसंस्कृत अदरक के लिए कृषि-निर्यात क्षेत्र को भी मंजूरी दी गई है.
असम में लगभग 60,000 परिवार रेशम उद्योग पर निर्भर हैं. एरी और पाट के अलावा, असम मूगा रेशम या 'गोल्डन सिल्क' का उत्पादन करता है. इसमें राज्य का एक और अनूठा योगदान है—दुनियाभर में होने वाले मूगा के कुल उत्पादन का लगभग 97 प्रतिशत असम में होता है. हालांकि, बढ़ते प्रदूषण के स्तर के कारण हाल के दिनों में मूगा रेशम के उत्पादन को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. राज्य सरकार ने इस स्थिति से उबरने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें 2018 में 10 वर्षों की अवधि के लिए 460 करोड़ रुपए के साथ शुरू हुआ 'मूगा मिशन' भी शामिल है.
बाजार में नकली उत्पादों की बाढ़ भी आ गई है, जिससे रेशम उद्योग के लिए खतरा पैदा हो गया है—पावरलूम पर तैयार बनारसी रेशम उत्पादों को असमिया रेशम के रूप में बेचा जा रहा है. इसके कारण मार्च 2013 में राज्य के रेशम उत्पादक शहर सुआलकुची में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए. 2016 में केंद्र ने सुआलकुची में बने रेशम उत्पादों के लिए एक आधिकारिक ट्रेडमार्क के लिए अपनी मंजूरी प्रदान की. कुछ उत्साहजनक रुझान रहे हैं—2017-18 में 157 टन कच्चे मूगा का उत्पादन किया गया था, जबकि उससे पहले के साल में यह 139 टन था.
उद्योग
हालांकि चाय, तेल और प्राकृतिक गैस राज्य के औद्योगिक परिदृश्य पर हावी रहे लेकिन असम सरकार पर्यटन, दूरसंचार और फार्मास्युटिकल्स जैसे अन्य उद्योगों को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है. मसलन, सन फार्मा ने उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए राज्य में लगभग 700 करोड़ रुपए का निवेश किया है.
पिछले चार साल में असम में 20,971 एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) और 105 बड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थापित की गईं. राज्य की सीमाएं बांग्लादेश, नेपाल और भूटान जैसे सार्क देशों के निकट हैं और सीमा-पार व्यापार की संभावनाओं के कारण निवेश की संभावना बढ़ जाती है.
इस समय राज्य में 20 औद्योगिक एस्टेट, तीन औद्योगिक विकास केंद्र, 11 एकीकृत बुनियादी ढांचा विकास डिपो, 17 औद्योगिक क्षेत्र, 12 विकास केंद्र, आठ मिनी औद्योगिक एस्टेट, एक निर्यात प्रोत्साहन पार्क और एक खाद्य प्रसंस्करण औद्योगिक पार्क हैं. गुवाहाटी के पास अमीनगांव में एक्सपोर्ट प्रमोशन इंडस्ट्रियल पार्क में लगभग 40 कंपनियां हैं, जो 4,000 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और लगभग 12,000 को परोक्ष रोजगार मुहैया करती हैं. राज्य भर में 11 एकीकृत बुनियादी ढांचा विकास केंद्र भी हैं, जिनमें से दो निर्माणाधीन हैं.
केंद्र ने बारपेटा जिले के पथसला और डिब्रूगढ़ जिले के मोरन में एमएसई-सीडीपी (सूक्ष्म और लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम) के तहत दो और परियोजनाओं को मंजूरी दी है. सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया की ओर से गुवाहाटी में एक सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क भी स्थापित किया गया है. सोनोवाल कहते हैं, ''हम अपनी पारिस्थितिकी की कीमत पर अर्थव्यवस्था को विकसित नहीं करना चाहते. अपने लगातार प्रयासों के कारण हम पिछले पांच वर्षों में 222 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ाने में सक्षम थे. गैंडे के अवैध शिकार के खतरे भी हमारे कार्यकाल के दौरान समाप्त हो गए हैं—हमने 240 से ज्यादा शिकारियों को गिरफ्तार किया और उनमें से 17 को फास्ट-ट्रैक अदालतों में दोषी ठहराया गया है.'' जबकि 2012 और 2015 के बीच असम में शिकारियों ने 106 गैंडों को मार दिया था, वहीं जून 2016 से मई 2020 तक केवल 29 गैंडों का शिकार हुआ था.
चाय: असम में दुनिया का सबसे बड़ा चाय बागबानी क्षेत्र है. वैश्विक चाय उत्पादन का लगभग सातवां हिस्सा और भारत के कुल चाय उत्पादन का 53 प्रतिशत हिस्सा असम में उत्पादित होता है. असम के लगभग 17 प्रतिशत श्रमिक इस क्षेत्र में कार्यरत हैं. राज्य में 765 से अधिक चाय बागान हैं, साथ ही साथ 80,000 से अधिक पंजीकृत छोटे चाय उत्पादक हैं. वित्त वर्ष 20 में असम से 31.246 करोड़ डॉलर (लगभग 2,300 करोड़ रुपए) की कुल चाय का निर्यात हुआ.
तेल और प्राकृतिक गैस: असम भारत के सबसे पुराने तेल उत्पादक राज्यों में से एक है. 2018-19 में असम ने 42 लाख टन कच्चे तेल का उत्पादन किया, जो देश में तीसरा सबसे अधिक उत्पादन है और कुल उत्पादन का 13 प्रतिशत है. यह प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा उत्पादक था. 3,289 एमएमएससीएम (मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर) गैस का उत्पादन हुआ जो कुल उत्पादन का 10 प्रतिशत था.
सेवाएं
राज्य के सेवा क्षेत्र की बात करें तो पर्यटन इसके तेजी से बढ़ते योगदानकर्ताओं में से एक के रूप में उभरा है. राज्य की जीएसडीपी का 5.5 प्रतिशत और कुल रोजगार का लगभग 10.5 प्रतिशत इस क्षेत्र से आता है. राज्य सरकार की कई पहलें, मसलन 'ऑसम असम' या अद्भुत असम प्रचार अभियान बहुत कारगर साबित हो रही हैं. इंडिया टुडे की राज्यों की रैंकिंग में सबसे अधिक सुधार प्रदर्शन करने वाले राज्यों में असम 2018 के 20वें स्थान से सुधरकर 2020 में बारहवें स्थान पर पहुंच गया. असम में आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, हालांकि 2020 में महामारी के कारण पर्यटन बुरी तरह प्रभावित हुआ था.
सामाजिक क्षेत्र
राज्य में सामाजिक-राजनैतिक अस्थिरता का एक लंबा इतिहास रहा है. राज्य की खराब बुनियादी ढांचे और मुख्य भूमि से इसकी भौगोलिक दूरी ने आर्थिक विकास और समावेशी विकास में असम के प्रदर्शन को बाधित किया है. शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे दो प्रमुख सामाजिक सूचकांकों में असम का प्रदर्शन नीचे समझा जा सकता है.
शिक्षा: इंडिया टुडे के राज्यों की स्थिति के सर्वेक्षण में असम ने शिक्षा क्षेत्र में लगातार अपना प्रदर्शन सुधारा है. शिक्षा पर कुल व्यय, साक्षरता दर, प्राइमरी और मिडल स्कूलों में दाखिला लेने वाले लड़कों की तुलना में लड़कियों का अनुपात, विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात, प्राथमिक और दसवीं तक की शिक्षा में पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों की दर और स्कूलों, कॉलेजों की संख्या जैसे मापदंडों से मापा जाता है. इसे तीन वर्षों में शीर्ष 10 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में और पिछले तीन वर्षों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले शीर्ष पांच राज्यों में स्थान मिला है.
हाल ही मंगलदोई में असम स्किल यूनिवर्सिटी के रूप में पूर्वोत्तर में अपनी तरह के पहले संस्थान की नींव रखने वाले सोनोवाल कहते हैं, ''हमने नौ इंजीनियरिंग कॉलेजों, 32 पॉलिटेक्निक संस्थानों और 400 से अधिक कौशल विकास केंद्रों को जोड़ा है. हमने जोरहाट में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, माजुली में एक सांस्कृतिक विश्वविद्यालय, चबुआ में एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और लखीमपुर, बजाली, होजाई और नलबाड़ी में चार अन्य विश्वविद्यालयों की स्थापना की है. 2020 में राज्य सरकार ने धेमाजी जिले के गोगामुख में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का उद्घाटन किया. राज्य में शिक्षा क्षेत्र में भी अब तक का सबसे बड़ा भर्ती अभियान चला. राज्य के शिक्षा मंत्री का भी दायित्व संभाल रहे सरमा कहते हैं, ''पिछले पांच साल में हमने 71,000 शिक्षकों की भर्ती करके शिक्षा विभाग में रिक्त पदों को भरा है.''
स्वास्थ्य:
राज्य में संस्थागत प्रसव यानी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों के प्रतिशत में भी वृद्धि देखी गई है जो 2015-16 में 70.6 प्रतिशत से बढ़कर 2019-20 में 91 प्रतिशत हो गई है. परिणामस्वरूप यह बदलाव मातृ मृत्यु दर (23.67 प्रतिशत) और शिशु मृत्यु दर (6.38 प्रतिशत) में आने वाली गिरावट के लिए सहयोगी महत्वपूर्ण फैक्टर्स में से एक रहा है. ऐसी उपलब्धियां वार्षिक इंडिया टुडे राज्यों की दशा-दिशा रैंकिंग में प्रतिबिंबित होती हैं कि यह राज्य पिछले तीन वर्षों में देश के शीर्ष पांच सबसे बेहतर राज्यों में से एक रहा है.
नीति आयोग के स्वास्थ्य सूचकांक के मुताबिक, असम को समग्र और वृद्धिशील प्रदर्शन के मामले में 'अचीवर' के रूप में वर्गीकृत किया गया था. मुख्यमंत्री सोनोवाल कहते हैं, ''हमने राज्य में पिछले पांच वर्षों में आठ नए मेडिकल कॉलेज बनाए हैं, जिनमें एक एम्स और 18 कैंसर अस्पताल शामिल हैं.'' स्वास्थ्य विभाग पर भी अपनी पकड़ रखने वाले सरमा कहते हैं कि ''स्वास्थ्य पर निरंतर पैसा खर्च करके और केंद्र सरकार के सहयोग से हम सबसे अच्छी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा को सुलभ और सस्ती बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.''
कानून और व्यवस्था
एनसीआरबी यानी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की 2019 की रिपोर्ट इस बात का खुलासा करती है कि देश में आइपीसी (भारतीय दंड संहिता) के तहत कुल संज्ञेय मामलों में असम की संख्या केवल 3.8 प्रतिशत है जो एक लाख लोगों पर 358.9 है और यहां की अपराध दर देश में तीसरे पायदान पर है. जैसा कि आपको विदित होगा कि राष्ट्रीय औसत अपराध दर 241.2 है. हत्याओं के मामले में असम की भारत में चौथी उच्चतम दर है और यहां अपहरण के कुल 56 मामले दर्ज किए गए जो देश में तीसरे उच्चतम स्थान पर हैं. हालांकि राज्य में होने वाले बलात्कार की उच्च दर की ओर सरकार का उतना ध्यान नहीं गया जितने की जरूरत थी, राज्य में प्रति 1,00,000 लोगों पर बलात्कार की 10.5 घटनाएं हुई हैं जो कि भारत में तीसरी सबसे बड़ी दर है.
एनसीआरबी की 2019 की रिपोर्ट में यह भी पता चला कि असम में पुलिसकर्मियों के खिलाफ 397 मामले दर्ज किए गए, जो देखा जाए तो देश में तीसरी सबसे बड़ी संख्या है. राज्य पहले से ही पुलिसकर्मियों की कमी से जूझ रहा है, यहां प्रति 1,00,000 लोगों पर 59 पुलिसकर्मी हैं जबकि लगभग समान आबादी वाले केरल में 99 और तेलंगाना में 90 हैं. फिर भी राज्य सरकार को इतना क्रेडिट तो जाना ही चाहिए कि असम में प्रति 1,000 लोगों पर लंबित मामलों की संख्या सिर्फ 9 है जो देश में सबसे कम है. इसके अलावा, राज्य ने आतंकी गतिविधियों पर लगाम कसने पर भी उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है. जब भाजपा की अगुवाई वाली सरकार सत्ता में आई थी तब 2016 में 45 लोग मारे गए थे, जबकि 2020 में केवल सात लोग आतंकी हिंसा के शिकार हुए थे. जहां 2001 में 284 लोग आतंकवादी हिंसा की चपेट में आए थे वहीं 2019 में यह संख्या सिर्फ दो थी.
असम में जैसे-जैसे शांति बहाल होती जा रही है, राज्य धीरे-धीरे ही सही सामाजिक और आर्थिक प्रगति की दिशा में लगातार कदम आगे बढ़ाए जा रहा है. सरकार को विरासत में उग्रवाद और अशांति का माहौल मिलने के बावजूद, असम को देश में अग्रणी राज्यों के साथ-साथ चलने के लिए अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है, इसके लिए सरकार हरदम राज्य के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित किए हुए है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब केंद्र सरकार उत्तर-पूर्व क्षेत्र पर विशेष ध्यान दे रही है. सही मायने में असम मौजूदा समय में दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है.

