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उत्तराखंडः अखाड़ों में दो-दो हाथ

कुंभ से पूर्व ही इसके मुख्य आकर्षण माने जाने वाले अखाड़ों के विवाद आने लगे सामने

अस्थिर वोटबैंक कैलाशानंद के पट्टाभिषेक में उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य 
अस्थिर वोटबैंक कैलाशानंद के पट्टाभिषेक में उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य 
अपडेटेड 11 फ़रवरी , 2021

उत्तराखंड सरकार ने हरिद्वार कुंभ के लिए सभी 13 अखाड़ों को एक-एक करोड़ रुपए की धनराशि देने की घोषणा क्या की, इसके बाद अखाड़ों से अलग अन्य आश्रमों ने भी यह मांग शुरू कर दी. इन आश्रमों की मांग है कि जिस तरह सभी अखाड़ों को कार्य कराने के लिए धनराशि दी जा रही है, उसी तरह आश्रम आदि में निर्माण के लिए भी उत्तराखंड सरकार को धनराशि देनी चाहिए. लेकिन सरकार इस पर मौन साधे हुए है. 

अखाड़ों को एक करोड़ रुपए की धनराशि देने संबंधी घोषणा के बाद किन्नर अखाड़ा और परी अखाड़ा नामक अपेक्षाकृत नए अखाड़े भी सामने आए हैं. इन दोनों अखाड़ों ने भी अन्य अखाड़ों को मिली एक करोड़ रुपए की तरह उन्हें भी इतनी ही राशि और सुविधाएं देने की मांग मेला प्रशासन से की है. लेकिन मेला प्रशासन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद जिसे अखाड़ा मानेगा उसे ही सुविधाएं मिलेंगी.

जहां तक अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का प्रश्न है इसके अध्यक्ष नरेंद्र गिरि किन्नर और परी अखाड़ों का विरोध करते रहे हैं, जबकि अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि इन अखाड़ों के प्रति नरम दीखते हैं. किन्नर अखाड़े ने 2019 के प्रयागराज कुंभ में जूना अखाड़े के हरि गिरि की सहानुभूति मिलने के चलते उनके अखाड़े के साथ ही शाही स्नान किया था.

हरिद्वार कुंभ में भी किन्नर अखाड़ा जूना अखाड़े के साथ ही शाही स्नान करेगा, यह घोषणा स्वयं किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी कर चुकी हैं. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि कहते हैं कि यह अखाड़ा परिषद सनातन धर्म और संन्यास प्रक्रिया से होकर गुजरने वाली साध्वी का सम्मान करता है और कुंभ में उनकी सुविधा तथा व्यवस्था की मांग का समर्थन भी करता है, लेकिन परिषद किसी भी फर्जी साधु-संन्यासी चाहे वह महिला हो या पुरुष, उसकी किसी मांग का समर्थन नहीं करता है. 

परी अखाड़े की साध्वी त्रिकाल भवंता ने भी कुंभ मेला अधिकारियों से मिलकर उन्हें भी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की घोषणा के अनुसार एक करोड़ रुपए देने, अपने अखाड़े के लिए भूमि आवंटन, कुंभ में पेशवाई और शाही जुलूस स्नान आदि करने की अलग व्यवस्था करने की मांग की है. इस मामले में मेला कमेटी ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अधिकृत प्रस्ताव के आधार पर सरकारी सहमति से अपनी कार्रवाई करने की बात कह दी.

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने कह दिया कि साध्वी त्रिकाल भवंता को वे साध्वी और शंकराचार्य नहीं मानते. नरेंद्र गिरि ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और वे स्वयं महिला के तौर पर त्रिकाल भवंता का सम्मान करते हैं, लेकिन साधु और संन्यासी के तौर पर उन्हें कतई मान्यता नहीं देते.

पिछले 1 दिसंबर को प्रयागराज में हुई अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक में अखाड़ा परिषद ने किन्नर अखाड़ा और परी अखाड़े पर प्रतिबंध लगा दिया था. इस फैसले के बाद अखाड़ा परिषद में दो-फाड़ होता नजर आया. अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे उनकी अनुपस्थिति में लिया गया निर्णय बताते हुए किन्नर अखाड़े का समर्थन किया था.

इसके बाद किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने अपने बयान में कहा कि पिछले दिनों प्रयागराज में हुई बैठक में कुछ चुनिंदा लोगों ने किन्नर अखाड़े के ऊपर कटाक्ष करते हुए कुछ शब्द कहे हैं, जिन्हें वे पूर्णतया नकारती हैं. उन्होंने कहा कि किन्नरों का वजूद आज से नहीं बल्कि आदिकाल से है. महंत हरि गिरि ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रस्ताव से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए किन्नर अखाड़ा का पक्ष लिया.

उन्होंने कहा है कि प्रयागराज में हुई अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक में लाए गए इस तरह के किसी प्रस्ताव की न तो उन्हें कोई जानकारी थी और न ही उस पर उनकी कोई सहमति ली गई थी. उन्होंने अखाड़ा परिषद के निर्णय का विरोध करते हुए चेतावनी दे डाली कि अगर किन्नर अखाड़ा को हरिद्वार कुंभ में मान्यता नहीं मिलती है तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे. 

इसके बाद महंत नरेंद्र गिरि ने बयान दिया कि अगर जूना अखाड़ा किन्नर अखाड़ा को अपने साथ स्नान में भाग लेने की अनुमति देता है तो उन्हें कोई शिकायत नहीं. उन्होंने किन्नर अखाड़ा को अलग अखाड़े के रूप में मान्यता देते हुए उसे हरिद्वार कुंभ में शिरकत करने की अनुमति दिए जाने का विरोध किया.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के किन्नर और परी अखाड़े के विरोध का असर यह हुआ कि परी अखाड़ा प्रमुख साध्वी त्रिकाल भवंता ने निरंजनी अखाड़े के सचिव के रूप में नरेंद्र गिरि की ओर से निरंजनी अखाड़े में आचार्य महामंडलेश्वर के पद पर कैलाशानंद गिरि के मकर संक्रांति पर हुए पट्टाभिषेक समारोह का विरोध शुरू कर दिया.

उन्होंने इस मामले की सरकार से जांच कराने की मांग कर इस समारोह को धर्मविरुद्ध बता दिया. उनका तर्क है कि अखाड़ों की प्राचीन परंपरा के अनुसार, आचार्य महामंडलेश्वर पद पर एक ही व्यक्ति रह सकता है और निरंजनी अखाड़े ने दो साल पहले ही इस पद पर स्वामी प्रज्ञानानंद को बैठा दिया था. उन्होंने कहा कि नरेंद्र गिरि ने पैसा लेकर इस गरिमामयी पद पर नए संत को बैठा दिया है, इसलिए इसकी सरकार जांच करे.

मकर संक्रांति पर हुए बहुप्रतीक्षित पट्टाभिषेक में नरेंद्र गिरि समेत बड़ी संख्या में सभी 13 अखाड़ों के साधु-संत तो मौजूद थे, लेकिन इस पर शुरू हुए विवाद के कारण उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने इससे दूरी बना ली. वहीं, इस अखाड़े ने इन सबको इस पट्टाभिषेक में पधारने का निमंत्रण दिया था.

त्रिवेंद्र सिंह रावत तो हरिद्वार में मौजूद रहने के बाद भी इस कार्यक्रम में नहीं गए. दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी और गायिका अनुराधा पौडवाल इस कार्यक्रम में जरूर पहुंचे, लेकिन वे भी इस अवसर पर गायन के लिए शामिल हुए. उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण, आरएसएस के इंद्रेश कुमार, दिनेश, शिव प्रकाश, युद्धवीर, शरद कुमार, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, सुबोध उनियाल समेत उत्तराखंड के कई विधायक जरूर इस पट्टाभिषेक में गए.

परी अखाड़े के अलावा, साल 2019 में निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर बनाए गए स्वामी प्रज्ञानानंद ने इस पट्टाभिषेक को लेकर पहले ही निरंजनी अखाड़े को कठघरे में खड़ा कर दिया था. स्वामी प्रज्ञानानंद गिरि ने कहा कि मार्च 2019 में काशी में शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज, सभी 13 अखाड़ों के संत महापुरुषों और सनातन धर्म के विद्वानों की उपस्थिति में उनका श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर के पद पर अभिषेक किया गया था.

तभी से वे इस अखाड़ा निरंजनी के आचार्य महांडलेश्वर हैं. स्वामी प्रज्ञानानंद के अनुसार, उन्होंने अभी इस पद से त्यागपत्र भी नहीं दिया है. उनका कहना है कि ऐसे में उनके पद पर रहते किसी अन्य को आचार्य महामंडलेश्वर नहीं बनाया जा सकता.

इस तरह कुंभ से पहले इन अखाड़ों की आपसी खींचतान सतह पर आ गई है.

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