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उत्तर प्रदेशः चुनावी रेस के लिए तैयार होती साइकिल

अगले साल के आरंभ में होने वाले प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने जमीनी तैयारी शुरू कर सत्तारुढ़ दल को चुनौती देने का व्यापक कार्यक्रम शुरू किया है

मिशन 2022: लखनऊ स्थित सपा दफ्तर में कार्यकर्ताओं से मुखातिब मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव
मिशन 2022: लखनऊ स्थित सपा दफ्तर में कार्यकर्ताओं से मुखातिब मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव
अपडेटेड 11 फ़रवरी , 2021

लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर आगे बढ़ते ही पूरी सड़क समाजवादी पार्टी के नेताओं के होर्डिंग और पोस्टर से पटी दिखने लगती है. बीच-बीच में कौमी एकता द्वार नाम से तोरण द्वार भी बने हैं जिसमें सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखि‍लेश यादव के नाम के आगे बड़े अक्षरों में शांतिदूत लिखा है. बांस की बल्लियों के ढांचे पर लाल कपड़ा लपेट कर बनाए गए इन तोरण द्वार पर ''सबका हित, सबका सम्मान, यही है समाजवादी की पहचान'', ''चर्चा है पूरे देश में, कुछ तो है अखि‍लेश में'' जैसे नारे सपा की राजनीति का अक्स उजागर कर रहे हैं. विक्रमादित्य मार्ग पर 19 नंबर की कोठी जैसे-जैसे नजदीक आती जाती है सपा कार्यकर्ता और उनकी गाड़ियों से सड़क संकरी होती जाती है.

यही सपा का प्रदेश मुख्यालय है. मंगलवार 19 जनवरी को कई दिन कड़ाके की ठंड के बाद धूप निकली तो दोपहर 12 बजे सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव पार्टी मुख्यालय के भीतर लॉन में कार्यकर्ताओं के बीच बैठकर उनसे फीडबैक लेने लगे. सपा अध्यक्ष अखि‍लेश यादव भी सुबह 11 बजे से प्रदेश के अलग अलग जिलों से कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में व्यस्त थे. काम निबटा कर अखि‍लेश भी मुलायम सिंह यादव के साथ लॉन में बैठ गए. यहां मौजूद हर कार्यकर्ता से बारी-बारी से मिलने के बाद अखि‍लेश बरेली में होने वाले प्रशि‍क्षण शि‍विर के संबंध में आयोजित बैठक में व्यस्त हो गए लेकिन मुलायम दोपहर करीब साढ़े तीन बजे तक कार्यकताओं के साथ बैठे रहे.

सपा में बाप-बेटे की जोड़ी वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है. पिछले कुछ दिन बीमार रहने के बाद मुलायम सिंह यादव प्रदेश मुख्यालय में कार्यकर्ताओं के बीच बैठकर हर जिले का राजनैतिक तापमान आंकते हैं तो अखि‍लेश यादव नेताओं के साथ लंबी बैठकें कर साइकिल को तेज दौड़ाने का खाका खींचते हैं. विधानसभा चुनाव के लिए सपा को तैयार करने के लिए अखि‍लेश यादव ने प्रदेश भर में चलने वाले सपा के सघन प्रशि‍क्षण शि‍वि‍रों का खाका खींचा है. चित्रकूट में 7 जनवरी से शुरू हुए तीन दिवसीय प्रशि‍क्षण शि‍विर में अखि‍लेश की बनाई 20 सदस्यीय टीम ने समाजवादी विचारधारा, देश-विदेश के आर्थिक सरोकार, केंद्र और प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के विरोध में जनता का समर्थन जैसे कई मुद्दों पर कार्यकर्ताओं को प्रशि‍क्षि‍त किया. चित्रकूट, बरेली में आयोजित हो चुके ये प्रशि‍क्षण शि‍विर ऐसे जिलों में आयोजित किए जा रहे हैं, जहां आठ से दस विधानसभा क्षेत्रों के सपा कार्यकर्ताओं को बुलाकर प्रशि‍क्षित किया जा सके.

चुनाव के लिए तैयार होती साइकिल
चुनाव के लिए तैयार होती साइकिल

समाजवादी पार्टी किसानों के मुद्दे पर मुखर है. पार्टी ने पिछले वर्ष 7 दिसंबर से सभी जिलों में किसान यात्राओं का आयोजन किया था. 23 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर पार्टी किसान सभाओं का आयोजन किया था. सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम बताते हैं, ''25 समाजवादी किसान घेरा कार्यक्रम शुरू किया गया. इसमें गांव-गांव चौपाल लगाकर किसानों, मजदूरों, नौजवानों की समस्याओं पर चर्चा कर दिल्ली के आसपास चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन किया गया.'' 25 दिसंबर से लगातार चल रहे इस कार्यक्रम में सभी जिलों में सपा के सेक्टर प्रभारी ब्लॉक प्रभारी कार्यकर्ताओं के साथ बूथ स्तर पर किसानों के साथ बैठक कर रहे हैं. इस बैठक में सपा नेता केंद्र सरकार के कृषि बिल को किसानों का विरोधी बताते हुए जागरूक कर रहे हैं.

स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने हर जनपद में युवा घेरा कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया था. सपा के युवा विधानपरिषद सदस्य उदयवीर सिंह कहते हैं, ''ब्लॉक स्तर पर आयोजित हो रहे युवा घेरा कार्यक्रम में पार्टी के नेता युवाओं के बीच जाकर भाजपा सरकार में बेरोजगारी, घटती नौकरियां और खराब कानून व्यवस्था पर चर्चा कर लोगों को जागरूक कर रहे हैं.'' युवाओं के बीच पैठ बढ़ाने के लिए सपा ने अपने 'यूथ फ्रंटल संगठनों' को जिम्मेदारी सौंपी है. बलिया के रहने वाले समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद गि‍रि, मुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष लखनऊ के रहने वाले अनीस राजा, समाजवादी छात्रसभा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह देव को सपा ने उनके संगठनों के जरिए युवाओं के बीच भाजपा सरकार की छात्र विरोधी नीतियों का विरोध करने के साथ सपा सरकार के दौरान युवाओं के हितों के लिए हुए कार्यों का प्रचार करने की जिम्मेदारी दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने 22 जनवरी, 2016 को लखनऊ के बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह 'रोहित हम शर्मिंदा हैं, द्रोणाचार्य जिंदा है.', 'मोदी वापस जाओ' जैसे नारे लगाने वाले पूर्व छात्र रामकरन 'निर्मल' को सपा ने 'उत्तर प्रदेश समाजवादी लोहिया वाहिनी' का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर युवाओं खासकर दलितों के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंप दी है. कौशांबी के चरवां गांव के दलित धोबी उपजाति से संबंध रखने वाले 35 वर्षीय रामकरन को तो मोदी के हाथों की एलएलएम का गोल्डमेडल भी मिलना था.

जैसे-जैसे वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव करीब आ रहा है दूसरी पार्टियों से सपा ज्वाइन करने वाले नेताओं की संख्या में इजाफा हो रहा है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से नाराज नेताओं की पहली पसंद साइकिल है. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन करने वाली बसपा और सपा की राहें चुनाव के बाद अलग हो गई थीं लेकिन इनके बीच तल्खी तब चरम पर पहुंची जब पिछले वर्ष 28 अक्तूबर को राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा से करीबी दिखाने वाली बसपा के विधायकों ने अपनी पार्टी से बगावत कर दी. बसपा विधायक चौधरी असलम अली, असलम राइनी, मुज्तबा सिद्दीकी और हाकिम लाल बिंद ने राज्यसभा चुनाव के चुनाव अधि‍कारी को बसपा प्रत्याशी के नामांकन में अपने हस्ताक्षर को फर्जी बताया और नाम वापस लेने की अर्जी दी. इन विधायकों ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखि‍लेश यादव से भी मुलाकात की थी.

इससे गुस्साई बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सपा को हराने के लिए भाजपा का सहयोग करने की घोषणा कर दी थी. 16 जनवरी को बसपा से निष्कासित पूर्व विधायक योगेश वर्मा अपनी पत्नी सुनीता वर्मा जो कि मेरठ की महापौर हैं, के साथ सपा में शामिल हो गए. योगेश को पत्नी समेत सपा में शामिल कराने में मेरठ में पार्टी के युवा नेता अतुल प्रधान में बड़ी भूमिका निभाई है. मेरठ विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग के पूर्व प्रोफेसर रमेश चौधरी बताते हैं, ''पश्चिमी यूपी की दलित राजनीति में पकड़ रखने वाले योगेश वर्मा के सपा में आने से पंचायत चुनाव में साइकिल मजबूत होगी.

योगेश अपनी पत्नी सुनीता वर्मा को मेरठ का मेयर निर्वाचित कराकर अपनी राजनैतिक क्षमता जाहिर कर चुके हैं.'' बरेली से बसपा के पूर्व विधायक विजयपाल सिंह, मिर्जापुर से पूर्व विधायक श्रीराम भारती, राठ के पूर्व विधायक अनिल अहिरवार, बसपा सरकार में मंत्री रहे तिलक चंद अहिरवार, पूर्व विधान परिषद सदस्य महेश आर्या, पूर्व मंत्री राजेंद्र कुमार, पूर्व विधायक बब्बू खान, मुजफ्फरनगर से पूर्व विधायक अनिल जाटव, पूर्व सांसद दाऊद अहमद, अलीगढ़ से कोल विधायक जमीरउल्लाह हाथी का साथ छोड़ साइकिल की सवारी शुरू कर चुके हैं. बड़ी संख्या में दूसरी पार्टियों के नेताओं के सपा में आने से 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले टिकट की होड़ और गुटबाजी शुरू होने की आशंका जताई जा रही है. नरेश उत्तम बताते हैं, ''प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर मैंने स्वयं सपा ज्वाइन करने वाले हर नेता से बात की है. सभी नेताओं की कोई विधानसभा चुनाव में टिकट जैसी कोई शर्त नहीं है.''

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 'मिशन 2022' की कामयाबी के लिए धार्मिक नगरी चित्रकूट से 7 जनवरी को पार्टी के तीन दिवसीय प्रशि‍क्षण शि‍विरों की शुरुआत की. 8 जनवरी को घने कोहरे के बीच अखि‍लेश ने समर्थकों के साथ कामतानाथ और जय सियाराम के जयकारों के साथ पंचकोसी परिक्रमा की. चित्रकूट के दौरे ने अखि‍लेश की बदलती सियासत की झलक पेश की है. चित्रकूट के समाजसेवी संदीप रिछारिया बताते हैं, ''उत्तर प्रदेश की सियासत में भाजपा की हिंदू वोटरों पर मजबूत पकड़ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हिंदुत्व के तेवर को देखते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी यह बात समझ गए हैं कि उन्हें मुस्लिम समर्थक छवि से बाहर निकलकर सॉफ्ट हिंदुत्व की सियासी छवि बनानी ही पड़ेगी.'' हिंदुत्व की राजनीति से सार्वजनिक तौर पर परहेज करने वाले अखिलेश यादव अब मंदिरों और धार्मिक प्रतीकों की सियासत करने से परहेज नहीं कर रहे हैं.

नए वर्ष की शुरुआत में 2 जनवरी को अखि‍लेश यादव ने अयोध्या के संतों को लखनऊ में पार्टी मुख्यालय बुलाकर उनसे उनकी समस्याओं को जानकारी ली थी. 'अयोध्या कार्ड' खेलते हुए अखिलेश यादव ने घोषणा की कि आने वाले समय में सपा की सरकार बनने पर अयोध्या नगर निगम के सभी टैक्स समाप्त कर दिए जाएंगे. सपा की सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति पर नरेश उत्तम का कहना है, ''सपा सभी धर्मों और महापुरुषों का आदर करती है. अखि‍लेश यादव का पूरा ध्यान तो विकास पर ही है.'' जिलों का दौरा करने के दौरान अखि‍लेश यादव कार्यकर्ताओं के सामने सपा सरकार के दौरान उस जिले में हुए विकास कार्यों को गिनाते हैं. चित्रकूट में पार्टी के तीन दिवसीय प्रशि‍क्षण शि‍विर में पहुंचे अखि‍लेश यादव ने 8 जनवरी को यहां की मंदाकिनी नदी को उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद लखनऊ की गोमती नदी की तरह विकसित करने की घोषणा की थी.

इस तरह अखि‍लेश यादव सॉफ्ट हिंदुत्व के साथ एक विकास पुरुष की छवि बनाने की कोशि‍श कर रहे हैं. यह रणनीति कितना कारगर होगी यह तो वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव ही बताएगा.

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