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उत्तराखंडः हरिद्वार कुंभ के लिए तैयार

कोरोना काल में होने जा रहे कुंभ के लिए हरिद्वार सज-धज कर तकरीबन तैयार है. लेकिन केंद्र के एसओपी के अनुसार इसका आयोजन कराना राज्य के लिए चुनौती

बैरागी कैंप और कनखल को जोडऩे वाला पुल (नीचे दाएं)
बैरागी कैंप और कनखल को जोडऩे वाला पुल (नीचे दाएं)
अपडेटेड 11 फ़रवरी , 2021

हरिद्वार में इस साल होने वाले कुंभ को लेकर केंद्र सरकार की ओर से जारी की गई स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसीजर (एसओपी) के बाद प्रदेश सरकार के लिए कुंभ कराना एक चुनौती बन गया है. उत्तराखंड की कैबिनेट ने केंद्र की एसओपी के अनुरूप कुंभ की व्यवस्था कराने के लिए राज्य स्तर पर भी एसओपी जारी करने को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को अधिकृत किया है. अब मुख्यमंत्री अखाड़ा परिषद से बातचीत करने के बाद राज्य में कुंभ संपन्न करने के लिए एसओपी की शर्तें तय कर सकेंगे. 

जहां तक कुंभ की तैयारियों का सवाल है शहरी विकास सचिव शैलेश बगोली के अनुसार, कुंभ के अधिकतर काम पूरे हो गए हैं. बचे हुए कामों को पूरा करने के लिए 15 फरवरी तक का वक्त विभागों को दिया गया है. कुंभ की निगरानी उत्तराखंड हाइकोर्ट भी कर रहा है. हाइकोर्ट ने केंद्र से कुंभ के लिए एसओपी जारी करवाने के निर्देश राज्य सरकार को दिए थे. उसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सात पन्नों का एक एसओपी जारी किया.

कुंभ और पर्व स्नान पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ हरिद्वार उमडऩे की संभावना को देखते हुए मेला पुलिस-प्रशासन ने हर परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग प्लान तैयार करने का दावा किया है. लेकिन पिछली मकर संक्रांति के पर्व स्नान में जिस तरह भीड़ उमड़ी उसमें ही कोविड काल से जारी पुरानी केंद्रीय एसओपी का पालन करवाना पुलिस को भारी पड़ गया. इस स्नान में सात लाख से अधिक श्रद्धालु स्नान करने पहुंच गए थे.  

प्रदेश के मुख्य सचिव ओम प्रकाश का कहना है कि कुंभ को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की जारी एसओपी का पूर्ण रूप से पालन कराए जाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी बात करेंगे. केंद्र से एसओपी प्राप्त होने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत, विभिन्न विकास कार्यों और नेशनल हाइवे के निर्माण को देखते हुए मुख्य सचिव तथा अन्य अधिकारियों के साथ सड़क मार्ग से हरिद्वार पहुंचे. उन्होंने भरोसा दिया कि कुंभ पूरी तरह से 'बेदाग’ होगा.

उन्होंने कहा कि देश और दुनिया से जो श्रद्धालु यहां आएंगे, राज्य सरकार उनकी हर अपेक्षा पर पूर्ण रूप से खरी उतरेगी. उन्होंने कहा कि कोरोना का संक्रमण अभी खत्म नहीं हुआ है. कोरोना अब नए स्ट्रेन में संक्रमित हो रहा है. ऐसे में कुंभ को भव्य के साथ-साथ सुरक्षित बनाना भी राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. इसके लिए केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक ही कुंभ की व्यवस्थाएं की जाएंगी. मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि कुंभ मेला क्षेत्र में कुल 86 निर्माण कार्य स्वीकृत थे, जिनमें से दो बाद में निरस्त किए गए. स्वीकृत 84 में से अधिकांश कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं. उनके मुताबिक, सभी कार्य बढिय़ा और व्यवस्थित तरीके से किए गए हैं.

कुंभ प्रशासन कि मानें तो ऐसी 10 नई व्यवस्थाएं हैं जो इस महाकुंभ को अन्य कुंभों से अगल बनाती हैं. इस कुंभ में पहली दफा चार शाही स्नान होंगे. इनमें 11 मार्च को शिवरात्रि, 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या, 14 अप्रैल को बैशाखी और अंतिम 27 अप्रैल को चैत्र माह पूर्णिमा का शाही स्नान होगा. अब तक हरिद्वार कुंभ में तीन ही शाही स्नान होते थे. हरिद्वार शहर में फ्लाइओवरों के निर्माण से लेकर हाइवे का चौड़ीकरण भी किया गया है. इनके अलावा शहर के अन्य मार्गों को जोडऩे वाले पुल भी बने हैं.

कुंभ के लिए सुरक्षा से लेकर ट्रैफिक की प्लानिंग पूरी तरह हाइटेक हो गई है. कंट्रोल रूम में बैठकर ही शहर की पूरी ट्रैफिक व्यवस्था संभाली जा सकेगी. सुरक्षा व्यवस्था के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया है. इस सॉफ्टवेयर के बाद पुलिस को मैनुअल काम से मुक्ति मिलेगी. इससे बिना मास्क और गलत साइड में चलने पर अपने आप ही चालान कट जाएगा.

शहर में लगने वाले जाम और पार्किंग की व्यवस्था पर गूगल मैप के जरिए नजर रखी जाएगी. यात्रियों की सुरक्षा और शहर की हर गतिविधि के लिए आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. दफ्तर में बैठकर भी अधिकारी अपने मोबाइल फोन से इस पर नजर रख सकेंगे. कुंभ में कोई लापता न हो इसके लिए विशेष ऐप तैयार है. इस ऐप से कुछ ही मिनटों में लापता व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाई जा सकेगी.

रेलवे का दोहरीकरण हरिद्वार तक पूरा हो गया है. हरिद्वार और ऋषिकेश रेलवे स्टेशन तथा बस अड्डे का स्वरूप बदल गया है. तीन ही माह में धर्मनगरी का स्वरूप बदल गया है. शहर के अंदर और हाइवे पर लगने वाले जाम से निजात मिल गई है. वर्ष 2010 के 11 साल बाद हो रहे कुंभ में 10 ऐसी व्यवस्थाएं हुई हैं कि हरिद्वार एकदम नए लुक में नजर आए.  

गंगा नदी से लगते हुए भवनों और धर्मशालाओं को भगवा या पीले रंग में रंग दिया गया है. आश्रम-अखाड़ों के अलावा खाली पड़े गंगा घाटों को भी पेंट कर उनमें सांस्कृतिक चित्र उकेरे गए हैं. पहली बार पेंटिंग से पूरी तरह धर्मनगरी को सजाया गया है. पुल हो या फिर खाली पड़ी दीवार सभी जगह धार्मिक स्लोगन वाली पेंटिंग की गई है. हरकी पैड़ी आने-जाने वाले मार्ग के अलावा हाइवे के फ्लाइओवर पर भी पेंटिंग की गई है. पेशवाई मार्ग पर विशेष फोकस करते हुए इस मार्ग को सजाया गया है.

कुंभ को लेकर मुख्यमंत्री जहां पूरी तरह संतुष्ट हैं, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत तंज कसने से नहीं चूक रहे. हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''कुंभ के काम अब तीव्र गति से होंगे या धीमी रहेगी यह तो तभी देखा जा सकता है जब कुछ काम स्वीकृत हुए हों, कुछ नई योजनाओं पर काम हुआ हो. इस कुंभ में अर्धकुंभ के मुकाबले आधे से भी कम बजट खर्च हुआ है.’’ उन्होंने आरोप लगाया, ''सौंदर्यीकरण कितना हुआ है, ये तो नहीं पता लेकिन जेबों का भारीकरण जरूर हुआ है.’’ जाहिर है, हरीश रावत कुंभ को लेकर सरकार पर अव्यवस्था और अनियमितता के आरोप लगा रहे हैं.

''कुंभ को भव्य के साथ-साथ सुरक्षित बनाना भी राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. इसके लिए केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक ही व्यवस्थाएं की जाएंगी.’’
त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री

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