यह सब अक्तूबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारियों को संबोधित करने के लिए लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए) के दौरे से शुरू हुआ था. भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा समेत अन्य सेवाओं के अधिकारी एक फाउंडेशन लेवल ट्रेनिंग के लिए एकत्र हुए थे, लेकिन पीएम मोदी इस विशेष धारणा के साथ लौटे कि अधिकारियों को जिस तरह प्रशिक्षित किया जा रहा था, उसमें मौलिक सुधार की आवश्यकता है. उन्हें जो चीज सबसे ज्यादा खटकी, वह यह थी कि प्रशिक्षण में जनता पर केंद्रित शासन के बजाए नियम और कानूनों पर बहुत अधिक जोर दिया जाता है. प्रशिक्षण को राष्ट्रीय प्रयोजनों और लक्ष्यों पर ज्यादा केंद्रित होना चाहिए.
सरकारी सेवाओं से जुड़े प्रशिक्षण के लिए एलबीएसएनएए सहित 361 संस्थानों का होना भी खटका था क्योंकि इससे एक साझा राष्ट्रीय दृष्टि और सर्वोत्तम शासन प्रथाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रयोगों एवं अनुभवों से परिचित होने के अवसर कम होते हैं. मोदी ने कथित तौर पर अपने सहयोगियों से कहा, ''हमारे शासनाधिकारियों के दृष्टिकोण में पूर्ण परिवर्तन की जरूरत है. हमें एक ऐसे नए कार्यक्रम की आवश्यकता है जो उनकी दृष्टि को बदल दे और इनके भीतर छुपी हुई ऊर्जा को राष्ट्र की सेवा में लगाए.''
और जब मोदी कुछ कहते हैं, तो आमतौर पर वह हो जाता है. इसलिए अब तीन साल बाद प्रधानमंत्री ने मिशन कर्मयोगी का अनावरण किया है जो देश के नौकरशाहों को प्रशिक्षित करने और विभागों या दायित्वों के लिए चयन के तरीके बदलने को केंद्र सरकार की एक पहल है. चपरासी, क्लर्क और जूनियर स्तर के अधिकारियों से लेकर सभी नौकरशाहों तक, 37 प्रमुख नागरिक सेवाओं के सभी 46 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए इसे पहले लागू किया जाएगा. इसके बाद राज्यों की सहमति से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के 20 करोड़ कर्मचारियों को भी इस मिशन के दायरे में लाने का इरादा है.
इस कर्मयोगी परिवर्तन की धुरी आइजीओटी (एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण) सॉफ्टवेयर है जो शुरुआत में नियमित रूप से ऑन-साइट पाठ्यक्रमों के साथ काम करेगा और अगले तीन वर्षों में एक स्वतंत्र प्रशिक्षण मॉड्यूल के रूप में विकसित होगा. हालांकि अभी भी इसका प्रयोग हो रहा है. पिछले चार महीनों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कोविड संकट से निबटने के लिए 12 लाख स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया था. अगले महीने एलबीएसएनएए पाठ्यक्रम में भाग लेने वाले अधिकारी-प्रशिक्षुओं के एक बैच को 'फ्लिप्ड क्लास मॉडल' से जोड़ा जाएगा जिसका बिजनेस स्कूलों में उपयोग किया जाता है. प्रशिक्षु इसमें कोर्स सामग्री के सैद्धांतिक पक्ष को ऑनलाइन पढ़ेंगे, ताकि क्लास-टाइम का उपयोग इंटरैक्टिव केस स्टडी और समस्या-समाधान मॉडल के लिए अधिक किया जा सके.
इस कार्यक्रम के लिए नोडल एजेंसी केंद्रीय कार्मिक विभाग और प्रशिक्षण विभाग ने आइजीओटी के विकास में तेजी लाने के लिए जल्द ही कंपनी अधिनियम की धारा 8 के तहत सरकारी स्वामित्व वाले स्पेशल पर्पज व्हीकल या विशेष उद्देश्य साधन (एसपीवी) की स्थापना करेगी. यह आइजीओटी का प्रमुख वाहक होगा. अगले पांच वर्षों में मिशन कर्मयोगी के विकास के लिए 510 करोड़ रुपए रखे गए हैं.
जिन कर्मचारियों का डिजिटल दुनिया से अब तक कोई खास परिचय नहीं है, आइजीओटी उनके लिए माइक्रोसॉफ्ट वर्ड और एक्सेल जैसे काम के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर में बुनियादी पाठ्यक्रम भी पेश करेगा. व्यवहार ज्ञान और प्रबंधन तकनीकों में ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की शृंखला होगी, साथ ही हार्वर्ड और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स सहित सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन स्कूलों के ज्ञान के निचोड़ से तैयार की गई सामग्री भी शामिल होगी. आइजीओटी ऑनलाइन परीक्षा भी लेगा जिसके परिणाम अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड में शामिल होंगे और जिसका आगे चलकर प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए उपयोग किया जाएगा. कार्मिक प्रशिक्षण सचिव सी. चंद्रमौलि कहते हैं, ''इसलिए यह न केवल सीखने का एक निर्देशित मार्ग होगा, बल्कि एक ऐसा वांछनीय मार्ग भी होगा जहां एक कर्मचारी विशेष कोर्स कर सकता है. यह एक विशाल एडु-टेक पहल होगी जो आकार में शायद दुनिया में बेमिसाल होगी.''
आइजीओटी इस मायने में लोकतांत्रिक होगा कि यह सभी स्तरों के कर्मचारियों के लिए सुलभ होगा न कि केवल सिविल सेवा के उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए. यह उपयोगकर्ता के अनुकूल और ऐसे डिजाइन होगा कि सरकारी कर्मचारी किसी भी समय और स्मार्टफोन, पीसी या टैबलेट जैसे कई गैजेट्स के माध्यम से इस तक पहुंच बना सकेंगे (जो अंतत: भौतिक प्रशिक्षण संस्थान की अवधारणा को अप्रचलित कर सकेगा). सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ता के अनुभव, सीखने के स्तर, सीखी गई बातों को काम में लाने और अंतत: कार्मिक प्रबंधन प्रणाली के भाग के रूप में वार्षिक प्रदर्शन का आकलन करने में यह मदद करेगा. इनका उपयोग सरकार की ओर से पोस्टिंग और पदोन्नति निर्धारित करने के लिए किया जाएगा. सॉफ्टवेयर के लिए भारत सरकार के दृष्टिकोण से प्रभावित होकर, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने हाल ही में प्रधानमंत्री को लिखा है कि ''अफसरों के प्रशिक्षण की जरूरतों के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ कैसे उठाया जा सकता है, आइजीओटी में इसके लिए दुनियाभर में अनुकरणीय मॉडल बनने की क्षमता है.''
कर्मयोगी का बड़ा लाभ है कि यह विशिष्ट भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल है जो अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों के लिए तेजी से अनुकूल बनाने में मदद करेगा. मसलन, अगर किसी अधिकारी का तबादला श्रम विभाग से स्वास्थ्य विभाग में किया जाता है, तो आइजीओटी नई पोस्टिंग में उसकी सटीक भूमिका परिभाषित करने में मदद करेगा. आइजीओटी की परिकल्पना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले, प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्र कहते हैं, ''मिशन कर्मयोगी के साथ, पीएम ने सार्वजनिक सेवा में दीर्घकालिक सुधार के लिए एक संस्थागत ढांचा बनाने में मदद की है. कार्यक्रम ने नौकरशाही में ज्ञान पदक्रम को तोड़ा है, एक वार्षिक क्षमता-निर्माण योजना को अनिवार्य किया है और एक अत्याधुनिक डिजिटल प्रशिक्षण मंच बनाया है.''
कर्मयोगी के साथ, आइएएस, आइपीएस, आइआरटीएस और ऐसी अन्य विविध सेवाओं में भी आत्मनिर्भर भारत अभियान (एबीए), व्यवसाय में आसानी जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों और पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने जैसे राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए एक ही दृष्टि होगी. मसलन, पुलिसकर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें जागरूक करेगा कि वे एबीए जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम की सफलता के लिए सुरक्षा की दृष्टि से एक संरक्षक के रूप में कितने महत्वपूर्ण हैं. कैबिनेट सचिव राजीव गौबा कहते हैं, ''जब निजी कंपनियां निवेश करने का फैसला करती हैं, तो उस क्षेत्र में सुरक्षा की व्यवस्था एक मुख्य मानदंड होता है, जहां कंपनी स्थापित हो रही हैं. पर्यटन का विकास भी सुरक्षित क्षेत्रों में होता है. पुलिसकर्मियों को अब पता चल जाएगा कि समग्र रूप से राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है. प्रत्येक सेवा की अपनी राष्ट्रीय भूमिका और कार्य प्राथमिकताओं के संदर्भ में अब एक दृष्टि होगी. वर्तमान में यह नहीं है.''
सॉफ्टवेयर के अलावा, सरकार ने संस्थानों में प्रशिक्षण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने की दिशा में भी प्रयास किए हैं. जब सेवाओं का गठन किया गया था, तब यूपीएससी पास करने वाले अधिकारियों के लिए एलबीएसएनएए में 90-दिवसीय फाउंडेशन कोर्स अनिवार्य था. समय बीतने के साथ, 37 सेवाओं में से केवल छह (आइएएस, आइपीएस और आइएफएस सहित) में ही यह कोर्स अनिवार्य रह गया है. अन्य सेवाओं ने इसे वैकल्पिक बना दिया है. अब, सभी सेवाओं के लिए कोर्स अनिवार्य कर दिया गया है.
चार स्तरीय संरचना के तहत प्रधानमंत्री स्वयं कर्मयोगी के कामकाज की देखरेख करेंगे. 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद से ही मोदी ने कई प्रमुख सुधार किए हैं, जिसमें ट्रांसफर पोस्टिंग राज को खत्म करना और मनोनयन प्रक्रिया में अधिकारियों के चयन के लिए हर पहलू की जांच शामिल है. मिशन कर्मयोगी नौकरशाही में सुधार के लिए अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है. लेकिन यह कितना सफल रहता है इसका पता इसके असल नतीजों को देखने के बाद ही लगेगा, जिसके लिए थोड़ी प्रतीक्षा करनी होगी.

