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मंडी बचाने की मुहिम

किसान यूनियन का आरोप है कि खरीद मूल्य प्रथा और मंडी व्यवस्था खत्म कर छोटे रोजगार पर भी संकट पैदा करने की साजिश हो रही है

तकरार आंदोलनकारी किसानों को पीपली में आगे बढ़ने से रोकती हरियाणा पुलिस
तकरार आंदोलनकारी किसानों को पीपली में आगे बढ़ने से रोकती हरियाणा पुलिस
अपडेटेड 17 सितंबर , 2020

मलिक असगर हाशमी 

कोरोना संक्रमण के असर से दूसरी कई गतिविधियों की तरह सियासत भी ठंडी पड़ी है. लेकिन कृषि और मंडियों से संबंधित केंद्र सरकार के तीन अध्यादेशों के खिलाफ कुरुक्षेत्र जिले के पीपली में प्रदर्शन के लिए इकट्ठा किसानों और आढ़तियों पर पुलिस ने लाठी भांजकर हरियाणा की ठप पड़ी सियासत को गति दे दी. मुख्य विपक्ष दलों कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल ने न केवल पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है बल्कि अध्यादेश के खिलाफ लंबी लड़ाई का ऐलान भी कर दिया है.


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा के मुताबिक, आंदोलन के पहले चरण में 21 सितंबर को हरियाणा के सभी जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन के साथ अध्यादेश रद्द करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम  मांग पत्र सौंपेंगे. हरियाणा मंडी एसोसिएशन के शिव कुमार संधाला कहते हैं, ''हरियाणा और पंजाब में किसानों और आढ़तियों के बीच वर्षों पुराना प्रगाढ़ संबंध है. अध्यादेश लाकर केंद्र इस रिश्ते को तोड़ना चाहती है.''


गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में तीन अलग-अलग अध्यादेश लाकर फसलों की बिक्री और फसल मंडी की पुरानी व्यवस्था के आधुनिकीकरण का ऐलान किया था. हरियाणा के किसान संगठनों के साथ विपक्षी दलों को लगता है कि कृषि के व्यापारीकरण, मंडियों के ग्लोब्लाइजेशन और किसानों की आय बढ़ाने के बहाने फसलों की खरीद और मंडी की वर्षों पुरानी प्रथा खत्म करने की तैयारी चल रही है. ऐसा हुआ तो मंडी और पल्लेदारी प्रथा से जुड़े हजारों व्यापारी, मजदूर और किसान तबाह हो जाएंगे.


कुमारी शैलजा कहती हैं, ''हरियाणा में पहले ही रोजी-रोजगार का बुरा हाल है. कोरोना ने रही सही कसर भी पूरी कर दी. अब एमएसपी यानी खरीद मूल्य प्रथा और मंडी व्यवस्था खत्म कर छोटे रोजगार पर भी संकट पैदा करने की साजिश हो रही है. सरकार की गलत नीतियों से ही हरियाणा 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट' में पहले से फिसलकर 16वें पायदान पर आ गया है.''


इन्ही चर्चाओं के बीच 10 सितंबर को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की अपील पर प्रदेशभर से किसान, आढ़ती और कृषि मजदूर अध्यादेश के विरोध में भगवान कृष्ण की कर्मभूमि कुरुक्षेत्र के पीपली मंडी में आयोजित 'किसान बचाओ, मंडी बचाओ' रैली में भाग लेने ट्रैक्टर ट्रॉली से पहुंचे. कोरोना संक्रमण के कारण हरियाणा में लगी धारा 144 का हवाला देकर उन्हें रोका गया तो वे जगह-जगह लगे बैरिकेडिंग को तोड़ कर आगे बढऩे लगे. मौके पर जिले का पुलिस अमला मौजूद था. पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज किया. जवाब में किसानों ने भी पुलिसकर्मियों पर पत्थर बरसाए, जिससे एक सरकारी गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई.


इस दौरान भाकियू के प्रवक्ता राकेश बैंस को शरीफगढ़ गांव से गिरफ्तार किया गया. पुलिस कार्रवाई के चलते वहां एकत्रित भीड़ आवेश में आ गई. प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली-अमृतसर हाइवे जाम कर दिया. तकरीबन चार घंटे तक जाम लगा रहने से सड़क के दोनों ओर जब गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं तो आखिरकार प्रशासन को किसानों और आढ़तियों को पीपली में रैली करने की इजाजत देनी पड़ी.


भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी इसे 'आंदोलन की पहली कामयाबी' मानते हैं. बावजूद इसके उन्होंने अध्यादेश वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है. उनका कहना है, ''केंद्र पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बिहार में इसे पहले लागू कर चुकी है, जो फ्लॉप रही. सरकार इसकी जगह कृषि क्षेत्र में बदलाव लाए, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में अन्नदाताओं की हालत बहुत खराब है.'' अखिल भारतीय कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता और हरियाणा निवासी रणदीप सुरजेवाला कहते हैं, ''केंद्र का अगर तीन नए अध्यादेशों से खरीद मूल्य और आढ़ती प्रथा समाप्त करने का इरादा नहीं है तो कानून पास कर ऐलान करे कि हर स्थिति में किसानों की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता रहेगा.''


एमएसपी की व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है और मंडी व्यवस्था भी बहुत पुरानी है. किसान यहां आढ़तियों के माध्यम से अपनी फसलें बेचते हैं. सरकार की समझ है कि बिचौलियों के कारण किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है.

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