दक्षिणमध्य राजस्थान का भीलवाड़ा सिर्फ एक सप्ताह में लंबा सफर तय कर चुका है. कपड़ों के लिए मशहूर यह शहर पूरे देश के लिए एक मॉडल बन गया है. कुछ दिनों पहले जब यहां के बांगड़ अस्पताल में एक डॉक्टर के कोरोना से संक्रमित होने की खबर आई तो सनसनी और डर फैल गया था.
लेकिन कोविड-19 के फैलाव को रोकने के लिए यहां जो रणनीति अपनाई गई, वह एक मिसाल बन गई है और केंद्र हर जगह महामारी को रोकने के लिए इसे अपनाना चाहता है. 3 अप्रैल को बिना किसी छूट वाले 10 दिन का 'महा कर्फ्यू' लागू होने से पहले भीलवाड़ा जिले में कोविड-19 के 27 मामले थे. 2 अप्रैल से भीलवाड़ा जिले में एक भी नया मामला सामने नहीं आया है.
देश के 736 जिलों में से 284* जिलों (या 39 फीसद) में कोविड-19 के मामले सामने आ चुके हैं. 7 अप्रैल तक इन मामलों में से 63 फीसद मामले 17 राज्यों के 63 जिलों में पाए गए. इन जिलों में से 39 जिले पांच राज्यों—तमिलनाडु, दिल्ली, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश—के हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय की नियंत्रण योजना के मुताबिक, कोविड-19 का फैलाव एच1एन1 इन्फ्लूएंजा महामारी जैसा लग रहा है.
अगर इसके फैलाव का यह तरीका बना रहता है तो देश के सभी हिस्सों का हाल एक जैसा नहीं रहेगा. इससे हर जगह अलग-अलग तरीका अपनाने की रणनीति को बल मिलता है. इसका मतलब है कि संक्रमित और उभरती नई जगहों की पहचान कर संक्रमण को नियंत्रित करने पर जोर दिया जाए. देश भर में इसके फैलाव को देखते हुए (देखें इन्फोग्राफिक: भारत के कोविड केंद्र) यह काम भी आसान नहीं होगा. नई उभरती जगहों की पहचान करना और मरीजों को अलग रखना बहुत कठिन है—इसके लिए बेहद प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों को तैनात करने और अन्य संसाधनों को मुहैया कराने की जरूरत है.
* जिलावार उपलब्ध 4,067 मामलों पर आधारित, कम-से-कम 15 मामलों वाले जिलों को शामिल किया गया है

