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राजस्थानः ढिलाई की नही गुंजाइश

गहलोत ने कोरोना हॉटस्पॉट बन चुके भीलवाड़ा में आवाजाही पर सख्त पाबंदी लगाई और संक्रमण दोबारा फैलने से रोकने के लिए 'बगैर किसी छूट के कर्फ्यू' लागू किया.

हाथों में हाथ हाथों को सैनिटाइज करने में मुख्यमंत्री गहलोत की मदद करते राज्यपाल कलराज मिश्र
हाथों में हाथ हाथों को सैनिटाइज करने में मुख्यमंत्री गहलोत की मदद करते राज्यपाल कलराज मिश्र
अपडेटेड 12 अप्रैल , 2020

रोहित परिहार

राजस्थान में 2 मार्च को पहला मामला सामने आने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में कोविड-19 को फैलने से रोकने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया. काबू पाने के लिए क्लस्टर योजना पर काम किया गया. इस योजना का मकसद था पता लगाकर संक्रमण की शृंखला को तोड़ा जाए, उसे नए इलाकों में फैलने से रोका जाए और बीमारी को किसी एक भौगोलिक दायरे में ही सीमित कर दिया जाए.

इसमें भौगोलिक क्वारंटीन लागू करना, सामाजिक दूरी बनाए रखने के उपाय करना, सभी संदिग्धों की जांच करना, पॉजिटिव मामलों के संपर्क में आए सभी लोगों को घरों में क्वारंटीन करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य की दिशा में उठाए गए रोकथाम के कदमों के पालन को लेकर लोगों को एकजुट करना.

इस रणनीति का असर भीलवाड़ा में देखने को मिला. गहलोत ने हॉटस्पॉट बन चुके शहर में किसी भी तरह के आवागमन पर सख्ती से पाबंदी लगाई और बीमारी के फिर से आने की स्थिति को रोकने के लिए दुबारा कर्फ्यू तक लगाने में हिचक नहीं दिखाई.

जब उन्हें पता चला कि जयपुर की एक कॉलोनी रामगंज में कुछ स्थानीय नेता और कार्यकर्ता अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं और पुलिस भी कर्फ्यू लगाने को लेकर जरूरी सख्ती नहीं दिखा रही है तो गहलोत ने संक्रमण का एक और केंद्र बन चुकी इस कॉलोनी में तुरंत सख्त लॉकडाउन के आदेश दे दिए, जिस तरह के भीलवाड़ा में दिए गए थे. इस बीच, कुछ इलाकों में गहलोत ने कृषि उपकरणों और नई उपज के आने-जाने की इजाजत दी और उर्वरकों व अन्य सामान की दुकानों को भी खोलने की मंजूरी दे दी.

गहलोत ने सावधानी से इस संकट का राजनीतिकरण नहीं होने दिया और किसी भी चूक के लिए केंद्र सरकार पर कोई आरोप लगाने से बचते रहे. वे दिन में 16 घंटे तक काम कर रहे हैं और राज्य की कोरोना से लडऩे की रणनीति का आगे बढ़कर नेतृत्व कर रहे हैं. उन्हें जब भी किसी स्रोत से लोगों के भूखे होने की सूचना मिलती है तो वे तुरंत वहां खाद्य आपूर्ति पहुंचाने के निर्देश जारी करते हैं.

मुख्यमंत्री ने राज्य में हर गरीब परिवार को 1,000 रु. की मदद की भी तुरंत घोषणा की और 310 करोड़ रु. हस्तांतरित भी किए जा चुके हैं. साथ ही उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते की किस्त जारी कर दी और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी प्रोत्साहन राशि का ऐलान किया जबकि खुद अपनी मार्च महीने की तनख्वाह में 75 फीसद की कटौती कर दी. उनके मंत्रियों और राज्य सरकार के अधिकतर कर्मचारियों ने भी उनका पूरा साथ दिया.

खूबी

गहलोत ने कोरोना हॉटस्पॉट बन चुके भीलवाड़ा में आवाजाही पर सख्त पाबंदी लगाई और संक्रमण दोबारा फैलने से रोकने के लिए 'बगैर किसी छूट के कर्फ्यू' लागू किया. लोगों को घरों के बाहर निकलने तक की इजाजत नहीं दी

''केंद्र सरकार को लॉकडाउन के मानदंडों पर राज्यों को फैसला करने देना चाहिए और उसे चाहिए कि वह हमारा बकाया भी जल्दी से जारी करे. राज्यों को कर्ज के लिए भी बेहतर वित्तीय शर्तें दी जानी चाहिए''

—अशोक गहलोत.

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